प्राथमिक शिक्षा

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भारत में यद्यपि बहुत समय से इस बात का अनुभव किया जाता रहा था कि भारतीय नागरिकों में व्याप्त निरक्षरता को समाप्त किया जाना चाहिए, परन्तु स्वतन्त्रता-प्राप्ति के पश्चात् तो स्वतन्त्र नागरिकों को स्वतन्त्रता की सुरक्षा और प्रगति के लिए तैयार करने के उद्देश्य से जनमत को सफल बनाने के प्रयास करने आवश्यक प्रतीत हुए। जनमत की सफलता साक्षरता पर आधारित होती हैं। अतः साक्षरता के प्रसार के लिए प्राथमिक शिक्षा की अनिवार्यता पर बल देना पड़ा। पंचवर्षीय योजनाओं के माध्यम से प्राथमिक शिक्षा के विकास में सराहनीय प्रयत्न किये गये। प्रथम योजना के प्रारम्भ में 42% बालक-बालीकाओं के लिए प्राथमिक शिक्षा-सुविधाऍ प्राप्त थी। प्रथम पंचवर्षीय योजना में 60% तथा व्दितीय पंचवर्षीय योजना में 100% प्राथमिक शिक्षा-विकास लाने की योजना बनायी गयी। 6 वर्ष से 11 वर्ष की आयु के बालकों के लिए अनिवार्य शिक्षा-योजनाऍ लागू की गयीं और अनिवार्य शिक्षा को निःशुल्क देने का भी निर्णय किया गया। परन्तु चौथी योजना तक भी 100% प्राथमिक निःशुल्क अनिवार्य शिक्षा की व्यवस्था नहीं की जा सकी।