प्राचीन रोम में धर्म

मुक्त ज्ञानकोश विकिपीडिया से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

रोमन धर्म प्राचीन रोम नगर और इटली देश का सबसे मुख्य- और राजधर्म था । रोमन धर्म सामी धर्म बिलकुल नहीं था। वो एक भारोपीय (हिन्द-यूरोपीय) धर्म था। ये एक मूर्तिपूजक और बहुदेवतावादी धर्म था । इसमें एक अदृश्य ईश्वर की अवधारणा नहीं थी । ईसाई धर्म के राजधर्म बनने के बाद ईसाइयों ने इसपर प्रतिबंध लगा दिया । इसके बाद ये लुप्त हो गया । फिर भी, आज कल, कुछ यूरोपीय लोग सामी धर्म (यहूदी, ईसाई और ईस्लामी धर्म) छोड़ दिये और रोमन धर्म और दर्शन वापस चल चुके हैं। क्योंकि वे लोगों को लगता है कि रोमन धर्म ईसाई धर्म से अच्छा है और सहिष्णु भी।

रोमन धर्म में कुछ बड़े, गहरे और मुक्त दर्शन हैं। रोमन लोग बहुत धार्मिक और आत्मिक लोग थे।

इस धर्म के कई देवताओं के सम्तुल्य देवता प्राचीन यूनानी धर्म में, जर्मनिक धर्म, फ़ारसी धर्म और हिन्दू धर्म में मिलते हैं। इसका वजह है कि वे सब धर्म वैदिक और आर्य धर्म हैं। जैसे यूनानी, जर्मनिक, फ़ारसी और हिन्दू संस्कृति, रोमन संस्कृति और धर्म भारोपीय (हिन्द-यूरोपीय) ही थे।

ये देवता और देवियाँ रोमन हैं। तुल्य हिन्दू देवता देवियाँ भी लेखे हुए हैं लेकिन 100% समान नहीं हैं। कुछ अलग भी है, मगर सच है कि रोमन ईश्वरीय परम्परा हिन्दु परम्परे से दूर नहीं है। रोमन और हिन्दू दोनों भारोपीय हैं, यानी बहन संस्कृतियाँ

देवता[संपादित करें]

इस धर्म में कई देवता थे : यूपीतेर (श्री इन्द्र), बाक्खस (श्री रुद्र), आपोल्लो (सूर्य), कुपीदो (प्रेम), मार्स (श्री कार्तिकेय), मेर्कूरियस (बुध), प्लूतो (यम), सातूर्न (शनि), वुल्कान (ज्वालामुखी अग्नि), नेप्तून (श्री वरुण), मिथ्रास (मित्र), इत्यादि । रोमन देवताओं में बाद के रोमन सम्राट भी शामिल थे ।

देवियाँ[संपादित करें]

प्रमुख देवियाँ थीं यूनो (महादेवी), मीनेर्वः (सरस्वती), केरेस और फ़्लोरा (मिट्टी और प्रकृति देवियाँ), फ़ोर्तूनः (लक्षमी), द्याना (शिकार की देवी), वेनस (पार्वती), इत्यादि ।

पूजा[संपादित करें]

पूजा मुख्यतः पशुबलि द्वारा होती थी (गाय, सांड, सूअर, भेड़, आदि) । इस धर्म में कुछ ख़ास आध्यात्मिकता नहीं थी ।