प्राचीन यूनानी भाषा

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प्राचीन यूनानी भाषा (अथवा प्राचीन ग्रीक, अंग्रेज़ी : Ancient Greek, यूनानी : हेल्लेनिकी) प्राचीन काल के यूनान देश और उसके आस-पास के क्षेत्रों की मुख्य भाषा थी । इसे संस्कृत की बहिन भाषा माना जा सकता है । ये हिन्द-यूरोपीय भाषा-परिवार की यूनानी शाखा में आती है । इसे एक शास्त्रीय भाषा माना जाता है, जिसमें काफ़ी ज़्यादा और उच्क कोटि का साहित्य रचा गया था, जिसमें सबसे ख़ास होमर के दो महाकाव्य इलियाड और ओडेस्सी हैं । इसका व्याकरण, शब्दावली, ध्वनि-तन्त्र और संगीतमय बोली इसे संस्कृत के काफ़ी करीब रख देती है । इसकी बोलभाल कि बोली कोइनै ग्रीक में ही बाइबल का लगभग सारा नया नियम लिखा गया था ।

लिपि[संपादित करें]

ये भाषा यूनानी लिपि में लिखी जाती थी, जिसके अक्षर आज भी गणित में प्रयुक्त होते हैं । प्राचीन यूनानी लिपि पहले बायें से दायें लिखी जाती थी, फिर अगली पंक्ति में दायें से बायें । यही नहीं, अगली पंक्ति मे सभी अक्षरों के आइने वाले प्रतिबिम्ब लिखने होते थे ! लगभाग दूसरी सदी ईसापूर्व से यूनानियों ने लिखावट हमेशा बायें से दायें लिखना शुरु कर दिया । अक्षर कुछ प्रान्तीय भिन्नता भी रखते थे ।

ध्वनि-तन्त्र[संपादित करें]

संस्कृत को छोड़ प्राचीन यूनानी शायद अकेली ऐसी भाषा है (हिन्द-यूरोपीय परिवार में), जिसमें शुद्ध महाप्राण ध्वनियाँ मिल सकती हैं : फ, थ और ख ।

शब्द रूप[संपादित करें]

संस्कृत की ही तरह प्राचीन यूनानी भी बहिर्मुखी श्लिष्ट-योगात्मक भाषा थी । मतलब कि उसमें भी शब्दों के अन्त में प्रत्यय लगाकर संज्ञा और क्रिया के रूप और विभक्तियाँ बनायी जाती थीं । संस्कृत को छोड़कर प्राचीन यूनानी हि ऐसी भाषा है जिसमें संज्ञा और क्रिया में "द्विवचन" होता है ।