प्रभाष गिरि

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प्रभाष गिरि में स्वामी पद्म प्रभु की प्रतिमा।

भारत के उत्तर प्रदेश राज्य के कौशाम्बी जिले में जैन धर्मावलम्बियों का प्रमुख तीर्थस्थल प्रभाष गिरि स्थित है। यह तीर्थस्थल सदियों से जैन धर्म के छठे तीर्थकर स्वामी पद्म प्रभु की स्मृतियों को सँजोए हुए है। यह तीर्थस्थल जैनियों की आस्था का केन्द्र बिन्दु भी बना हुआ है।

जि़ला मुख्यालय से लगभग २७ किलोमीटर दूर यह तीर्थस्थल कौशाम्बी के पमोसा नामक स्थान पर स्थित है। इस स्थान के बारे में कहा जाता है की स्वामी पद्म प्रभु ने प्रभाष गिरि नामक स्थान पर कठोर तपस्या कर ज्ञान प्राप्त किया था। जनश्रुति के अनुसार स्वामी पद्म प्रभु का जन्म प्रभाष गिरि में हुआ था। जैन धर्म के पांच कल्याणक में से दो को पद्म प्रभु ने यहीं प्राप्त किया जबकि अंतिम उन्होंने बिहार प्रांत के शिखर स्थान पर प्राप्त किया था। उनके मोक्ष पाने के बाद स्थानीय जनता ने प्रभाष गिरि में पद्म प्रभु की संगमरमर की प्रतिमा स्थापित की। पद्म प्रभु की प्रतिमा के दर्शनों के लिए देशभर से जैनियों के यहां आने का सिलसिला चल पडा। बाद में पद्म प्रभु की प्रतिमा चोरी चले जाने के बाद यहीं पर उनकी दूसरी प्रतिमा लगाई गई जिसके दर्शनों के लिए जैन धर्मावलम्बी यहां आते रहते हैं। प्रभाष गिरि में हर वर्ष होली के बाद चैत्र पूर्णिमा के अवसर पर विशाल मेला लगता है जिसमें देशभर से आए श्रद्धालु पद्म प्रभु की प्रतिमा के आगे माथा टेकते हैं।

प्रभाष गिरि का महत्व इसलिए भी बढ जाता है क्योंकि जैन धर्म के २४वें व अंतिम धर्मगुरु महावीर स्वामी ने यहां १२ वर्षों तक कठोर तपस्या की थी।

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