प्रभात रंजन सरकार

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आधुनिक लेखक, दार्शनिक, वैज्ञानिक, सामाजिक विचारक और आध्यात्मिक नेता प्रभात रंजन सरकार ऊर्फ आंनदमूर्ति का 'आनंद मार्ग' दुनिया के 130 देशों में फैला हुआ है। उनकी किताबें दुनिया की सभी प्रमुख भाषाओं में अनुवादित हो चुकी है। परमाणु विज्ञान पर उनके चिंतन के कारण उन्हें माइक्रोवाइटा मनीषी भी कहा जाता है।

उन्होंने विज्ञान, साम्यवाद और पूँजीवाद के समन्वय के विकल्प पर बहुत विचार किया है। वे खुद प्रगतिशिल थे, लेकिन आनंद मार्गियों अनुसार पश्चिम बंगाल में उनके आंदोलन को कुचलने के लिए वामपंथियों ने आनंद मार्गियों को कई तरह से प्रताड़ित किया जो सिलसिला आज तक जारी है। ओशो के बाद आनंदमूर्ति सर्वाधिक विवादित पुरुष माने जाते हैं।

आनंदमूर्ति का जन्म 1921 और मृत्यु 1990 में हुई थी। मुंगेर जिले के जमालपुर में एशिया का सबसे पुराना रेल कारखाना है। वे रेलवे के एक कर्मचारी थे। यह जमालपुरा आनंद मार्गियों के लिए मक्का के समान है। यहीं पर सन् 1955 में आनंद मार्ग की स्थापना हुई थी।

तंत्र और योग पर आधारित इस संगठन का उद्‍येश्य है आत्मोद्धार, मानवता की सेवा और सबकी शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक आवश्यकताओं की पूर्ति। आनंदमार्ग के दुनिया भर में चिंतन केंद्र हैं जहाँ तंत्र, योग और ध्यान सिखाया जाता है। इस एकेश्वरवादी संगठन का मूल मंत्र है ' बाबा नाम केवलम'।