प्रबलित कंक्रीट

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प्रबलित कंक्रीट (अंग्रेजी:Reinforced concrete), वह कंक्रीट होता है जिसमें, कंक्रीट को तनाव की स्थिति में भी मजबूत रखने के लिए प्रबलन छड़ों (बार), प्रबलन ग्रिडों, प्लेट या तंतुओं को कंक्रीट में शामिल किया जाता है। कंक्रीट संपीड़न में मजबूत लेकिन तनाव में कमजोर होता है इसीलिए प्रबलन की प्रक्रिया के द्वारा इसे तनाव में भी मजबूती प्रदान की जाती है। कंक्रीट का आविष्कार एक फ्रांसीसी माली जोसेफ मोनियर द्वारा सन 1849 में किया गया था और 1867 में इसे पेटेंट प्राप्त हुआ। लोहे या इस्पात के द्वारा प्रबलित कंक्रीट लौह या फेरो कंक्रीट कहलाता है। कंक्रीट को प्रबलित करने में प्रयुक्त अन्य सामग्रियां कार्बनिक और अकार्बनिक तंतु या अलग अलग रूपों में इनका मिश्रण हो सकता है। तनाव में कंक्रीट का प्रतिबल विफलता इतनी कम होती है कि प्रबलन सामग्री का कार्य इस अवस्था में इसके टूटे हुये खंडों को एक साथ पकड़े रहना भी होता है।

एक मजबूत, नमनीय और टिकाऊ निर्माण के लिए प्रबलन सामग्री में निम्नलिखित गुण होने चाहिए:

  • उच्च सामर्थ्य
  • उच्च तनन प्रतिबल
  • क्रंक्रीट के साथ अच्छा बन्ध (बॉन्ड)
  • ऊष्मीय अनुकूलता
  • कंक्रीट वातावरण में स्थायित्व

औद्योगिक राष्ट्रों में, लगभग सभी कंक्रीट निर्माण प्रबलित होते हैं।

इतिहास[संपादित करें]

आर.सी.सी. का इमारत निर्माण में प्रयुक्त पदार्थ् रूप में प्रथम प्रयोग सन 1864 में, विलियम बाउटलैण्ड विल्किन्सन द्वारा निर्मित न्यूकैसल, संयुक्त राजशाही के एक मकन में हुआ था। 1887 में ए.जी.वायस्स द्वार आर.सी.सी. पर एक पुस्तक प्रकाशित होने के साथ ही, एक जर्मन कंपनी वायस एंड फ्रिटैग की स्थापना 1875 में हुई। यूरोप में, उनके मुख्य प्रतिद्वंदी फ्रैंकोइस हैन्निबीक की संस्थ थी, जो 1892 मं स्थापित हुई।

एक आर.सी.सी प्रणाली को संयुक्त राज्य अमेरिका के थैडस हायत ने 1878 में पेटेंट (पूर्णधिकार या प्रयोगाधिकार) सुरक्षित करा लिया था। यू.एस में निर्मित प्रथम आर.सी.सी. इमारत थी १८९३ में बनी पैसिफिक कोस्ट बोरैक्स कंपनी की रिफाइनरी (तेल शोधक कारखाना), जो अलमेडा, कैलिफोर्निया में स्थित है।

निर्माण में प्रयोग[संपादित करें]

रेनफोर्स्ड कांक्रीट का व्यवहार[संपादित करें]

पदार्थ[संपादित करें]

विशिष्ट लक्षण[संपादित करें]

जंग-प्रतिरोधी उपाय[संपादित करें]

इस्पात रेन्फोर्स्ड कांक्रीट के प्रायः असफलता कारक[संपादित करें]

यांत्रिक[संपादित करें]

कार्बनीकरण[संपादित करें]

Rebar for foundations and walls of sewage pump station.

]</ref> The carbon dioxide from the air reacts with the alkali in the cement and makes the pore water more acidic, thus lowering the pH. Carbon dioxide will start to carbonate the cement in the concrete from the moment the object is made. This carbonatation process (in Britain, called carbonation) will start at the surface, then slowly move deeper and deeper into the concrete. If the object is cracked, the carbon dioxide of the air will be better able to penetrate into the concrete. When designing a concrete structure, it is normal to state the concrete cover for the rebar (the depth within the object that the rebar will be). The minimum concrete cover is normally regulated by design or building codes. If the reinforcement is too close to the surface, early failure due to corrosion may occur.

One method of testing a structure for carbonatation is to drill a fresh hole in the surface and then treat the surface with phenolphthalein. This will turn [pink] when in contact with alkaline cement, making it possible to see the depth of carbonatation. An existing hole is no good because the exposed surface will already be carbonated --->

क्लोराइड[संपादित करें]

चित्र:October 2006 021.jpg
The Paulins Kill Viaduct, Hainesburg, New Jersey, is 115 feet (35 m) tall and 1,100 feet (335 m) long, and was heralded as the largest reinforced concrete structure in the world when it was completed in 1910 as part of the Lackawanna Cut-Off rail line project. The Lackawanna Railroad was a pioneer in the use of reinforced concrete

एल्कली –सिलिका प्रतिक्रिया[संपादित करें]

]</ref>[1] This phenomenon has been popularly referred to as "concrete cancer". --->

उच्च एल्युमिना सीमेंट का अंतरण[संपादित करें]

सल्फेट[संपादित करें]

फाइबर-रेन्फोर्स्ड कांक्रीट[संपादित करें]

गैर-इस्पाती रेन्फोर्स्मेंट[संपादित करें]

संदर्भ[संपादित करें]

Threlfall A., et al. Reynolds's Reinforced Concrete Designer's Handbook -- 11th ed. ISBN 978-0-419-25830-8.

  1. http://www.cementindustry.co.uk/main.asp?page=272