प्रतिरोध

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रजिस्टर करंट के प्रवाह में अवरोध उत्पन्न करता है और उसे हम ओह्म (Ω) में मापते हैं. ये मुख्यतः चार प्रकार के होते हैं. कार्बन, फिल्म, वायरवाउंड और सेमीकन्डक्टर. इसके अलावा थर्मिस्टर जो तापमान के हिसाब से अपना प्रतिरोध घटता या बढाता है और वेरिअबल रजिस्टर जिसे प्रीसेट भी कहते हैं. रजिस्टर की क्षमता हम उसके ऊपर की गयी कलर कोडिंग से कर सकते हैं. सामान्यतः एक रजिस्टर के ऊपर चार कलर होते हैं. उनमे से तीन पास पास और एक थोडा अलग हट कर होता है.

पहले तीन कलर रजिस्टर की क्षमता निर्धारित करते हैं और चौथा कलर रजिस्टर का टोलेरंस निश्चित करता है. कभी कभी इसमें पांच या छः कलर भी हो सकते हैं जो कि रजिस्टर की तापमान क्षमता को दर्शाते हैं. कलर कोडिंग निम्न तरीके से होती है:

   * काला: 0 (Black)
   * भूरा: 1 (Brown)
   * लाल: 2 (Red)
   * नारंगी: 3 (Orange)
   * पीला: 4 (Yellow)
   * हरा: 5 (Green)
   * नीला: 6 (Blue)
   * बैगनी: 7 (Violet)
   * स्लेटी: 8 (Gray)
   * सफ़ेद: 9 (White)

टोलेरंस कलर

   * गोल्ड: 5%
   * सिल्वर: 10%
   * कोई रंग नहीं: 20%

इस कलर कोडिंग को हम इस तरह से याद रख सकते हैं: B B ROY Great Britain Very Good Wife. अब मानिये की किसी रजिस्टर की कलर कोडिंग है पीला, लाल, नारंगी और सिल्वर. सबसे पहले हरेक रंग के लिए नंबर निर्धारित कीजिये. यहाँ पीले के लिए 4, लाल के लिए 2, नारंगी के लिए 3 और सिल्वर का मतलब है +/- 10% टोलेरंस.

अब पहले दो नंबर उसी तरह लिख दीजिये और उसके बाद तीरसे नंबर के जितने शून्य लगा दीजिये (x 10 पर पावर तीसरी संख्या). इसका मतलब इस रजिस्टर की क्षमता होगी 42000 ओह्म या 42 किलो ओह्म (KΩ). +/- 10% का मतलब है कि इसकी क्षमता 42000 - 4200 Ω (42000 x 10%) से 42000 + 4200 Ω (42000 x 10%) के बीच ही होगी. मतलब 37800 Ω से 46200 Ω के बीच.

उसी प्रकार अगर किसी रजिस्टर कि कलर कोडिंग बैगनी, नीला और काला है तो इसकी क्षमता होगी 76 Ω (बैगनी=7, नीला=6 और 10 पर पावर 0 1 होता है इसलिए 76 x 1 = 76 Ω