प्यार तो होना ही था (1998 फ़िल्म)

मुक्त ज्ञानकोश विकिपीडिया से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज
प्यार तो होना ही था
चित्र:प्यार तो होना ही था.jpg
प्यार तो होना ही था का पोस्टर
निर्देशक अनीस बज़मी
लेखक अनीस बज़मी
पटकथा अनीस बज़मी
अभिनेता अजय देवगन,
काजोल देवगन
प्रदर्शन तिथि(याँ) १५ जुलाई, 1998
देश भारत
भाषा हिन्दी

प्यार तो होना ही था 1998 में बनी हिन्दी भाषा की फिल्म है ।

चरित्र[संपादित करें]

संक्षेप[संपादित करें]

संजना (काजोल), एक बहुत बेबकूफ औरत, फ्रांस में अपने अंकल (हरीश पटेल) के साथ रहती है और अपने प्यार राहुल (बिजय आनंद) से शादी करने वाली है| राहुल को काम के सिलसिले में इंडिया जाना परेगा और संजना उसके साथ जाने की ज़िद करती है, जब कि वह प्लेन में जाने से डरती है| जब प्लेन उरने के लिए तैयार होती संजना का डर हद पार कर देता है और वह प्लेन से उतरने कि ज़िद करती है|

एक दिन राहुल गलती से संजना को बोलता है कि उसको निशा (कश्मीरा शाह) से प्यार हो चुका है और वह पैरिस वापस आकर संजना से शादी नहीं कर सकता|

संजना फैसला करती है कि वह राहुल को वापस लाएगी चाहे कुछ भी हो, चाहे उसे प्लेन में भी क्यों न बैठना परे| जब प्लेन उरने के लिए तैयार होती है एक यात्री उसके साथ बैठता है नाम शेखर (अजय देवगन)| उसको एहसास होता है कि संजना को उरने से डर लगता है तो वह उसको गुस्सा दिलाकर उसका ध्यान बटाता है| प्लेन के वक़्त संजना गलती से शेखर पर शराब फेक देती है और उसको एहसास होता है कि वह कुछ छुपा रहा है| शेखर बाथरूम पहुचता है और अपने जेब से एक पौधा निकालता है| जब वह पौधे में से कपरा हटाता है हमे एहसास होता है कि शेखर असल में एक चोर है और उसने एक हीरे का हार चुराया है पैरिस से और एक पौधे में छुपाया है. एक खतरनाक सफ़र के बाद वह लोग इंडिया पहुचते हैं|

संजना अपने खोये हुए प्यार को ढूँढती है और उसका बैग भी चुराया गया है| उसको थोडा पता है कि शेखर अपने कुछ चोरी का सामान उसके बैग में डाला है. शेखर फिर उसके बैग को ढूँढता है और संजना को राहुल को ढूडने में मदद करता है, और राहुल पालम बीच जाता है| शेखर को घर में संजना से प्यार हो जाता है| संजना को अबभी राहुल से प्यार है, और जब वह पाली घाट पहुचती है, वह अबभी राहुल और निशा को अलग करना चाहती है| राहुल को जलाने के लिए, संजना और शेखर प्यार करने का नाटक करते हैं| पर, संजना अबभी नाटक से काम चलती है, जब यह साविर्त होता है कि वह एक अमीर वारिस है| यह राहुल को निशा से अलग कर देता है, और संजना तक पहुच जाता है| पर संजना को शेखर से प्यार हो चुका है, और वह उसे कभी बता नहीं सखती, वह वापस फ्रांस जाने का फैसला करती है| तब शेखर को संजना के लिए प्यार एहसास होता है, और ट्रैफिक के जल्दी में उसकी गारी फट जाती है - अंत में वह प्लेन को जाने से रोक लेता है|

मुख्य कलाकार[संपादित करें]

दल[संपादित करें]

संगीत[संपादित करें]

रोचक तथ्य[संपादित करें]

परिणाम[संपादित करें]

बौक्स ऑफिस[संपादित करें]

समीक्षाएँ[संपादित करें]

नामांकरण और पुरस्कार[संपादित करें]

बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]