पेशवा बाजीराव द्वितीय

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पेशवा बाजीराव द्वितीय
नानासाहब पेशवा
पेशवा
Peshwa bajirao Birla mandir 6 dec 2009 (47).JPG
पेशवा बाजीराव का बिरला मंदिर, दिल्ली में एक स्तंभ पर शैल चित्र
शासन मराठा साम्राज्य
राज तिलक २५ जून , १७४०
पूरा नाम बाळाजी बाजीराव भट (पेशवे)
उपाधियाँ बालाजी बाजीराव
जन्म १६ दिसंबर, १७२० या १७२१
मृत्यु १७६१
पूर्वाधिकारी बाजीराव पेशवा प्रथम
विश्वासराव
भार्या काशीबाई
पिता बाजीराव पेशवा प्रथम
माता गोपिकाबाई

पेशवा बाजीराव (१७२१-१७६१) मराठा साम्राज्य के शासक थे। बाजीराव, शिवाजी महाराज के पौत्र शाहूजी महाराज के पेशवा (प्रधान) थे। इनके पिता श्री बालाजी विश्वनाथ पेशवा भी शाहूजी महाराज के पेशवा थे। बचपन से बाजीराव को घुड़सवारी करना, तीरंदाजी, तलवार भाला, बनेठी, लाठी आदि चलाने का शौक था। १३-१४ वर्ष की खेलने की आयु में बाजीराव अपने पिताजी के साथ घूमते थे।[1] उनके साथ घूमते हुए वह दरबारी चालों व रीतिरिवाजों को आत्मसात करते रहते थे। यह क्रम 19-20 वर्ष की आयु तक चलता रहा। जब बाजीराव के पिताश्री का अचानक निधन हो गया। पिता के निधन के बाद मात्र बीस वर्ष की आयु के बाजीराव को शाहूजी महाराज ने पेशवा बना दिया। पेशवा बनने के बाद अगले बीस वर्षों तक बाजीराव मराठा साम्राज्य को बढ़ाते रहे। इसके लिए उन्हें अपने दुश्मनों से लगातार लड़ाईयाँ करना पड़ी। अपनी वीरता, अपनी नेतृत्व क्षमता व कौशल युद्ध योजना द्वारा यह वीर हर लड़ाई को जीतता गया। विश्व इतिहास में बाजीराव पेशवा ऐसा अकेला योद्धा माना जाता है जो कभी नहीं हारा। छत्रपति शिवाजी महाराज की तरह वह बहुत कुशल घुड़सवार था। घोड़े पर बैठे-बैठे भाला चलाना, बनेठी घुमाना, बंदूक चलाना उनके बाएँ हाथ का खेल था। घोड़े पर बैठकर बाजीराव के भाले की फेंक इतनी जबरदस्त होती थी कि सामने वाला घुड़सवार अपने घोड़े सहित घायल हो जाता था।

इस समय भारत की जनता मुगलों के साथ-साथ अंग्रेज़ों व पुर्तगालियों के अत्याचारों से त्रस्त हो चुकी थी। ये भारत के देवस्थान तोड़ते, जबरन धर्म परिवर्तन करते, महिलाओं व बच्चों को मारते व भयंकर शोषण करते थे।[1] ऐसे में बाजीराव पेशवा ने उत्तर भारत से लेकर दक्षिण भारत तक ऐसी विजय पताका फहराई कि चारों ओर उनके नाम का डंका बजने लगा। लोग उन्हें शिवाजी का अवतार मानने लगे। बाजीराव में शिवाजी महाराज जैसी ही वीरता व पराक्रम था तो वैसा ही उच्च चरित्र भी था।

[संपादित करें] इन्हें भी देखें

पूर्वाधिकारी
बाजिराव प्रथम
पेशवा
१७४०-१७६१
उत्तराधिकारी
माधवराव प्रथम

[संपादित करें] संदर्भ

  1. 1.0 1.1 अपराजेय सेनानी बाजीराव (प्रथम) ।वेबदुनिया

[संपादित करें] बाहरी सूत्र

वैयक्तिक औज़ार
नामस्थान

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