पेरीटोनियल डायलिसिस
पेरीटोनियल डायलिसिस या ओटोमेटेड पेरीटोनियल डायलिसिस 'एपीडी' डायलिसिस यानि कृत्रिम रक्त शोधन हेतु गुर्दे का एक विकल्प है। पेरिटोनियल डायलिसिस के तहत पेट की लाइनिंग या पेरिटोनियल मैम्ब्ा्रेन को कुदरती फिल्टर की तरह प्रयोग कर रक्तधारा से गंदगी को निकाल दिया जाता है, इसलिए यह तरीका शरीर के भीतर काम करता है। कैथेटर कही जाने वाली एक छोटी ट्यूब छिद्र द्वारा पेट में डाली जाती है और फ्लूइड को पेट में इंजैक्ट किया जाता है। इस तरह डायलिसिस फ्लूइड पेरिटोनियल मैम्ब्ा्रेन से फालतू पानी और अवांछित पदार्थों को निकाल लेता है।[1]
अनुक्रम |
[संपादित करें] लाभ[2]
- रोगी खुद डायलिसिस कर सकता है
- डायलिसिस घर पर ही हो सकती है।
- सुई लगाने की आवश्यकता नहीं होती।
- दिल की तकलीफ, डायबिटीज, बच्चों में या जो होमोडायलिसिस सहन नहीं कर पाते, इन मरीजों में विशेष लाभप्रद।
- गांव, शहर कहीं पर जाकर काम करने व रहने की छूट।
- व्यावहारिक रूप से कम परहेज
[संपादित करें] हानि
- एक दिन में तीन से चार बार तक फ्लूड बदलना
- रोग के संक्रमण का कुछ भय।
- बाहरी कैथेटर स्थायी।
- घर पर ही साधन सामग्री का भंडारण
[संपादित करें] चयन
अगर मरीज का काम घूमने-फिरने का है तो सीएपीडी बेहतर रहता है। होमोडायलिसिस या सीएपीडी में किसी परिवार के सदस्य की ओर से देखभाल हो तो अच्छा रहता है। अगर डायलिसिस मशीन व केंद्र काफी दूर है तो गुर्दा प्रत्यारोपण या सीएपीडी बेहतर विकल्प है। डॉक्टर मरीज की बीमारियां जैसे डायबिटीज, हार्ट डिसीज, उम्र आदि देखकर सीएपीडी कराने की सलाह देते हैं। अगर मरीज सीएपीडी या हफ्ते में दो से तीन बार होमोडायलिसिस पर है तो नजदीकी सहयोगी का मरीज के साथ अटेचमेंट होना चाहिए।
[संपादित करें] संदर्भ
[संपादित करें] बाहरी सूत्र
- डायलिसिस पर लेख