पुरुषोत्तम नागेश ओक

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पुरुषोत्तम नागेश ओक, (2 मार्च,1917-7 दिसंबर,2007), जिन्हें लघुनाम श्री०पी.एन.ओक ने नाम से जाना जाता है, एक प्रसिद्ध भारतीय इतिहास लेखक थे।

अनुक्रम

[संपादित करें] जीवनी

उन्हीं की एक पुस्तक में दिये उनके परिचय के अनुसार, श्री ओक का जन्म इंदौर, मध्य प्रदेश में हुआ था। द्वितीय विश्व युद्ध के सम्य उन्होंने इंडियन नेशनल आर्मी में प्रविष्टि ली, जिसके द्वारा इन्होंने जापानियों के संग अंग्रेज़ों से लड़ाई की थी। इन्होंने कला में स्नातकोत्तर (एम.ए.) एवं विधि स्नातक (एल.एल.बी.) की डिग्री मुंबई विश्वविद्यालय से ली थीं। सन 1947 से 1953 तक ये हिंदुस्तान टाइम्स एवं द स्टेट्स्मैन समाचार पत्रों के रिपोर्टर रहे। १९५३-१९५७ तक इन्होंने भारतीय केन्द्रीय रेडियो एवं जन मंत्रालय में कार्य किया। 1959 से 1957 तक इन्होंने भारत में अमरीकी दूतावास में कार्य किया। [1]

[संपादित करें] रिवीज़निस्ट सिद्धांत

जिसे वे "भारतीय इतिहास का हमलावरों एवं उपनिवेशकों द्वारा पक्षपाती एवं तोड़ा मरोड़ा गया वृत्तांत" मानते थे, उसे सही करने में उन्मत्त, ओक ने कई पुस्तकें और भारतीय इतिहास से संबंधित लेख लिखे हैं। इसके साथ ही इन्होंने भारतीय इतिहास पुनरावलोकन संस्थान की 14 जून,1964 को स्थापना की थी। श्री ओक के अनुसार, आधुनिक और मार्क्स्वादी इतिहासविदों ने भारतीय इतिहास के "आदर्शीकृत वृत्तांत" को कल्पित करके उसमें से सारे वैदिक सन्दर्भ और सामग्री हटा दिये हैं। श्री ओक के योगदान, हिन्दू धर्म की अन्य धर्मों पर वर्चस्व एवं अपार श्रेष्ठता सिद्ध करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हैं।

जहां ओक के सिद्धांतों का कई हिन्दू वादी गुटों ने भरपूर प्रसार एवं समर्थन किया है, ,[2][3], वहीं, किसी भी मुख्यधारा के धार्मिक एवं स्थापत्य इतिहासविदों द्वारा स्वीकार नहीं किया गया है। एड्विन ब्राइट के अनुसार, अधिकांश पाठक उन्हें केवल एक अफवाह ही मानते हैं।[4]

[संपादित करें] ताजमहल एवं अन्य मध्यकालीन इस्लामिक स्मारक

उनकी पुस्तक "ताजमहल: सत्य कथा" में, ओक ने यह दावा किया है, कि ताजमहल, मूलतः एक शिव मंदिर था, या एक राजपूताना महल था, जिसे कि शाहजहाँ ने कब्ज़ा करके एक मकबरे में बदल दिया है।

श्री ओक कहते हैं, कि कैसे सभी (अधिकांश) हिन्दू मूल की कश्मीर से कन्याकुमारी पर्यन्त इमारतों को किसी ना किसी मुस्लिम शासक या उसके दरबारियों के साथ, फेर-बदल करके या बिना, जोड़ दिया गया है।[5] उन्होंने हुमायुं का मकबरा, अकबर का मकबरा एवं एतमादुद्दौला के मकबरे, तथा अधिकांश भारतीय हिन्दू ऐतिहासिक इमारतों , यहां तक की काबा, स्टोनहेन्जवैटिकन शहर[6] तक में हिन्दू मूल बताये हैं। ओक का भारत में मुस्लिम स्थापत्य को नकारना, मराठी जग-प्रसिद्ध संस्कृति का अत्यंत मुस्लिम विरोधी अंगों में से एक बताया गया है।[7] के.एन.पाणिकर ने ओक के भारतीय राष्ट्रवाद में कार्य को भारतीय इतिहास की साम्प्रदायिक समझ बताया है।[8] तपन रायचौधरी के अनुसार, उन्हें संघ परिवार द्वारा आदरणीय इतिहासविद बताया गया है। [9]

श्री ओक ने दावा किया है, कि ताज से हिन्दू अलंकरण एवं चिह्न हटा दिये गये हैं, और जिन कक्षों में उन वस्तुओं एवं मूल मंदिर के शिव लिंग को छुपाया गया है, उन्हें सील कर दिया गया है। साथ ही यह भी कि मुमताज महल को उसकी कब्र में दफनाया ही नहीं गया है।

इन दावों के समर्थन में, श्री ओक ने ताज की यमुना नदी की ओर के दरवाजों की काष्ठ की कार्बन डेटिंग के परिणाम दिये हैं, यूरोपियाई यात्रियों के विवरणों में ताज के हिन्दू स्थापत्य/वास्तु लक्षण भी उद्धृत हैं। उन्होंने यहां तक कहा है, कि ताज के निर्माण के आंखों देखे निर्माण विवरण, वित्तीय आंकड़े, एवं शाहजहां के निर्माण आदेश, आदि सभी केवल एक जाल मात्र हैं, जिनका उद्देश्य इसका हिन्दू उद्गम मिटाना मात्र है।

पी.एस. भट एवं ए.एल. अठाले ने "इतिहास पत्रिका ", एक भारतीय इतिहास पुनरावलोकन संस्थान के प्रकाशन में लिखा है, कि श्री ओक के लेख और सामग्री इस विषय पर, कई संबंधित प्रश्न उठाते हैं।[10]

[संपादित करें] ताजमहल के हिन्दू शिवमंदिर होने के पक्ष में श्री ओक के तर्क

पी.एन. ओक अपनी पुस्तक "ताजमहल इस अ हिन्दू टेम्पल" में १०० से भी अधिक कथित प्रमाण एवं तर्क देकर दावा करते हैं कि ताजमहल वास्तव में शिव मंदिर था जिसका असली नाम 'तेजो महालय' हुआ करता था। ओक साहब यह भी मानते हैं कि इस मंदिर को जयपुर के राजा मानसिंह (प्रथम) ने बनवाया था जिसे तोड़ कर ताजमहल बनवाया गया।


  • किसी भी मुस्लिम इमारत के नाम के साथ कभी महल शब्‍द प्रयोग नहीं हुआ है।
  • 'ताज' और 'महल' दोनों ही संस्कृत मूल के शब्द हैं।
  • संगमरमर की सीढ़ियाँ चढ़ने के पहले जूते उतारने की परंपरा रही है जैसी मंदिरों में प्रवेश पर होती है जब कि सामान्यतः किसी मक़बरे में जाने के लिये जूता उतारना अनिवार्य नहीं होता।
  • संगमरमर की जाली में 108 कलश चित्रित हैं उसके ऊपर 108 कलश आरूढ़ हैं, हिंदू मंदिर परंपरा में (भी) 108 की संख्या को पवित्र माना जाता है।
  • ताजमहल शिव मंदिर को इंगित करने वाले शब्द 'तेजोमहालय' शब्द का अपभ्रंश है। तेजोमहालय मंदिर में अग्रेश्वर महादेव प्रतिष्ठित थे।
  • ताज के दक्षिण में एक पुरानी पशुशाला है। वहाँ तेजोमहालय के पालतू गायों को बांधा जाता था। मुस्लिम कब्र में गौशाला होना एक असंगत बात है।
  • ताज के पश्चिमी छोर में लाल पत्थरों के अनेक उपभवन हैं जो कब्र की तामीर के सन्दर्भ में अनावश्यक हैं.
  • संपूर्ण ताज परिसर में 400 से 500 कमरे(?)( दीवारें ?) हैं। कब्र जैसे स्थान में इतने सारे रहाइशी कमरों का होना समझ के बाहर की बात है।

[संपादित करें] वैधानिक प्रतिक्रिया

श्री ओक ने याचिका दायर की, जिसमें उन्होंने ताज को एक हिन्दू स्मारक घोषित करने एवं कब्रों तथा सील्ड कक्षों को खोलने, व देखने कि उनमें शिव लिंग, या अन्य मंदिर अवशेष हैं, या नहीं; की अपील की।[5] उनके अनुसार भारतीय सरकार के इस कृत्य की अनुमति ना देने का अर्थ सीधे-सीधे हिन्दू धर्म के विरुद्ध षड्यंत्र है।

सन 2000 में भारतीय सर्वोच्च न्यायालय ने श्री ओक की; ताज को एक हिन्दू राजा ने निर्माण कराया था; को रद्द कर दिया, और साथ ही इन्हें झिड़की भि दी, कि उनके दिमाग में ताज के लिये कोई कीड़ा है।

सन 2005 में ऐसी ही एक याचिका इलाहाबाद उच्च न्यायालय द्वारा भी रद्द कर दी गयी, जिसमें अमरनाथ मिश्र, एक सामाजिक कार्यकर्ता द्वारा यह दावा किया गया था, कि ताज को हिन्दू राजा परमार देव ने 1196]] में निर्माण कराया था।

[संपादित करें] इस्लाम एवं ईसाइयत के हिन्दू मूल

उनकी स्वीकृत इतिहास से उलट, श्री ओक ने दावा किया है, कि इस्लाम एवं ईसाई धर्म, दोनों ही वैदिक धर्म के तोड़-मरोड़े गये रूप हैं। इनके समर्थन में उन्होंने एक शब्दावली भी बतायी है (उदा० शब्द इस्लाम का संस्कृत मूल शब्द है ईशालयम=ईश+आलय = भगवान का घर, जो कि इस्लाम में वर्णित अर्थ से भिन्न है) और हिन्दू एवं इस्लाम या ईसाई धर्म में कई समानताएं इस दृष्टिकोण के समर्थन में बतायीं हैं।

उन्होंने दावा किया है, कि मक्का में काबा मूलतः एक [[{शिव]] मंदिर था।[11] और प्पोप का पद एक वैदिक पद था, जब तक कि, वहां कॉन्स्टैन्टाइन ने उनकी हत्या करके एक महत्वहीन ईसाई पोप को नहीं बैठा दिया।[12]

दक्षिण अफ्रीकन यंग मैन मुस्लिम एसोसिएशन ने मुजलीसुल उलेमा द्वारा लिखित एक लेख प्रकाशित किया, जो ऒक के दावे को खण्डित करता था।[13]

[संपादित करें] रचित पुस्तकें

  • "क्रिश्चेनिटी, "कृष्ण नीति" है"
  • Islamic Havoc in India (A. Ghosh Publisher, 5740 W. Little York, Houston, Texas, 77091)
  • ताजमहल तेजोमहल शिव मंदिर है
  • कौन कहता है कि अकबर महान था? (Hindi Sahitya Sadan, New Delhi)
  • Agra Red Fort is a Hindu Building (Hindi Sahitya Sadan, New Delhi)
  • Some Blunders of Indian Historical Research (Hindi Sahitya Sadan, New Delhi)
  • Some Missing Chapters of World History (Hindi Sahitya Sadan, New Delhi)
  • वैदिक विश्व राष्ट्र का इतिहास (4 भाग) (Hindi Sahitya Sadan, New Delhi)
  • Taj Mahal — The True Story (ISBN 0-9611614-4-2)
  • भारत का द्वितीय स्वातंत्र्य समर
  • अमर सेनानी सावरकर जीवन झाँकी
  • महामना सावरकर भाग 1
  • लोकोत्तरदृष्टा सावरकर भाग 2

[संपादित करें] सन्दर्भ

  1. ओक के जीवन का स्वयं दिया ब्यौरा
  2. Narasimhan Ram, editor of The Hindu newspaper, calls him a "Sangh historian" HRD Ministry - its master's voice, The Hindu, April 29, 2001.
  3. Akbar S. Ahmed। “The Taj Mahal”, History Today, vol. 43, May 1993।
  4. The Quest for the Origins of Vedic Culture: The Indo-Aryan Migration Debate, Edwin Bryant, 2003
  5. 5.0 5.1 The Tajmahal is Tejomahalay—A Hindu Temple
  6. Cities And Regions Since
  7. Carl W. Ernst, Annemarie Schimmel (1992). Eternal Garden: Mysticism, History, and Politics at a South Asian Sufi Center. State University of New York Press. pp. 36. 
  8. OUTSIDER AS ENEMY: POLITICS OF REWRTING HISTORY IN INDIA, address to the Stanford India Association. Text available on the Internet Archives
  9. Raychaudhuri, T. (2000). "Shadows of the Swastika: Historical Perspectives on the Politics of Hindu Communalism". Modern Asian Studies 34 (02): 259-279. doi:10.1017/S0026749X00003310. 
  10. "The question of The Taj" in "Itihas Patrika, Vol. 5 1985"
  11. Was the Kaaba Originally a Hindu Temple? by P.N. Oak
  12. Oak, P.N., “Cities And Regions Since”, Vaishnava News Network, 1999-06-04
  13. Mujlisul Ulema (Port Elizabeth), P.N. Oak's blasphemy against the Ka`bah, Young Men's Muslim Association, South Africa, archived text

[संपादित करें] बाहरी कड़ियां

[संपादित करें] इन्हें भी देखें

वैयक्तिक औज़ार
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