पुरुषोत्तम नागेश ओक

मुक्त ज्ञानकोश विकिपीडिया से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

पुरुषोत्तम नागेश ओक, (जन्म: 2 मार्च, 1917-मृत्यु: 7 दिसंबर, 2007), जिन्हें पी०एन० ओक के नाम से भी जाना जाता है, एक प्रसिद्ध भारतीय इतिहास लेखक थे।

जीवनी[संपादित करें]

उन्हीं की एक पुस्तक में दिये उनके परिचय के अनुसार, श्री ओक का जन्म इंदौर, मध्य प्रदेश में हुआ था। द्वितीय विश्व युद्ध के समय उन्होंने इंडियन नेशनल आर्मी में प्रविष्टि ली, जिसके द्वारा इन्होंने जापानियों के संग अंग्रेज़ों से लड़ाई की थी। इन्होंने कला में स्नातकोत्तर (एम०ए०) एवं विधि स्नातक (एलएल०बी०) की डिग्रियाँ मुंबई विश्वविद्यालय से ली थीं। सन 1947 से 1953 तक वे हिंदुस्तान टाइम्स एवं द स्टेट्समैन जैसे समाचार पत्रों के रिपोर्टर रहे। 1953 से 1957 तक इन्होंने भारतीय केन्द्रीय रेडियो एवं जन मंत्रालय में कार्य किया। 1957 से 1959 तक उन्होंने भारत के अमरीकी दूतावास में कार्य किया।[1]

संशोधनवादी सिद्धांत[संपादित करें]

जिसे वे "भारतीय इतिहास का हमलावरों एवं उपनिवेशकों द्वारा पक्षपाती एवं तोड़ा मरोड़ा गया वृत्तांत" मानते थे, उसे सही करने में उन्मत्त, ओक ने कई पुस्तकें और भारतीय इतिहास से सम्बन्धित लेख लिखे हैं। इसके साथ ही उन्होंने भारतीय इतिहास पुनरावलोकन संस्थान की स्थापना 14 जून, 1964 को की। ओक के अनुसार, आधुनिक और मार्क्सवादी इतिहासकारों ने भारतीय इतिहास के "आदर्शीकृत वृत्तांत" को कल्पित करके उसमें से सारे वैदिक सन्दर्भ और सामग्री हटा दिये हैं। ओक के योगदान, हिन्दू धर्म की अन्य धर्मों पर वर्चस्व एवं अपार श्रेष्ठता सिद्ध करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हैं।

जहाँ ओक के सिद्धान्तों का कई हिन्दू वादी गुटों ने भरपूर प्रसार एवं समर्थन किया है[2][3], वहीं, किसी भी मुख्यधारा के धार्मिक एवं स्थापत्य इतिहासविदों द्वारा स्वीकार नहीं किया गया है। एडविन ब्राइट के अनुसार, अधिकांश पाठक उन्हें केवल एक अफवाह ही मानते हैं।[4]

ताजमहल एवं अन्य मध्यकालीन इस्लामिक स्मारक[संपादित करें]

अपनी पुस्तक ताजमहल: सत्य कथा में, ओक ने यह दावा किया है, कि ताजमहल, मूलतः एक शिव मन्दिर या एक राजपूताना महल था, जिसे शाहजहाँ ने कब्ज़ा करके एक मकबरे में बदल दिया।

ओक कहते हैं, कि कैसे सभी (अधिकांश) हिन्दू मूल की कश्मीर से कन्याकुमारी पर्यन्त इमारतों को किसी ना किसी मुस्लिम शासक या उसके दरबारियों के साथ, फेर-बदल करके या बिना फेरबदल के, जोड़ दिया गया है।[5] उन्होंने हुमायुं का मकबरा, अकबर का मकबरा एवं एतमादुद्दौला के मकबरे, तथा अधिकांश भारतीय हिन्दू ऐतिहासिक इमारतों, यहाँ तक कि काबा, स्टोनहेन्ज व वैटिकन शहर[6] तक हिन्दू मूल के बताये हैं। ओक का भारत में मुस्लिम स्थापत्य को नकारना, मराठी जग-प्रसिद्ध संस्कृति का अत्यन्त मुस्लिम विरोधी अंगों में से एक बताया गया है।[7] के०एन०पणिक्कर ने ओक के भारतीय राष्ट्रवाद में कार्य को भारतीय इतिहास की साम्प्रदायिक समझ बताया है।[8] तपन रायचौधरी के अनुसार, उन्हें संघ परिवार द्वारा आदरणीय इतिहासविद कहा गया है।[9]

ओक ने दावा किया है, कि ताज से हिन्दू अलंकरण एवं चिह्न हटा दिये गये हैं और जिन कक्षों में उन वस्तुओं एवं मूल मन्दिर के शिव लिंग को छुपाया गया है, उन्हें सील कर दिया गया है। साथ ही यह भी कि मुमताज महल को उसकी कब्र में दफनाया ही नहीं गया था।

इन दावों के समर्थन में, ओक ने ताज की यमुना नदी की ओर के दरवाजों की काष्ठ की कार्बन डेटिंग के परिणाम दिये हैं, यूरोपियाई यात्रियों के विवरणों में ताज के हिन्दू स्थापत्य/वास्तु लक्षण भी उद्धृत हैं। उन्होंने यहाँ तक कहा है, कि ताज के निर्माण के आँखों देखे निर्माण विवरण, वित्तीय आँकड़े, एवं शाहजहाँ के निर्माण आदेश, आदि सभी केवल एक जाल मात्र हैं, जिनका उद्देश्य इसका हिन्दू उद्गम मिटाना मात्र है।

पी०एस० भट्ट एवं ए०एल० अठावले ने "इतिहास पत्रिका " (एक भारतीय इतिहास पुनरावलोकन संस्थान के प्रकाशन) में लिखा है, कि ओक के लेख और सामग्री इस विषय पर, कई सम्बन्धित प्रश्न उठाते हैं।[10]

ताजमहल के हिन्दू शिवमन्दिर होने के पक्ष में ओक के तर्क[संपादित करें]

पी०एन० ओक अपनी पुस्तक "ताजमहल ए हिन्दू टेम्पल" में सौ से भी अधिक कथित प्रमाण एवं तर्क देकर दावा करते हैं कि ताजमहल वास्तव में शिव मन्दिर था जिसका असली नाम 'तेजोमहालय' हुआ करता था। ओक साहब यह भी मानते हैं कि इस मन्दिर को जयपुर के राजा मानसिंह (प्रथम) ने बनवाया था जिसे तोड़ कर ताजमहल बनवाया गया। इस सम्बन्ध में उनके निम्न तर्क विचारणीय हैं:

  • किसी भी मुस्लिम इमारत के नाम के साथ कभी महल शब्‍द प्रयोग नहीं हुआ है।
  • 'ताज' और 'महल' दोनों ही संस्कृत मूल के शब्द हैं।
  • संगमरमर की सीढ़ियाँ चढ़ने के पहले जूते उतारने की परम्परा चली आ रही है जैसी मन्दिरों में प्रवेश पर होती है जब कि सामान्यतः किसी मक़बरे में जाने के लिये जूता उतारना अनिवार्य नहीं होता।
  • संगमरमर की जाली में 108 कलश चित्रित हैं तथा उसके ऊपर 108 कलश आरूढ़ हैं, हिंदू मन्दिर परम्परा में (भी) 108 की संख्या को पवित्र माना जाता है।
  • ताजमहल शिव मन्दिर को इंगित करने वाले शब्द 'तेजोमहालय' शब्द का अपभ्रंश है। तेजोमहालय मन्दिर में अग्रेश्वर महादेव प्रतिष्ठित थे।
  • ताज के दक्षिण में एक पुरानी पशुशाला है। वहाँ तेजोमहालय के पालतू गायों को बाँधा जाता था। मुस्लिम कब्र में गौशाला होना एक असंगत बात है।
  • ताज के पश्चिमी छोर में लाल पत्थरों के अनेक उपभवन हैं जो कब्र की तामीर के सन्दर्भ में अनावश्यक हैं।
  • संपूर्ण ताज परिसर में 400 से 500 कमरे तथा दीवारें हैं। कब्र जैसे स्थान में इतने सारे रिहाइशी कमरों का होना समझ से बाहर की बात है।

वैधानिक प्रतिक्रिया[संपादित करें]

ओक ने याचिका दायर की, जिसमें उन्होंने ताज को एक हिन्दू स्मारक घोषित करने एवं कब्रों तथा सील्ड कक्षों को खोलने, व यह देखने कि उनमें शिव लिंग, या अन्य मन्दिर के अवशेष हैं, या नहीं; की अपील की।[5] उनके अनुसार भारतीय सरकार के इस कृत्य की अनुमति न देने का अर्थ सीधे-सीधे हिन्दू धर्म के विरुद्ध षड्यन्त्र है।

सन 2000 में भारतीय सर्वोच्च न्यायालय ने ओक की इस याचिका को कि ताज को एक हिन्दू राजा ने निर्माण कराया था रद्द कर दिया और साथ ही इन्हें झिड़की भी दी, कि उनके दिमाग में ताज के लिये कोई कीड़ा है।

सन 2005 में ऐसी ही एक याचिका इलाहाबाद उच्च न्यायालय द्वारा भी रद्द कर दी गयी, जिसमें अमरनाथ मिश्र, एक सामाजिक कार्यकर्ता द्वारा यह दावा किया गया था, कि ताज को हिन्दू राजा परमार देव ने 1196 में निर्माण कराया था।

इस्लाम एवं ईसाइयत के हिन्दू मूल[संपादित करें]

उनकी स्वीकृत इतिहास से उलट, श्री ओक ने दावा किया है, कि इस्लाम एवं ईसाई धर्म, दोनों ही वैदिक धर्म के तोड़-मरोड़े गये रूप हैं। इनके समर्थन में उन्होंने एक शब्दावली भी बतायी है। उदाहरणार्थ शब्द इस्लाम का संस्कृत मूल शब्द है ईशालयम = ईश+आलय = भगवान का घर, जो कि इस्लाम में वर्णित अर्थ से भिन्न है) और हिन्दू एवं इस्लाम या ईसाई धर्म में कई समानताएँ इस दृष्टिकोण के समर्थन में बतायीं हैं।

उन्होंने दावा किया है, कि मक्का में काबा मूलतः एक शिव मन्दिर था।[11] और पोप का पद एक वैदिक पद था, जब तक कि वहाँ कॉन्स्टैन्टाइन ने उनकी हत्या करके एक महत्वहीन ईसाई पोप को नहीं बैठा दिया।[12]

दक्षिण अफ्रीकन यंग मैन मुस्लिम एसोसिएशन ने मुजलीसुल उलेमा द्वारा लिखित एक लेख प्रकाशित किया, जो ओक के दावे को खण्डित करता था।[13]

रचित पुस्तकें[संपादित करें]

हिन्दी रचनाएँ[संपादित करें]

  • अमर सेनानी सावरकर जीवन झाँकी (हिंदी साहित्य सदन नवी दिल्ली)
  • कौन कहता है कि अकबर महान था? (हिंदी साहित्य सदन नवी दिल्ली)
  • क्रिश्चानिटी कृष्ण-नीति है (हिंदी साहित्य सदन नवी दिल्ली)
  • ताजमहल मंदिर भवन है (हिंदी साहित्य सदन नवी दिल्ली)
  • ताजमहल तेजोमहल शिव मंदिर है (हिंदी साहित्य सदन नवी दिल्ली)
  • भारत का द्वितीय स्वातंत्र्य समर (हिंदी साहित्य सदन नवी दिल्ली)
  • महामना सावरकर भाग १ (हिंदी साहित्य सदन नवी दिल्ली)
  • लोकोत्तरद्रष्टा सावरकर भाग २ (हिंदी साहित्य सदन नवी दिल्ली)
  • वैदिक विश्व राष्ट्र का इतिहास (१ ते ४ भाग) (हिंदी साहित्य सदन नवी दिल्ली)

मराठी रचनाएँ[संपादित करें]

  • आरोग्य, सौंदर्य व दीर्घायुष्य
  • इस्लामी परचक्राची सुरुवात
  • जागतिक इतिहास संशोधनातील माझे अनुभव
  • जागतिक इतिहासातील खिंडारे
  • ताजमहाल नव्हे तेजोमहालय (शिवमंदिर)
  • ताजमहाल हे तेजोमहाल आहे
  • नेतांजीचे सहवासात
  • फलज्योतिष शास्त्राची तोंडओळख
  • भारतीय इतिहास संशोधनातील घोडचुका
  • मोगलाईचा उदयास्त
  • सर्व राशींच्या व्यक्तींचे भाग्ययोग अन्‌ संपत्तीयोग
  • हिंदु्स्थानच्या इतिहासातील कृष्णपक्ष
  • हिंदुस्थानचे दुसरे स्वातंत्र्ययुद्ध
  • हिंदू विश्व राष्ट्राचा इतिहास

अंग्रेजी रचनाएँ[संपादित करें]

  • Some Missing Chapters of World History – Publisher: Hindi Sahitya Sadan (2010) Language: English
  • World Vedic Heritage: A History of Histories – Publisher: New Delhi: Hindi Sahitya Sadan (2003)
  • Vaidik Vishva Rashtra Ka Itihas – Publisher: New Delhi: Hindi Sahitya Sadan
  • Bharat Mein Muslim Sultan
  • Who Says Akbar was Great
  • Some Blunders Of Indian Historical Research
  • Agra red Fort is a Hindu Building
  • Learning Vedic Astrology

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. ओक के जीवन का स्वयं दिया ब्यौरा
  2. Narasimhan Ram, editor of The Hindu newspaper, calls him a "Sangh historian" HRD Ministry - its master's voice, The Hindu, April 29, 2001.
  3. Akbar S. Ahmed (May 1993). "The Taj Mahal". History Today, vol. 43. "The Taj has recently entered a controversy which reflects the politics of modern India. Hindu fundamentalists, wishing to deny any positive role of Muslims in India, argue that it was not built by Shah Jahan. They claim Hindu rulers in the fourth century built it. Books with titles such as Taj Mahal Was a Rajput Palace (P.N. Oak, 1965) further argue this position. There is no merit in the argument, but it has acquired something of a popular following in India." 
  4. The Quest for the Origins of Vedic Culture: The Indo-Aryan Migration Debate, Edwin Bryant, 2003
  5. The Tajmahal is Tejomahalay—A Hindu Temple
  6. Cities And Regions Since
  7. Carl W. Ernst, Annemarie Schimmel (1992). Eternal Garden: Mysticism, History, and Politics at a South Asian Sufi Center. State University of New York Press. pp. 36. 
  8. OUTSIDER AS ENEMY: POLITICS OF REWRTING HISTORY IN INDIA, address to the Stanford India Association. Text available on the Internet Archives
  9. Raychaudhuri, T. (2000). "Shadows of the Swastika: Historical Perspectives on the Politics of Hindu Communalism". Modern Asian Studies 34 (02): 259-279. doi:10.1017/S0026749X00003310. 
  10. "The question of The Taj" in "Itihas Patrika, Vol. 5 1985"
  11. Was the Kaaba Originally a Hindu Temple? by P.N. Oak
  12. ओक, P.N. (1999-06-04). "Cities And Regions Since". Vaishnava News Network. http://www.vnn.org/editorials/ET9906/ET04-4033.html. 
  13. Mujlisul Ulema (Port Elizabeth), P.N. Oak's blasphemy against the Ka`bah, Young Men's Muslim Association, South Africa, archived text

बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]

इन्हें भी देखें[संपादित करें]