पितृवंश समूह डी

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बहुत से भारतीय अंडमानी आदिवासी पुरुष पितृवंश समूह डी के वंशज हैं, जो जापानी और तिब्बती पुरुषों में भी आम है

मनुष्यों की आनुवंशिकी (यानि जॅनॅटिक्स) में पितृवंश समूह डी या वाए-डी॰एन॰ए॰ हैपलोग्रुप D पितृवंश समूह है। इस पितृवंश समूह के सदस्य पुरुष ज़्यादातर तिब्बत, जापान और अंडमान द्वीपों में पाए जाते हैं। अनुमान है के जिस पुरुष से यह पितृवंश शुरू हुआ वह आज से ५०,००० या ६०,००० वर्ष पहले एशिया के महाद्वीप में कहीं रहता था, लेकिन इस से आगे उसके निवास स्थान का ठीक से अनुमान नहीं लग पाया है।[1][2] यह पितृवंश समूह बहुत प्राचीन माना जाता है और अंदाज़ा है इसकी उत्पत्ति मनुष्यों के अफ़्रीका छोड़ने के जल्द बाद ही हो गयी थी। एशिया के बाहर यह पितृवंश समूह किसी पुरुष में कहीं नहीं पाया गया है।[2] यह पुरुष स्वयं पितृवंश समूह डीई (DE) का वंशज था और पितृवंश समूह डी को पितृवंश समूह डीई की एक शाखा माना जाता है।

अन्य भाषाओँ में[संपादित करें]

अंग्रेज़ी में "वंश समूह" को "हैपलोग्रुप" (haplogroup), "पितृवंश समूह" को "वाए क्रोमोज़ोम हैपलोग्रुप" (Y-chromosome haplogroup) और "मातृवंश समूह" को "एम॰टी॰डी॰एन॰ए॰ हैपलोग्रुप" (mtDNA haplogroup) कहते हैं।

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

सन्दर्भ[संपादित करें]