पापारात्सी

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बीसवीं शताब्दी के उत्तरार्द्ध में अख़बारी फ़ोटोग्राफ़रों का एक बिल्कुल नया पेशा सामने आया. यह लोग राजनीति, खेल, फ़िल्म या किसी भी विभाग के प्रसिद्ध व्यक्ति का पीछा करते हैं और उनके दैनिक जीवन के ऐसे तथ्यों को अपने कैमरे में सुरक्षित कर लेते हैं जो देखने वालों के लिए अत्याधिक रोचक और सनसनी से भरी हो.

(Paparazzi) पापारात्सी फ़ोटोग्राफ़र शो बिज़नेस की दुनिया में विशेष रूप से बदनाम हैं क्योंकि उन के जासूस कैमरों की आंखें कला जगत के विख्यात सितारों का पीछा करती रहती हैं और उन प्रसिद्ध कलाकारों के लिए तनहाई में एक छण भी बिताना मुशकिल हो जाता है.

पापारात्सी (Paparazzi) इतालवी भाषा का शब्द है और इसका उच्चारण पापारात्सी है ना कि पापाराज़ी.

इतालवी भाषा में जब दो बार ज़ेड (z) आता है तो वह त+स की आवाज़ देता है. उदाहरणस्वरूप पीज़्ज़ा (Pizza) पीत्सा है ना कि पिज़्ज़ा

यहां बात हो रही थी पापारात्सी फ़ोटोग्राफ़रों की, इन लोगों के बारे में पहली बार 50 के दशक में सुना गया था जब रोम के कुछ युवा फ़ोटोग्राफ़रों ने मिस्र के शाह फ़ारूक़ के कुछ निजी चित्र प्रकाशित करा दिए.

लेकिन उस समय तक पापारात्सी शब्द चर्चित नहीं हुआ था बल्कि ऐसे लोगों की चर्चा स्ट्रीट फ़ोटोग्राफ़र (Street Photographer) जैसे अपमानजनक नाम से की जाती थी.

इन लोगों के पेशे को लेकर उस समय काफ़ी आलोचना शुरू हो गई जब राजकुमारी डायना की एक दुर्घटना में मौत हुई. इस कार दुर्घटना के बारे में एक विचार यह था कि सब पापारात्सी फ़ोटोग्राफ़रों का किया धरा है जो कि राजकुमारी डायना और उनके प्रेमी की फ़ोटो लेने के लिए शिकारी कुत्तों की तरह उन का पीछा किया करते थे.

इतालवी शब्द

इस समय इस पेशे की बरीकी देखना हमारा उद्देश्य नहीं है बलकि शब्द पापारात्सी (Paparazzi ) की व्याख्या करना है.

मूलरूप से यह एक इतालवी नाम है और सिर्फ एक फ़िल्म के कारण यह प्रसिद्ध हो गया.

क़िस्सा यूँ है कि 1960 में प्रसिद्ध इतालवी निर्देशक कार फ़ेडरिको फ़्लेनी ने उस नौजवान फ़ोटोग्राफ़र के जीवन पर फ़िल्म बनाने का इरादा किया जिस ने सब से पहले एक रेस्त्रां में शाह फ़ारूक़ की एक ऐसी फ़ोटो ली थी जिस में वह ग़ुस्से में आपे से बाहर दिखाई दे रहे थे और क्रोध की अवस्था में एक मेज़ उलटा रहे थे.

फिल्म में इस पात्र का नाम कोरिओलानो पापारात्सो (Coriolano Paparazzo) है.


पापारात्सी फ़ोटोग्राफ़रों के बारे में पहली बार 50 के दशक में सुना गया था जब रोम के कुछ युवा फ़ोटोग्राफ़रों ने मिस्र के शाह फ़ारूक़ के कुछ निजी चित्र प्रकाशित करा दिए.

फ़ेडरिको फ़्लेनी की वह फ़िल्म अब क्लासिक फ़िल्मों की श्रेणी में आती है हालांकि आज का दर्शक उसे बहुत ही सुस्त अथवा धीमी फ़िल्म कहेगा लेकिन ला डोल्से वीटा (La Dolce Vita) नामक इस फ़िल्म ने भाषा पर इतना एहसान ज़रूर किया कि उस के शब्द कोष में एक नए शब्द की वृद्धि कर दी. यानी पापारात्सी (Paparazzi).

निर्देशक फ़ेडरिको फ़्लेनी से एक बार पूछा गया कि उन्हें अपने पात्र के लिए यह नाम सूझा कैसे तो उन्होंने बताया कि एक अंग्रेज़ पर्यटक के पुराने सफ़रनामे में एक सराय की चर्चा है जिस के मालिक का नाम पापारात्सो (Paparazzo) था बस वही नाम मेरे दिमाग़ से चिपका हुआ था और फ़िल्म में फ़ोटोग्राफ़र के पात्र के लिए अभिनेता मारसीलो मास्त्रियानी का चयन किया गया तो उन्हें भी यह नाम बहुत पसंद आया.

लेकिन उस समय दोनों को इस बात का ज्ञान नहीं था कि उन्होंने अंग्रेज़ी भाषा (और अन्य भाषाओं) को एकदम नया शब्द दिया है.