पश्चिम त्रिपुरा जिला

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त्रिपुरा राज्य के ४ जिले हैं

पश्चिम त्रिपुरा भारतीय राज्य त्रिपुरा का एक जिला है। जिले का मुख्यालय अगरतला है जो राज्य की राजधानी भी है। पश्चिम त्रिपुरा जहां एक ओर मंदिरों के लिए जाना जाता है, वहीं दूसरी ओर यह जगह ऊंचे पर्वत, महल और झील आदि के लिए भी प्रसिद्ध है। ऐतिहासिक दृष्टि से भी यह काफी महत्वपूर्ण है।

परिचय[संपादित करें]

पश्चिम त्रिपुरा बांग्लादेश के उत्तर, उत्तर त्रिपुरा के पूर्व और दक्षिण त्रिपुरा के दक्षिण से घिरी हुई है। यह स्थान कई प्रमुख राजाओं के हाथों से होकर गुजरा है। बीर बिक्रम किशोर माणिक्य यहां के अन्तिम राजा थे। इनकी मृत्यु के पश्चात् उनकी पत्‍नी महाराजी कंचनपुरा देवी के इस जगह का कार्यभार पूरी तरह से संभाला। यहां की प्रमुख नदियों में गोमती और होवाड़ है। इसका क्षेत्रफल है 2997 km² तथा जनसंख्या है 1,530,531 (2001)।

प्रशासन[संपादित करें]

पश्चिमी त्रिपुरा जिले के चार उपमंडल हैं।

प्रमुख आकर्षण[संपादित करें]

अगरतला[संपादित करें]

अगरतला में प्रमुख आकर्षण केन्द्र उज्जयंता पैलेस, राज्य संग्रहालय, जनजातीय संग्रहालय, सुकान्ता एकेडमी, एम.बी.बी. कॉलेज, लक्ष्मीनारायाण मंदिर, उमा महेश्‍वर मंदिर, जगन्नाथ मंदिर, बेनुबन बिहार, गेडु मीन मस्जिद, मलांच निवास, रविन्द्र कनान, पुरबाशा, हस्तशिप केन्द्र, चौदहवां देवी मंदिर, चर्च आदि है।

उज्जयंत पैलेस[संपादित करें]

चित्र:UP2.jpg
उज्जयंत पैलेस

अगरतला स्थित उज्जयंता पैलेस एक शाही महल है। यह महल एक वर्ग किलोमीटर के दायरे में फैला हुआ है। इस महल का निर्माण महाराजा राधा किशोर मानिक ने सन् 1899-1901 ई. में दौरान करवाया था। महल में खूबसूरत टाइल, लकड़ी का अधिकतर काम और दरवाजों पर खूबसूरत हस्तकला की गई है। इस महल को विशाल मुगल गार्डन की शैली में तैयार किया गया है। उज्जयंता महल की वास्तुकला काफी आकर्षक है। इसके अतिरिक्त महल में तीन ऊंचे गुम्बद है।

मनु बकुल बुद्धा मंदिर

यह मंदिर अगरतला हवाई अड्डे से 125 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। माना जाता है कि इस में स्थित मूर्ति को अराकन से लाया गया था। प्रत्येक वर्ष अप्रैल माह के दौरान एक सप्ताह के मेले का आयोजन किया जाता है। काफी संख्या में लोग देश-विदेश से इस मेले में सम्मिलित होते हैं।

चतुर्दश देवता मंदिर

चतुर्दश देवता मंदिर ओल्ड अगरतला में स्थित है। यह मंदिर अगरतला से लगभग आठ किलोमीटर की दूरी पर है। इस मंदिर का निर्माण महाराजा कृष्ण किशोर माणिक्य ने अठाहरवीं शताब्दी में करवाया था। प्रत्येक वर्ष जून माह में खरची पूजा की जाती है। इस पूजा में काफी संख्या में सभी धर्मो के लोग सम्मिलित होते हैं।

कमलसागर

इस विशाल झील का निर्माण महाराजा धन्य माणिक्य ने 15वीं शताब्दी में करवाया था। यह झील कमलसागर के तट पर स्थित है। झील के समीप ही देवी काली का एक प्रसिद्ध मंदिर है। यह मंदिर लगभग सोलहवीं शताब्दी का है। काफी संख्या में पर्यटक मंदिर में दर्शन और झील का आनन्द लेने के लिए आते हैं। इसके अतिरिक्त, कवि रविन्द्रनाथ टैगोर 1926 में यहां कुछ समय के लिए ठहरें थे।

कुंजबन पैलेस

ऊंचे पर्वत पर स्थित कुंजबन एक खूबसूरत दर्शनीय स्थल है। इस महल का निर्माण महाराजा बिरेन्द्र किशोर माणिक्य ने 1917 ई. में करवाया था। इस खूबसूरत जगह का चयन महाराजा ने सुबुरबन महल की इमारत बनवाने के लिए किया था।

नीरमहल

इस खूबसूरत झील महल का निर्माण महाराजा वीरबिक्रम किशोर माणिक्य ने 1930 ई. में करवाया था। यह महल एक प्राकृतिक झील के मध्य स्थित है जिसे रूद्रसागर के नाम से जाना जाता है। इसका क्षेत्रफल 5.35 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है। शाम के समय इस महल का नजारा अत्यंत अद्भुत होता है।

आवागमन[संपादित करें]

वायु मार्ग

सबसे निकटतम हवाई अड्डा अगरतला है। कलकत्ता द्वारा अगरतला के लिए नियमित रूप से उड़ान भरी जाती है।

रेल मार्ग

सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन धर्मनगर है। यह स्थान अगरतला स्थित जिला मुख्यालय से 200 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।

सड़क मार्ग

पश्चिम त्रिपुरा कलकत्ता, धर्मनगर, गोवाहटी, सिलचर आदि से सड़क मार्ग द्वारा पहुंचा जा सकता है।