पश्चिम गंग वंश (३५०-१००० ई.) (कन्नड़: ಪಶ್ಚಿಮ ಗಂಗ ಸಂಸ್ಥಾನ) प्राचीन कर्नाटक का एक राजवंश था। ये पूर्वी गंग वंश से अलग थे, जिन्होंने बाद के वर्षों में ओडिशा पर राज्य किया। आम धारण के अनुसार पश्चिम गंग वंश ने शसन तब संभाला जब पल्लव वंश के पतन उपरांत बहुत से स्वतंत्र शासक उठ खड़े हुए थे। इसका एक कारण समुद्रगुप्त से युद्ध भी रहे थे। इस वंश ने ३५० ई से ५५० ई तक सार्वभौम राज किया था। इनकी राजधानी पहले कोलार रही ज्जो समय के साथ बदल कर आधुनिक युग के मैसूर जिला में कावेरी नदी के तट पर तालकाड स्थानांतरित हो गयी थी।
| पश्चिम गंग वंश के राजा' (३५०-९९९) |
| कोंगणिवर्मन माधव |
(350–370) |
| माधव |
(370–390) |
| हरिवर्मन |
(390–410) |
| वष्णुगोप |
(410–430) |
| माधव तृ तण्डणगल |
(430–469) |
| अविनीत |
(469–529) |
| Durvinita |
(529–579) |
| Mushkara |
(579–604) |
| Polavira |
(604–629) |
| Srivikrama |
(629–654) |
| Bhuvikarma |
(654–679) |
| Shivamara I |
(679–726) |
| Sripurusha |
(726–788) |
| Shivamara II |
(788–816) |
| Rachamalla I |
(816–843) |
| Ereganga Neetimarga |
(843–870) |
| Rachamalla II |
(870–907) |
| Ereganga Neetimarga II |
(907–921) |
| Narasimha |
(921–933) |
| Rachamalla III |
(933–938) |
| Butuga II |
(938–961) |
| Marulaganga Neetimarga |
(961–963) |
| Marasimha II Satyavakya |
(963–975) |
| Rachamalla IV Satyavakya |
(975–986) |
| Rachamalla V (Rakkasaganga) |
(986–999) |
| Neetimarga Permanadi |
(999) |
Rajaraja Chola I
(Chola) |
(985–1014) |
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साँचा:मध्य भारत के राज्य