परासर भट्टर

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श्री भट्टर जी की मूर्ति।

श्री परासर भट्टर, रामानुज के अनुयायी थे, १२वीं शताब्दी के वैष्णव शिक्षक थे, और उनका जन्म १२वीं शताब्दी के अंत में हुआ था। उन्होनें विष्णु सहस्रनाम पर तमिल भाषा में श्रीवैष्णवी दृष्टिकोण से एक व्याख्यान लिखा, जो आदि शंकर के अद्वैत दृष्टिकोण से भिन्न था। उन्हें स्वयं रामानुज द्वारा अपने उत्तराधिकारी के रूप में श्रीवैष्णवों का प्रधान नियुक्त किया गया।[1]

संदर्भ[संपादित करें]

  1. "श्री परासर भट्टर". वैंकटेश के इलयवल्ली. http://www.srivaishnava.org/sva/bhattar.htm. अभिगमन तिथि: ०४-०४-२००९. 

बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]