पञ्चतन्त्र

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दमनक नामक चतुर शियार सीधे-सादे संजीवक नामक बैल से बात क्र रहा है। (भारतीय चित्रकला, १६१०)

संस्कृत नीतिकथाओं में पंचतंत्र का पहला स्थान माना जाता है। यद्यपि यह पुस्तक अपने मूल रुप में नहीं रह गया है, फिर भी उपलब्ध अनुवादों के आधार पर इसकी रचना तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व [1] के आस- पास निर्धारित की गई है। इस ग्रंथ के रचयिता पं॰ विष्णु शर्मा है। उपलब्ध प्रमाणों के आधार पर कहा जा सकता है कि जब इस ग्रंथ की रचना पूरी हुई, तब उनकी उम्र ८० वर्ष के करीब थी। पंचतंत्र को पाँच तंत्रों (भागों) में बाँटा गया है:

  1. मित्रभेद (मित्रों में मनमुटाव एवं अलगाव)
  2. मित्रलाभ या मित्रसंप्राप्ति (मित्र प्राप्ति एवं उसके लाभ)
  3. काकोलुकीयम् (कौवे एवं उल्लुओं की कथा)
  4. लब्धप्रणाश (मृत्यु या विनाश के आने पर ; यदि जान पर आ बने तो क्या?)
  5. अपरीक्षित कारक (जिसको परखा नहीं गया हो उसे करने से पहले सावधान रहें ; हड़बड़ी में कदम न उठायें)

मनोविज्ञान, व्यवहारिकता तथा राजकाज के सिद्धांतों से परिचित कराती ये कहानियाँ सभी विषयों को बड़े ही रोचक तरीके से सामने रखती है तथा साथ ही साथ एक सीख देने की कोशिश करती है।

पंचतंत्र की कई कहानियों में मनुष्य-पात्रों के अलावा कई बार पशु-पक्षियों को भी कथा का पात्र बनाया गया है तथा उनसे कई शिक्षाप्रद बातें कहलवाने की कोशिश की गई है।

पंचतंत्र के सन् १४२९ के फारसी अनुवाद से एक पृष्ट

पंचतन्त्र की कहानियां बहुत जीवंत हैं । इनमे लोकव्यवहार को बहुत सरल तरीके से समझाया गया है। बहुत से लोग इस पुस्तक को नेतृत्व क्षमता विकसित करने का एक सशक्त माध्यम मानते हैं। इस पुस्तक की महत्ता इसी से प्रतिपादित होती हती है कि इसका अनुवाद विश्व की लगभग हर भाषा में हो चुका है।

नीतिकथाओं में पंचतंत्र का पहला स्थान है। विभिन्न उपलब्ध अनुवादों के आधार पर इसकी रचना तीसरी शताब्दी के आस- पास निर्धारित की जाती है। पंचतंत्र ही हितोपदेश की रचना का आधार है। स्वयं नारायण पण्डित जी ने स्वीकार किया है--

पञ्चतन्त्रात्तथाऽन्यस्माद् ग्रंथादाकृष्य लिख्यते॥
- श्लोक सं.९,प्रस्ताविका, हितोपदेश

[संपादित करें] इन्हें भी देखें

  1. कथासाहित्य (संस्कृत)
  2. हितोपदेश
  3. सिंहासन बत्तीसी
  4. बेताल पच्चीसी
  5. कथासरित्सागर

[संपादित करें] सन्दर्भ

  1. Jacobs 1888, Introduction, page xv; Ryder 1925, अनुवादक अपनी प्रस्तावना में, हर्टेल को उद्धृत करते हुए: "that the original work was composed in Kashmir, about 200 B.C. At this date, however, many of the individual stories were already ancient."

[संपादित करें] बाहरी कडियाँ

[संपादित करें] अन्य कहानियाँ

  1. पंचतंत्र (विकिस्रोत) (हिन्दी में)
  2. पञ्चतन्त्रम् (विकिस्रोत) (संस्कृत में)
  3. हितोपदेशम् (विकिस्रोत) (संस्कृत में)
  4. कथासरित्सागर (विकिस्रोत) (संस्कृत में)
  5. वेतालपञ्चविंशति (विकिस्रोत) (संस्कृत में)
  6. बेताल पच्चीसी (विकिस्रोत) (हिन्दी में)
  7. सिंहासनद्वात्रिंशति (विकिस्रोत) (संस्कृत में)
  8. सिंहासन बत्तीसी (विकिस्रोत) (हिन्दी में)
वैयक्तिक औज़ार
नामस्थान

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