न्यूरॉन

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न्यूरॉन: न्यूरॉन (नर्व कोशिका)
न्यूरॉन (नर्व कोशिका) - सैन्टियागो रओमिन सेजल द्वारा कबूतर के सेरेबलम में न्यूरॉन का आरेख। (ए) पर्किंज कोशिकाएं, बहुध्रुवी न्यूरॉन का उदाहरण; (बी) ग्रैन्यूल कोशिका भी बहुध्रुवी होती हैं।
सैन्टियागो रओमिन सेजल द्वारा कबूतर के सेरेबलम में न्यूरॉन का आरेख। (ए) पर्किंज कोशिकाएं, बहुध्रुवी न्यूरॉन का उदाहरण; (बी) ग्रैन्यूल कोशिका भी बहुध्रुवी होती हैं।
न्यूरोलैक्स ID sao1417703748
एक खास न्यूरॉन की संरचना
न्यूरॉन
न्यूरांस

न्यूरॉन (अंग्रेज़ी:Neuron) जिसे तंत्रिका कोशिका भी कहा जाता हैं तंत्रिका तंत्र में स्थित एक उत्तेजनीय कोशिका है। इस कोशिका का कार्य मस्तिष्क से सूचना का आदान प्रदान और विश्लेषण करना है।[1] यह कार्य एक विद्युत-रासायनिक संकेत के द्वारा होता है। न्यूरॉन तंत्रिका तंत्र (नर्वस सिस्टम) के प्रमुख भाग होते हैं जिसमें मस्तिष्क, मेरु रज्जु (स्पाइनल कॉर्ड) और पेरीफेरल गैंगिला होते हैं। कई तरह के विशिष्ट न्यूरॉन होते हैं जिसमें सेंसरी न्यूरॉन, इंटरन्यूरॉन और मोटर न्यूरॉन होते हैं। किसी चीज के स्पर्श छूने, ध्वनि या प्रकाश के होने पर ये न्यूरॉन ही प्रतिक्रिया करते हैं और यह अपने संकेत मेरु रज्जु और मस्तिष्क को भेजते हैं। मोटर न्यूरॉन मस्तिष्क और मेरु रज्जु से सिग्नल ग्रहण करते हैं। मांसपेशियों की सिकुड़न और ग्रंथियां इससे प्रभावित होती है। एक सामान्य और साधारण न्यूरॉन में एक कोशिका यानि सोमा, डेंड्राइट और एक्सन होते हैं। न्यूरॉन का मुख्य हिस्सा सोमा होता है।

न्यूरॉन को उसकी संरचना के आधार पर भी विभाजित किया जाता है। यह एकध्रुवी, द्विध्रुवी और बहुध्रुवी (क्रमशः यूनीपोलर, बाईपोलर और मल्टीपोलर) होते हैं।[1] न्यूरॉन में कोशिकीय विभाजन नहीं होता है जिससे इसके नष्ट होने पर दुबारा प्राप्त नहीं किया जा सकता। किन्तु इसे स्टेम कोशिका के द्वारा प्राप्त किया जा सकता है। ऐसा भी देखा गया है कि एस्ट्रोसाइट को न्यूरॉन में बदला जा सकता है।

न्यूरॉन शब्द का पहली बार प्रयोग जर्मन शरीर विज्ञानशास्त्री हेनरिक विलहेल्म वॉल्डेयर ने किया था। २०वीं शताब्दी में पहली बार न्यूरॉन प्रकाश में आई जब सेंटिगयो रेमन केजल ने बताया कि यह तंत्रिका तंत्र की प्राथमिक प्रकार्य इकाई होती है। केजल ने प्रस्ताव दिया था कि न्यूरॉन अलग कोशिकाएं होती हैं जो कि विशिष्ट जंक्शन के द्वारा एक दूसरे से संचार करती है।[1] न्यूरॉन की संरचना का अध्ययन करने के लिए केजल ने कैमिलो गोल्गी द्वारा बनाए गए सिल्वर स्टेनिंग तरीके का प्रयोग किया। मस्तिष्क में न्यूरॉन की संख्या प्रजातियों के आधार पर अलग होती है। एक आकलन के मुताबिक मानव मस्तिष्क में १०० अरब न्यूरॉन होते हैं। टोरंटो विश्वविद्यालय में हुए अनुसंधान में एक ऐसे प्रोटीन की पहचान हुई है जिसकी मस्तिष्क में तंत्रिकाओं के विकास में महत्त्वपूर्ण भूमिका होती है। इस प्रोटीन की सहायता से मस्तिष्क की कार्यप्रणाली को और समझना भी सरल होगा व अल्जामरर्स जैसे रोगों के कारण भी खोजे जा सकेंगे। एसआर-१०० नामक यह प्रोटीन केशरूकीय क्षेत्र में पाया जाता है साथ ही यह तंत्रिका तंत्र का निर्माण करने वाले जीन को नियंत्रित करता है। एक अमरीकी जरनल सैल में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार स्तनधारियों के मस्तिष्क में विभिन्न जीनों द्वारा तैयार किए गए आनुवांशिक संदेशों के वाहन को नियंत्रित करता है। इस अध्ययन का उद्देश्य ऐसे जीन की खोज करना था जो मस्तिष्क में न्यूरॉन के निर्माण को नियंत्रित करते हैं। ऎसे में न्यूरॉन के निर्माण में इस प्रोटीन की महत्त्वपूर्ण भूमिका की खोज न्यूरॉन के विकास में होने वाली कई अपसामान्यताओं से बचा सकती है। वैज्ञानिकों के अनुसार मस्तिष्क में न्यूरॉन निर्माण के समय कुछ गलत संदेशों वाहन से न्यूरॉन का निर्माण प्रभावित होता है।[2] न्यूरॉन का विकृत होना अल्जाइमर्स जैसी बीमारियों के कारण भी होता है। इस प्रोटीन की खोज के बाद इस दिशा में निदान की संभावनाएं उत्पन्न हो गई हैं।

[संपादित करें] संदर्भ

  1. 1.0 1.1 1.2 न्यूरॉन।हिन्दुस्तान लाइव।१ फरवरी, २०१०
  2. न्यूरॉन बनाने वाले प्रोटीन की पहचान|पत्रिका

[संपादित करें] बाहरी सूत्र

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