निर्मला
मुक्त ज्ञानकोष विकिपीडिया से
| निर्मला | |
|---|---|
![]() मुखपृष्ठ |
|
| लेखक | प्रेमचंद |
| देश | भारत |
| भाषा | हिंदी |
| विषय | साहित्य |
| प्रकाषक | डायमंड पॉकेट बुक |
| प्रकाषन कि तिथी | पहली बार १९२७ में प्रकाशित |
| पन्नें | १७२ |
| आई.एस.बी.एन | 8128400088 |
निर्मला प्रेमचंद द्वारा रचित उपन्यास है।
[संपादित करें] सारांश
प्रेमचन्द का यह उपन्यास ‘‘निर्मला’’ छोटा होते हुए भी उनके प्रमुख उपन्यासों में गिना जाता है। इसका प्रकाशन १९२७ में हुआ था। इस उपन्यास में उन्होंने दहेज प्रथा तथा बेमेल विवाह की समस्या उठाई है और बहुसंख्यक मध्यमवर्गीय हिन्दू समाज के जीवन का बड़ा यथार्थवादी मार्मिक चित्रण प्रस्तुत किया है। निर्मला में अनमेल विवाह और दहेज प्रथा की दुखान्त कहानी है। उपन्यास कस अन्त में निर्मला की मृत्यृ इस कुत्सित सामाजिक प्रथा को मिटा डालने के लिए एक भारी चुनौती है। प्रेमचन्द ने भालचन्द और मोटेराम शास्त्री के प्रसंग द्वारा उपन्यास में हास्य की सृष्टि की है।
|
|||||||||||||||||||||||
[संपादित करें] शीर्षक
निर्मल
