निर्मला

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निर्मला  
Nirmala.jpg
मुखपृष्ठ
लेखक प्रेमचंद
देश भारत
भाषा हिंदी
विषय साहित्य
प्रकाषक डायमंड पॉकेट बुक
प्रकाषन कि तिथी पहली बार १९२७ में प्रकाशित
पन्नें १७२
आई.एस.बी.एन 8128400088

निर्मला प्रेमचंद द्वारा रचित उपन्यास है।

[संपादित करें] सारांश

प्रेमचन्द का यह उपन्यास ‘‘निर्मला’’ छोटा होते हुए भी उनके प्रमुख उपन्यासों में गिना जाता है। इसका प्रकाशन १९२७ में हुआ था। इस उपन्यास में उन्होंने दहेज प्रथा तथा बेमेल विवाह की समस्या उठाई है और बहुसंख्यक मध्यमवर्गीय हिन्दू समाज के जीवन का बड़ा यथार्थवादी मार्मिक चित्रण प्रस्तुत किया है। निर्मला में अनमेल विवाह और दहेज प्रथा की दुखान्त कहानी है। उपन्यास कस अन्त में निर्मला की मृत्यृ इस कुत्सित सामाजिक प्रथा को मिटा डालने के लिए एक भारी चुनौती है। प्रेमचन्द ने भालचन्द और मोटेराम शास्त्री के प्रसंग द्वारा उपन्यास में हास्य की सृष्टि की है।

[संपादित करें] शीर्षक

निर्मल

वैयक्तिक औज़ार
नामस्थान

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