नागरहोल अभयारण्य

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नागरहोल राष्ट्रीय उद्यान/अभयारण्य
नागरहोल राष्ट्रीय उद्यान/अभयारण्य is located in भारत
नागरहोल में मस्त हाथी
स्थिति मैसूर जिला, भारत
निकटतम शहर मैसूर, भारत
निर्देशांक 12°5′0″N 76°15′0″E / 12.08333, 76.25Erioll world.svgनिर्देशांक: 12°5′0″N 76°15′0″E / 12.08333, 76.25
क्षेत्रफ़ल 643 km²
स्थापित 1988

कर्नाटक में स्थित नागरहोल अपने वन्य जीव अभ्यारण्य के लिए विश्व भर में प्रसिद्ध है। यह उन कुछ जगहों में से एक है जहां एशियाई हाथी पाए जाते हैं। हाथियों के बड़े-बड़े झुंड यहां देखे जा सकते हैं। मानसून से पहले की बारिश में यहां बड़ी संख्या में रंगबिरंगे पक्षी दिखाई देते हैं। उस समय पूरा वातावरण उनकी चहचहाट से गूंज उठता है। पशुप्रेमियों के लिए यहां देखने और जानने के लिए बहुत कुछ है।

एक जमाने में यह जगह मैसूर के राजाओं के शिकार का स्‍थल था। लेकिन बाद में इसे अभ्यारण्य बना दिया गया। अब यह राजीव गांधी अभ्यारण्य के नाम से जाना जाता है। यह पार्क दक्कन के पठार का हिस्सा है। जंगल के बीच में नागरहोल नदी बहती है, जो कबीनी नदी में मिल जाती है। कबीनी नदी पर बने बांध के कारण पार्क के दक्षिण में एक झील बन गई है जो इस उद्यान को बांदीपुर टाइगर रिजर्व से अलग करती है।

मुख्य आकर्षण[संपादित करें]

सफारी का मजा[संपादित करें]

640 वर्ग किमी. में फैले नागरहोल अभ्यारण्य में अनेक जानवर पाए जाते हैं। इसलिए जंगल की सफारी से इनको करीब से देखना रोमांचक अनुभव होता है। यद्यपि यहां बहुत सारे शेर और चीते हैं, फिर भी इन्हें ढूंढ़ और देख पाना इतना आसान नहीं हैं। शेर और चीतों के अलावा हिरन, चार सींग वाला हिरन, कलगी वाला साही और काली गर्दन वाले खरगोश भी यहां देखे जा सकते हैं। पर्यटक अभ्यारण्य में केवल 30 वर्ग किमी. के क्षेत्र में ही घूम सकते हैं। यहां जीप और बस की सफारी उपलब्ध है। समय: सुबह 6 बजे-शाम 6 बजे तक

निकटवर्ती दर्शनीय स्थल[संपादित करें]

ब्रह्मगिरी अभ्यारण्य[संपादित करें]

181 वर्ग किमी. में फैला ब्रह्मगिरी वन्यजीव अभ्यारण्य कुट्टा से माकुट्टा के बीच बना हुआ है। यह अभ्यारण्य केरल के अरलम वन्यजीव अभ्यारण्य के नजदीक है। ये जंगल गौर, भालू, हाथी, हिरन, चीते, जंगली बिल्ली, शेर जैसी पूंछ वाला बंदर और नीलगिरी लंगूर का घर है। ब्रह्मगिरी पक्षियों से रुबरु होने वाले के उचित जगह है। इस अभ्यारण्य में आने का सही समय अक्टूबर से मई है। यहां आने से पहले अनुमति लेना आवश्यक है।

इपरू फॉल्स और ईश्वर मंदिर[संपादित करें]

यह झरना ब्रह्मगिरी पर्वत श्रृंखला की तराई में स्थित है। इपरू फॉल्स इन पर्वतों के प्रवेश द्वार की भूमिका निभाता है। यह कूर्ग का प्रमुख पर्यटक केंद्र है। नागरहोल से इर्पू कुट्टा के रास्ते यहां आया जा सकता हैं। बारिश के बाद यहां की खूबसूरती और भी बढ़ जाती है। तब यहां चारों तरफ हरियाली ही दिखाई देती है। यहां पास ही ईश्वर मंदिर है जिसके बारे में माना जाता है कि यहां पर प्रभु राम ने स्वयं शिवलिंग की पूजा की थी। यहां परंपरा है कि लक्ष्मण तीर्थ में डुबकी लगाने से पहले इस मंदिर का दर्शन करना जरूरी है। शिवरात्रि के दौरान बड़ी संख्या में भक्त यहां दर्शनों के लिए आते हैं।

कुट्टा[संपादित करें]

नागरहोल के दक्षिण में 7 किमी. दूर कुट्टा नामक नगर है। इसके बारे में माना जाता है कि यहां पर देवी काली ने निम जाति के कुरुबस से विवाह किया। उनके पुत्र का नाम कुट्टा था। उन्हीं के नाम पर इस जगह का नाम पड़ा। उनकी याद में यहां प्रतिवर्ष अप्रैल के मध्य से मई तक उत्सव मनाया जाता है।

आवागमन[संपादित करें]

वायु मार्ग

नजदीकी हवाई अड्डा मैसूर है। इसके अलावा बैंगलोर हवाई अड्डा भी है जो देश के सभी प्रमुख शहरों और कुछ विदेशी शहरों से जुड़ा हुआ है।

सड़क मार्ग

यहां से सबसे पास कुट्टा (7 किमी.) नामक शहर है। इसके अलावा मदिकेर (93 किमी.), मैसूर (96 किमी.) और बैंगलोर (256 किमी.) से यह सडक मार्ग से जुडा हुआ है।

चित्र दीर्घा[संपादित करें]

सन्दर्भ[संपादित करें]

बाहरी कड़ियां[संपादित करें]

Wildlife Times: Article on Predators of Nagarahole