नन्दा देवी राष्ट्रीय उद्यान

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नन्दा देवी राष्ट्रीय उद्यान
नन्दा देवी राष्ट्रीय उद्यान is located in Uttarakhand
स्थिति उत्तराखण्ड, भारत
निर्देशांक 30°25′7″N 79°50′59″E / 30.41861°N 79.84972°E / 30.41861; 79.84972Erioll world.svgनिर्देशांक: 30°25′7″N 79°50′59″E / 30.41861°N 79.84972°E / 30.41861; 79.84972
क्षेत्रफ़ल ६३०.३३ वर्ग कि.मी.
स्थापित १९८२
नन्दा देवी और फूलों की घाटी राष्ट्रीय उद्यान*
युनेस्को विश्व धरोहर स्थल
राष्ट्र पार्टी भारत
मानदंड vii, x
देश {{{country}}}
क्षेत्र एशिया-पॅसिफ़िक
प्रकार प्राकृतिक
आईडी UNESCO ३३५
शिलालेखित इतिहास
शिलालेख १९८८  (१२वीं सत्र)
विस्तार २००५
* नाम, जो कि विश्व धरोहर सूची में अंकित है
यूनेस्को द्वारा वर्गीकृत क्षेत्र

नन्दा देवी राष्ट्रीय उद्यान भारत के उत्तराखण्ड राज्य में नन्दा देवी पर्वत के आस-पास का इलाका है जो कि ६३०.३३ वर्ग कि.मी. फैला हुआ है। इसको सन् १९८२ में राष्ट्रीय उद्यान घोषित किया गया था। फूलों की घाटी राष्ट्रीय उद्यान को मिलाकर सन् १९८८ में इसे युनेस्को द्वारा विश्व धरोहर घोषित किया गया।[1]
नन्दा देवी राष्ट्रीय उद्यान ६३०.३३ वर्ग कि.मी. के क्षेत्र में फैला हुआ है और फूलों की घाटी राष्ट्रीय उद्यान के साथ मिलकर नन्दा देवी बायोस्फ़ियर रिज़र्व बनाता है जिसका कुल क्षेत्रफल २२३६.७४ वर्ग कि.मी. है और इसके चारों ओर ५१४८.५७ वर्ग कि.मी. का मध्यवर्ती क्षेत्र (buffer zone) है।[2][3] यह रिज़र्व युनेस्को (UNESCO) की विश्व के बायोस्फ़ेयर रिज़र्व की सूची में सन् २००४ से अंकित है।
इस उद्यान के अंतर्गत नन्दा देवी अभयारण्य आता है जो कि एक हिमनद घाटी है जो चारों ओर से ६००० से ७५०० मी. ऊँची चोटियों से घिरी हुयी है और जिसका जल इस उद्यान के पश्चिम में ऋषिगंगा नामक नदी में बहता है। इस नदी का दर्रा बहुत तंग, खड़ा और अत्यन्त दुर्गम है। समूचे उद्यान की समुद्र सतह से ऊँचाई ३५०० मी. से भी ज़्यादा है।

उद्यान का विस्तार[संपादित करें]

उद्यान का समोच्च रेखाओं (contours) वाला मानचित्र

इस अभयारण्य को दो भागों में बांटा जा सकता है: भीतरी और बाहरी। दोनों को उत्तर, पूर्व और दक्षिण की तरफ़ से दीवारनुमा ऊँची-ऊँची चोटियाँ घेरे हुये हैं और पश्चिम की तरफ़ उत्तर और दक्षिण की पर्वतश्रेणियाँ ऋषिगंगा दर्रे में जाकर मिल जाती हैं।[4]
भीतरी अभयारण्य लगभग पूरे क्षेत्रफल के दो तिहाई हिस्से में फैला हुआ है और इसी इलाके में नंदा देवी पर्वत के साथ-साथ उत्तरी और दक्षिणी ऋषि हिमनद भी हैं जो नंदा देवी चोटी के दोनों ओर स्थित हैं।[4] इन दोनों हिमनदों के सहायक हिमनद क्रमशः उत्तरी और दक्षिणी नंदा देवी हिमनद हैं। ऍरिक शिप्टन और बिल टिल्मैन सन् १९३४ में भीतरी अभयारण्य में ऋषि दर्रे के रास्ते पहुँचने वाले पहले मनुष्य माने जाते हैं।[5]
बाहरी अभयारण्य पश्चिम में कुल क्ष्रेत्रफल का एक तिहाई हिस्सा लेता है और भीतरी अभयारण्य से ऊँची पर्वतश्रेणियों से अलग होता है। इसमें ऋषिगंगा बहती है जो इसे दो भागों में बाँटती है। इसके उत्तरी भाग में रमनी हिमनद है जो दूनागिरि और चांगाबांग चोटियों की ढलानों से नीचे बहता है। इसके दक्षिणी भाग में त्रिशूल हिमनद है जो त्रिशूल पर्वत से नीचे बहता है। बाहरी अभयारण्य में पहली बार कदम सन् १९०७ में लॉंगस्टाफ़ ने रखे थे जब उन्होंने त्रिशूल I पर्वतारोहण किया था।[5]

चोटियों के नाम[संपादित करें]

उद्यान के अन्दर[संपादित करें]

नंदा देवी
  • नंदा देवी: ७८१६ मी.
  • देवीस्थान I, II: ६६७८ मी., ६५२९ मी.
  • ऋषि कोट: ६२३६ मी.

उद्यान की दीवार के रूप में[संपादित करें]

  • हनुमान: ६०७५ मी.
  • दूनागिरि: ७०६६ मी.
  • चांगाबांग: ६८६४ मी.
  • कलंक: ६९३१ मी.
  • ऋषि पहर: ६९९२ मी.
  • मंगराओं: ६५६८ मी.
  • देव दमला: ६६२० मी.
  • बमचु: ६३०३ मी.
  • सकरम: ६२५४ मी.
  • लाटु धुरा: ६३९२ मी.
  • सुनंदा देवी: ७४३४ मी.
  • नंदा खाट: ६६११ मी.
  • पनवाली द्वार: ६६६३ मी.
  • मैकटोली: ६८०३ मी.
  • देवटोली: ६७८८ मी.
  • मृगथुनी: ६८५५ मी.
  • त्रिशूल I, II, III: ७१२० मी., ६६९० मी., ६००८ मी.
  • बेथरटोली हिमल: ६३५२ मी.

उद्यान की परिधि के बाहर[संपादित करें]

  • हरदेओल: ७१५१ मी. (पूर्वोत्तर किनारे में)
  • त्रिशूली: ७०७४ मी. (हरदेओल के ज़रा आगे)
  • नंदा कोट: ६८६१ मी. (दक्षिण-पूर्व किनारे में)
  • नंदा घुण्टी: ६३०९ मी. (दक्षिण-पश्चिम किनारे में)

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. "Official UNESCO site". http://whc.unesco.org/en/list/335. अभिगमन तिथि: ०४/११/२०१२. 
  2. "World Conservation Monitoring Centre". http://www.wcmc.org.uk/protected_areas/data/wh/nandadev.html. अभिगमन तिथि: ०४/११/२०१२. 
  3. Kala, Chandra Prakash (2005). The Valley of Flowers: A Newly Declared World Heritage Site. 89. Current Science. pp. 919-920. 
  4. सन् १९९२ में अर्न्स्ट हूबर द्वारा गढ़वाल-हिमालय-ओस्त नामक १:१५०,००० अनुपात का भारतीय सर्वेक्षण विभाग के मानचित्रों पर आधारित स्विस ऍल्पाइन रिसर्च फ़ाउनडेशन के लिए बनाया गया स्थलाकृतिक मानचित्र (topographic map)
  5. H. W. Tilman, The Ascent of Nanda Devi, Cambridge University Press, 1937. Reprinted in The Seven Mountain-Travel Books, The Mountaineers, Seattle, 2003, ISBN 0-89886-960-9.

बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]