नज़ीर अकबराबादी

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नज़ीर अकबराबादी (१७३५–१८३०) १८वीं शदी के भारतीय शायर थे जिन्हें "नज़्म का पिता" कहा जाता है। उन्होंने कई ग़ज़लें लिखी, उनकी सबसे प्रसिद्ध व्यंग्यात्मक ग़ज़ल बंजरानामा है।[1]

नज़ीर आम लोगों के कवि थे। उन्होंने आम जीवन, ऋतुओं, त्योहारों, फलों, सब्जियों आदि विषयों पर लिखा । वह धर्म-निरपेक्षता के ज्वलंत उदाहरण हैं। कहा जाता है कि उन्होंने लगभग दो लाख रचनायें लिखीं । परन्तु उनकी छह हज़ार के करीब रचनायें मिलती हैं और इन में से ६०० के करीब ग़ज़लें हैं।

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. अमरेश दत्ता (2006). The Encyclopaedia Of Indian Literature (Volume Two) (Devraj To Jyoti), Volume 2. साहित्य अकादमी. प॰ 1619. आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰ 81-260-1194-7. 

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