नक्काशी (एचिंग)

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एच या एचिंग के अन्य प्रयोगों के लिए , देखें एचिंग (डिसएम्बिगुएशन), और इस विधि के इतिहास के लिए पुराने मास्टर प्रिंटों को देखें .
सैनिक और उसकी पत्नी.डैनियल हूफर की एचिंग, जिनके बारे में माना जाता है कि मुद्रण में इस तकनीक का इस्तेमाल करने वाले वे पहले व्यक्ति थे

नक्काशी धातु में बनी आकृति में एक डिजाइन तैयार करने के लिए किसी धातु की सतह के अरक्षित हिस्सों की कटाई के लिए तीव्र एसिड या मॉरडेंट का इस्तेमाल करने की प्रक्रिया को कहते हैं (यह मूल प्रक्रिया थी; आधुनिक निर्माण प्रक्रिया में अन्य प्रकार की सामग्रियों पर अन्य रसायनों का इस्तेमाल किया जा सकता है). प्रिंट तैयार करने की इंटैग्लियो विधि के रूप में यह नक्शाकारी के साथ पुराने मास्टर प्रिंटों के लिए सबसे महत्वपूर्ण तकनीक है और आज इसका बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया जाता है.

बुनियादी तरीका[संपादित करें]

रेमब्रांट, बिल्ली के साथ वर्जिन और बच्चा, 1654ताम्बे की मूल एचिंग प्लेट के ऊपर है, प्रिंट का उदाहरण नीचे है, जहाँ कम्पोजीशन को पलट दिया गया है.

शुद्ध रूप से नक्काशी में एक धातु (आम तौर पर तांबा, जस्ता या स्टील) के प्लेट को एक मोम की सतह के ढँक दिया जाता है जो एसिड के लिए प्रतिरोधी होता है.[1] इसके बाद कलाकार नक्काशी की एक नुकीली सुई से सतह को खुरचता है [2] जहाँ वह तैयार पीस में दिखाने के लिए एक लाइन प्राप्त करना चाहता है, जिससे अनावृत्त धातु उभरकर आए. एक तिरछे अंडाकार अनुभाग वाले एक उपकरण, एचॉप का भी इस्तेमाल "फूली हुई" लाइनों के लिए किया जाता है.[3] इसके बाद प्लेट को एसिड के एक टब में डुबाया जाता है जिसे तकनीकी तौर पर मॉरडेंट ("काटने" के लिए फ्रांसीसी शब्द) या एचेंट कहा जाता है, या फिर इसे एसिड से धोया जाता है.[4] एसिड, धातु के के उजागर हिस्से को "काटता" है और प्लेट में डूबी हुई लाइनें ही बची रह जाती हैं. इसके बाद शेष सतह को प्लेट से साफ़ कर लिया जाता है. समूची प्लेट में स्याही लगाई जाती है और कुछ समय बाद सतह से स्याही को हटा दिया जाता है, इस प्रकार नक्काशी की गयी लाइनों में केवल स्याही बची रह जाती है.

इसके बाद प्लेट को पेपर की एक शीट (मुलायम करने के लिए इसे अक्सर गीला कर लिया जाता है) के साथ एक हाई-प्रेशर प्रिंटिंग प्रेस के अंदर रखा जाता है.[5] पेपर नक्काशी की गयी लाइनों से स्याही को सोख लेता है और एक प्रिंट तैयार हो जाता है. इस प्रक्रिया को कई बार दोहराया जा सकता है, प्लेट द्वारा घिस जाने का पर्याप्त संकेत देने से पहले आम तौर पर कई सौ छापे (प्रतियां) प्रिंट किये जा सकते हैं. प्लेट पर किये गए काम को पूरी प्रक्रिया को दोहराते हुए भी जोड़ा जा सकता है; इससे एक ऐसी एचिंग तैयार होती है जो एक से अलग अवस्थाओं में मौजूद रहता है.

एचिंग को अक्सर अन्य इंटैग्लियो तकनीकों के साथ शामिल किया गया है जैसे कि एनग्रेविंग (उदाहरण के लिए रेम्ब्रांट) या एक्वाटिंट (उदाहरण के लिए गोया).

इतिहास[संपादित करें]

उपदेश देते हुए इस मसीह, हंड्रेड गिल्डर प्रिंट के रूप में जाना जाता है; रेमब्रांट द्वारा c1648 में की गयी नक्काशी.

उत्पत्ति[संपादित करें]

ब्रिटिश संग्रहालय में पूर्व में एच की गयी प्रिटिंग प्लेटों का संग्रह

लगभग मध्य युग के बाद या उससे भी पहले से यूरोप में धातु की चीजों जैसे कि बंदूकें, कवच, कप और प्लेटों में सजावट के क्रम में सुनारों और अन्य धातु- कर्मकारों द्वारा एचिंग प्रचलित थी. वैसे भी जर्मनी में कवच की अलंकृत सजावट एक ऐसी कला थी जो संभवतः 15वीं सदी के अंत के आस-पास - एचिंग के एक प्रिंट तैयार करने वाली तकनीक के रूप में विकसित होने से कुछ समय पहले इटली से लाई गयी थी. माना जाता है कि प्रिंट तैयार करने में उपयोग की जाने वाली प्रक्रिया के रूप में इसका आविष्कार ऑस्बर्ग, जर्मनी के डेनियल होफर (लगभग 1470-1536) द्वारा किया गया था. होफर एक शिल्पकार थे जिन्होंने कवच को इस तरीके से अलंकृत किया था, और लोहे की प्लेटों का उपयोग करते हुए इस विधि का प्रिंट तैयार करने में प्रयोग किया था (जिनमें से कई आज भी मौजूद हैं). अपने प्रिंट के अलावा कवच पर उनकी कलाकृति के दो प्रमाणित उदाहरण मौजूद हैं: 1536 की एक ढाल जो अब मैड्रिड के रीयल आर्मेरिया में मौजूद है और एक तलवार जो न्यूरेम्बर्ग के जर्मनिशेज राष्ट्रीय संग्रहालय में रखी है. जर्मन ऐतिहासिक संग्रहालय, बर्लिन में 1512 और 1515 के बीच की तारीख का एक ऑग्सबर्ग घोड़े का कवच मौजूद है जिसे होफर की एचिंग और लकड़ी के टुकड़ों से बनी आकृतियों से अलंकृत किया गया है लेकिन इसका कोई प्रमाण मौजूद नहीं है कि होफर ने स्वयं इस पर काम किया था क्योंकि उनके अलंकृत प्रिंट ज्यादातर विभिन्न मीडिया में अन्य शिल्पकारों के लिए पैटर्न्स के रूप में तैयार किये गए थे. तांबे के प्लेटों के लिए स्विच संभवतः इटली में बनाया गया था और उसके बाद एचिंग जल्द ही प्रिंट तैयार करने वाले कलाकारों के लिए सबसे अधिक लोकप्रिय माध्यम के रूप में एनग्रेविंग (उत्कीर्णन) के सामने एक चुनौती बनकर आ गया. इसका सबसे बड़ा फ़ायदा यह था कि एनग्रेविंग के विपरीत, जिसमें धातु पर नक्काशी के लिए विशेष कौशल की आवश्यकता होती है, एचिंग ड्रॉइंग में प्रशिक्षित किसी कलाकार के लिए एक अपेक्षाकृत आसानी से सीखी जाने वाली कला है.

कैलोट के आविष्कार: एचप, हार्ड ग्राउंड, स्टॉपिंग-आउट[संपादित करें]

लोरेन (अब फ्रांस का एक हिस्सा) में स्थित नैन्सी के जैक कैलोट (1592-1635) ने एचिंग की तकनीक में महत्त्वपूर्ण तकनीकी प्रगति की थी. उनहोंने अंतिम सिरे पर एक तिरछे अंडाकार भाग के साथ एक प्रकार की एचिंग सुई, एचप विकसित की जिसने नक्काशी वालों (एचर्स) के लिए एक मोटी लाइन तैयार करने में मदद की जो उत्कीर्ण करने वालों (एन्ग्रेवर्स) के लिए संभव था.

सी1612 बास्केट के साथ गार्डेनर, जेक्यूस बैलेंग द्वारा एचिंग

ऐसा लगता है कि उन्होंने मोम आधारित फॉर्मूला की बजाय बीन बनाने वालों के वार्निश का इस्तेमाल करते हुए एचिंग की सतह के लिए एक संशोधित, सख्त, नुस्खा भी तैयार किया था. इसने लाइनों को और अधिक गहरे काटे जाने लायक बना दिया जिससे प्रिंटिंग की आयु बढ़ गयी और साथ ही "खराब-कटाई" के खतरे को भी काफी हद तक कम कर दिया, जहाँ एसिड सतह के अंदर उस जगह तक पहुँच जाता था जहाँ इसे नहीं पहुँचना चाहिए था, जिससे तस्वीर पर धब्बे या दाने तैयार हो सकते थे. पहले एचर के दिमाग में हमेशा खराब-कटाई (फाउल-बाइटिंग) का खतरा मौजूद रहता था जिससे वह एक सिंगल प्लेट पर बहुत ज्यादा समय नहीं लगा सकता था, कटाई (बाइटिंग) की प्रक्रिया में यह खतरा हमेशा के लिए दूर हो गया है. अब एचर अत्यधिक विस्तृत काम कर सकते हैं जिसपर पहले एन्ग्रेवरों का एकाधिकार था और कैलोट ने नई संभावनाओं का पूरी तरह इस्तेमाल करना संभव बना दिया.

उन्होंने पहले के एचरों की तुलना में कई "स्टॉपिंग्स-आउट" का व्यापक और परिष्कृत उपयोग किया. यह संपूर्ण प्लेट पर हल्के से एसिड काट देने की तकनीक है, जिसके बाद कलाकृति के उन हिस्सों की स्टॉपिंग-आउट की जाती है जिसे कलाकार दुबारा एसिड में डुबाने से पहले ग्राउंड के साथ कवर करते हुए हल्के टोन में रखना चाहता है. इस प्रक्रिया के सावधानीपूर्वक नियंत्रण से उन्होंने दूरी और लाईट एवं शेड के प्रभाव में अभूतपूर्व सूक्ष्मता हासिल की. उनके ज्यादातर प्रिंट अपेक्षाकृत छोटे थे - उनके सबसे लंबे डाइमेंशन में लगभग छह इंच या 15 सेमी तक, लेकिन विस्तार के साथ पैक.

उनके अनुयायियों में से एक, पेरिस के अब्राहम बोस ने एचिंग के पहले प्रकाशित मैनुअल के साथ कैलोट के आविष्कारों को पूरे यूरोप में फैलाया जिसका इतालवी, डच, जर्मन और अंग्रेजी में अनुवाद किया गया था.

17वीं सदी एचिंग का महान युग था जिसमें रेम्ब्रांट, जियोवानी बेनेडेटो कास्टिग्लियोन और कई अन्य महारथी कलाकार हुए थे. 18वीं पाइरानेसी में ताईपोलो और डेनियल चोडोवीकी बेहतरीन एचरों की एक थोड़ी सी संख्या में सर्वश्रेष्ठ थे. 19वीं सदी और 20वीं सदी की शुरुआत में एचिंग के पुनरुद्धार ने कुछ कम कम महत्त्व के कलाकारों को उत्पन्न किया लेकिन वास्तव में कोई बड़ा नाम नहीं शामिल था. एचिंग आज भी व्यापक रूप से प्रचलित है.

भिन्नताएं: एक्वाटिंट, सॉफ्ट-ग्राउंड और रिलीफ एचिंग[संपादित करें]

विलियम ब्लेक द्वारा रिलीफ एचिंग, फ्रंटीसपीस टू अमेरिका ए प्रोफेसी 1795)
  • एक्वाटिंट में टोनल इफेक्ट प्राप्त करने के लिए एसिड-प्रतिरोधी रेज़िन (राल) का उपयोग किया जाता है.
  • सॉफ्ट-ग्राउंड एचिंग में एक अपेक्षाकृत विशेष नरम ग्राउंड का इस्तेमाल किया जाता है. कलाकार ग्राउंड के ऊपर कागज का एक टुकड़ा (या आधुनिक उपयोग में, कपड़े आदि को) रखता है और उस पर चित्रकारी करता है. प्रिंट एक ड्राइंग जैसा दिखता है.
  • रिलीफ एचिंग 1788 के आसपास विलियम ब्लेक द्वारा अविष्कृत किया गया; 1880-1950 के बीच छवियों के व्यावसायिक मुद्रण के लिए एक फोटो-मेकैनिकल ("लाइन-ब्लॉक") वेरिएंट सर्वाधिक प्रचलित था. यह प्रक्रिया एचिंग के समान ही है लेकिन इसे एक रिलीफ प्रिंट के रूप में मुद्रित किया जाता है जिसमें "सफेद" पृष्ठभूमि वाले क्षेत्रों पर एसिड का इस्तेमाल किया जाता है जबकि "काले" प्रिंट वाले क्षेत्रों को मिटटी से ढंक दिया जाता है. ब्लेक की असली तकनीक विवादास्पद बनी हुई है. उन्होंने इस तकनीक का इस्तेमाल लिखावट और छवियों को एक साथ मुद्रित करने के लिए किया था.

आधुनिक तकनीक का विस्तृत विवरण[संपादित करें]

एक मोमयुक्त एसिड-प्रतिरोधक जिसे एक ग्राउंड के रूप में जाना जाता है, इसे धातु के एक प्लेट पर लगाया जाता है जो अक्सर तांबे या जस्ते का होता है लेकिन स्टील प्लेट विभिन्न गुणवत्ताओं के साथ एक अन्य माध्यम है. ग्राउंड के दो सामान्य प्रकार हैं: हार्ड ग्राउंड और सॉफ्ट ग्राउंड

हार्ड ग्राउंड को दो तरीकों से प्रयोग किया जा सकता है. ठोस हार्ड ग्राउंड एक सख्त मोमयुक्त ब्लॉक में आता है. इस किस्म पर हार्ड ग्राउंड का प्रयोग करने के लिए नक्काशी की जाने वाली प्लेट को एक गर्म प्लेट (70 डिग्री सेल्सियस पर निर्धारित) पर रखा जाता है, जो एक तरह की धातु की काम की जाने वाली सतह जिसे गर्म किया जाता है. प्लेट गर्म होता है और ग्राउंड को हाथों से, प्लेट पर पिघलाते हुए इसे लगाया जाता है. ग्राउंड को जितना अधिक समान रूप से संभव हो रोलर के जरिये प्लेट पर फैलाया जाता है. एक बार लगाए जाने के बाद एचिंग प्लेट को गर्म-प्लेट से हटा दिया जाता है और इसे ठंढा होने दिया जाता है जो ग्राउंड को सख्त कर देता है.

ग्राउंड के सख्त हो जाने के बाद कलाकार प्लेट को आदर्श रूप से तीन मधुमक्खियों के मोम वाले टेपरों से "फूँकता" है जिससे लौ प्लेट पर लगा कर ग्राउंड को काला कर देती है और यह देखना आसान हो जाता है की प्लेट का कौन सा भाग उजागर है. धुंआ करने से न केवल प्लेट काला हो जाता है बल्कि मोम की थोड़ी मात्रा भी इसमें मिल जाती है. बाद में कलाकार एक नुकीले उपकरण का इस्तेमाल कर ग्राउंड को खरोंचता है और धातु उजागर हो जाती है.

लैंडस्केप अंडर ट्रीज़, पौला मोडरसोन-बेकर द्वारा एचिंग 1876-1907

हार्ड ग्राउंड को लगाने का दूसरा तरीका तरल हार्ड ग्राउंड द्वारा है. यह एक पीपे में आता है और इसे नक्काशी की जाने वाली प्लेट पर एक ब्रश के जरिये लगाया जाता है. हवा में खुला रखने पर हार्ड ग्राउंड सख्त हो जाता है. कुछ मुद्रक तेल/तारकोल आधारित एस्फाफाल्टम [2] या बिटुमेन का हार्ड ग्राउंड के रूप में उपयोग करते हैं, हालांकि बिटुमेन का इस्तेमाल अक्सर स्टील प्लेटों को जंग से और तांबे के प्लेटों को पुराना होने से बचाने के लिए किया जाता है.

सॉफ्ट ग्राउंड भी तरल रूप में आता है और इसे सुखाया जाता है लेकिन यह हार्ड ग्राउंड की तरह बिलकुल शुष्क नहीं होता है और अपना प्रभाव छोड़ सकता है. सॉफ्ट ग्राउंड को सुखा लिए जाने के बाद मुद्रक इसपर कुछ सामग्रियों का उपयोग कर सकता है जैसे की पत्ते, वस्तुएं, हाथ के प्रिंट और इसी तरह की चीजें जो सॉफ्ट ग्राउंड में छेद कर देती है और इसके नीचे का प्लेट बाहर निकल आता है.

ग्राउंड को पाउडर युक्त रोजिन या स्प्रे पेंट का इस्तेमाल करते हुए एक फाइन मिस्ट में भी लगाया जा सकता है. इस प्रक्रिया को एक्वाटिंट कहते है और यह रंगों के टोन, शैडो और ठोस क्षेत्रों को तैयार करने में मदद करता है.

इसके बाद एक एचिंग सुई या एपक से डिजाइन (उल्टी दिशा में) तैयार किया जाता है. "एचप" प्वाइंट, एक साधारण टेम्पर्ड स्टील की एचिंग सुई से 45-60 डिग्री के कोण पर एक कारबरंडम पत्थर के पीछे घिसकर तैयार किया जा सकता है. "एचप" उसी सिद्धांत पर काम करता है जिससे कि एक फाउन्टेन पेन की लाइन बॉलप्वाइंट की तुलना में कहीं अधिक आकर्षक लगती है: स्वेलिंग में हल्का सा अंतर हाथ की स्वाभाविक हरकत के कारण होता है जो लाइन को "गर्म" कर देता है और हालांकि किसी व्यक्तिगत लाइन में यह शायद ही मिलता है, अंतिम प्लेट पर कुल मिलाकर एक बहुत ही आकर्षक प्रभाव छोड़ता है. इसे एक साधारण सुई के रूप में उसी तरीके से तैयार किया जा सकता है.

इसके बाद प्लेट को पूरी तरह से एक एसिड में डुबाया जाता है जो उजागर की गयी धातु को साफ़ कर देता है. तांबे या जस्ते की प्लेटों पर एचिंग के लिए फेरिक क्लोराइड का प्रयोग किया जा सकता है जबकि नाइट्रिक एसिड का प्रयोग जस्ते या स्टील के प्लेटों पर एचिंग के लिए किया जा सकता है. विशेष प्रकार के घोलों में 2 भाग FeCl3 में 2 भाग पानी और 1 भाग नाइट्रिक में 3 भाग पानी का होता है. एसिड की क्षमता एचिंग प्रक्रिया की गति को निर्धारित करती है.

  • एचिंग की प्रक्रिया को बाइटिंग कहा जाता है (नीचे स्पिट-बाइटिंग को भी देखें).
  • मोमयुक्त प्रतिरोधक एसिड को प्लेट के उन भागों को काटने (बाईटिंग) से रोकता है जिन्हें ढँक दिया गया है.
  • प्लेट जितनी देर एसिड में रहती है "बाईट" उतनी ही गहरी होती है.
एचिंग का उदाहरण

एचिंग की प्रक्रिया के दौरान मुद्रक घोलने की प्रक्रिया में तैयार बुलबुलों और अपरद को हटाने के लिए चिड़िया की पंख या ऐसी ही किसी चीज का उपयोग करते हैं, प्लेट की सतह से या प्लेट को समय-समय पर एसिड के टब में डुबाकर निकाला जा सकता है. अगर बुलबुले को प्लेट पर रहने दिया जाता है तो यह एसिड को प्लेट में कटाई करने से रोक देता है जहाँ पर बुलबुला इसे छूता है. तांबे और स्टील की तुलना में जस्ता कहीं अधिक तेजी से बुलबुले पैदा करता है और कुछ कलाकार अपने प्रिंटों में एक मिकी वे इफेक्ट के लिए एक रोचक गोलाकार बुलबुले-जैसा गोला तैयार करने में इसका उपयोग करते हैं. जिंक और अधिक बुलबुले अधिक तांबे और इस्पात और कुछ कलाकारों की तुलना में तेजी से उत्पादन का उपयोग यह उनका एक आकाशगंगा प्रभाव के लिए प्रिंट के भीतर रोचक दौर बुलबुले की तरह हलकों का निर्माण करने के लिए.

अपरद एक बुकनीदार पिघली हुई धातु है जो नक्काशी किये गए ग्रूव्स को भर देता है और यह एसिड को प्लेट की खुली हुई सतहों में एक सामान तरीके से काटे जाने से रोक देता है. अपरद को प्लेट से हटाने का दूसरा तरीका प्लेट के नक्काशी किये गए हिस्से को नीचे एसिड के अंदर प्लास्टिसिन गेंदों या पत्थर पर रखना है हालांकि इस तकनीक की एक कमी बुलबुलों का बाहर निकल आना और उन्हें तत्काल हटा पाने में अक्षम होना है.

एक्वाटिंटिंग के लिए मुद्रक अक्सर लगभग एक सेंटीमीटर से तीन सेंटीमीटर चौड़े धातु के एक टेस्ट स्ट्रिप का उपयोग करते हैं. स्ट्रिप को एक विशिष्ट संख्या के मिनट या सेकंड तक एसिड में डुबाया जाता है. इसके बाद धातु की इस पट्टी को हटा दिया जाता है और एसिड को पानी से धोकर साफ़ कर दिया जाता है. पट्टी के एक हिस्से को ग्राउंड में ढँक दिया जाएगा और फिर पट्टी को दुबारा एसिड में डुबाया जाएगा और यह प्रक्रिया फिर से दोहराई जायेगी. इसके बाद ग्राउंड को पट्टी से हटा दिया जाएगा और पट्टी पर स्याही डाली जाएगी और प्रिंट किया जाएगा. इससे मुद्रक को नक्काशी की गयी आकृति के अलग-अलग डिग्रियों या गहराई का पता चल जाएगा और इसीलिये स्याही के रंग की क्षमता इस बात पर निर्भर करती है की प्लेट को कितनी देर एसिड में रखा गया है.

प्लेट को एसिड से हटा दिया जाता है और एसिड को हटाने के लिए इसे पानी से धोया जाता है. ग्राउंड को तारपीन जैसे एक विलायक से हटाया जाता है. तारपीन को अक्सर मिथाइल युक्त स्पिरिट्स का उपयोग कर प्लेट से हटाया जाता है क्योंकि तारपीन चिकना होता है और स्याही के प्रयोग एवं प्लेट की प्रिंटिंग को प्रभावित कर सकता है.

स्पिट-बाइटिंग एक ऐसी प्रक्रिया है जिससे मुद्रक प्लेट के कुछ ख़ास क्षेत्रों में एक ब्रश के जरिये प्लेट पर एसिड का प्रयोग करते हैं. इस उद्देश्य के लिए प्लेट को एक्वाटिंट किया जा सकता है या सीधे एसिड के संपर्क में लाया जा सकता है. इस प्रक्रिया को "स्पिट-बाइटिंग" इसलिए कहा जाता है क्योंकि इसमें लार का उपयोग किया जाता है जिसका उपयोग कभी एसिड को डाइल्यूट करने के लिए किया जाता था हालांकि अब आम तौर पर गम अरबिक या पानी का उपयोग किया जाता है.

फेलिसिएन रोप्स द्वारा पोर्नोक्रेटस.एचिंग और एक्वेटिंट

एक प्लास्टिक कार्ड, मैट बोर्ड का एक टुकड़ा या कपड़े का एक गुच्छा अक्सर स्याही को छिन्न लाइनों में प्रवेश कराने के लिए इस्तेमाल किया जाता है. इसके बाद सतह को स्टीफ़ फैब्रिक के एक टुकड़े से साफ़ कर दिया जाता है जिसे टार्लाटैन कहते हैं और फिर इसे न्यूजप्रिंट पेपर से साफ़ कर दिया जाता है, कुछ मुद्रक अपने अंगूठे के आधार पर अपने हाथ या हथेली के ब्लेड भाग का उपयोग करना पसंद करते हैं. सफाई करने से स्याही चीरों में रह जाती है. अंतिम सफाई के लिए आप ओर्गैन्जा रेशम के एक मुड़े हुए टुकड़े का भी इस्तेमाल कर सकते हैं. अगर तांबे या जस्ते की प्लेटों का उपयोग किया जाता है तो प्लेट की सतह बहुत साफ हो जाती है और इसीलिये यह प्रिंट में सफेद होता है. अगर स्टील के प्लेट का प्रयोग किया जाता है तो प्लेट के स्वाभाविक दांत प्रिंट को एक्वाटिंटिंग के प्रभाव के सामान एक चिकनी पृष्ठ भूमि देते हैं. इसके परिणाम स्वरुप स्टील प्लेटों को एक्वाटिंटिंग की जरूरत नहीं होती है क्योंकि एसिड में लगातार डुबाये जाने पर प्लेट का क्रमिक अनावरण वही परिणाम देगा.

कागज का एक नम टुकड़ा प्लेट पर रखा जाता है और इसे प्रेस के माध्यम से चलाया जाता है.

गैर-विषाक्त एचिंग[संपादित करें]

एसिड और सॉल्वैंट्स के स्वास्थ्य संबंधी प्रभावों के बारे में बढ़ती चिंताएं [3] [4] एचिंग के कम जहरीले तरीकों के विकसित होने का कारण बना[5] 20वीं सदी के अंत में. कोटिंग के लिए एक प्रारंभिक आविष्कार हार्ड ग्राउंड के रूप में फ्लोर वैक्स का उपयोग था. मार्क जैफ्रौन और कीथ हावर्ड जैसे अन्य मुद्रकों ने ग्राउंड के रूप में एक्रिलिक पॉलीमर और एचिंग के लिए फेरिक क्लोराइड का उपयोग करने वाली प्रणालियाँ विकसित की. पॉलिमरों को सॉल्वैंट्स की बजाय सोडियम कार्बोनेट (धुलाई का सोडा) से हटाया जाता है. एचिंग के लिए इस्तेमाल किये जाते समय फेरिक क्लोराइड एसिड की तरह एक संक्षारक गैस पैदा नहीं करता है, इस प्रकार परंपरागत एचिंग का दूसरा खतरा दूर हो जाता है.

परंपरागत एक्वाटिंट, जो पाउडर युक्त रेजिन या एनामेल स्प्रे पेंट का उपयोग करता है, इसकी जगह पर ऐक्रेलिक पॉलीमर हार्ड ग्राउंड के एक एयरब्रश एप्लीकेशन का उपयोग होता है. साथ ही, सोडा ऐश घोल के अतिरिक्त किसी भी सॉल्वैंट की आवश्यकता नहीं होती है, हालांकि एयर ब्रश स्प्रे के एक्रिलिक सामग्रियों के कारण एक एक वेंटिलेशन हुड की जरूरत होती है.

परम्परागत सॉफ्ट ग्राउंड, जिसमें प्लेट से हटाने के लिए सॉल्वैंट्स की आवश्यकता होती है इसकी जगह जल-आधारित रिलीफ प्रिंटिंग स्याही का प्रयोग होता है. स्याही परम्परागत सॉफ्ट ग्राउंड की तरह छापों को प्राप्त करती है, फेरिक क्लोराइड एचैंट का प्रतिरोध करती है, इसके बावजूद इसे गर्म पानी और सोडा ऐश घोल या अमोनिया से साफ किया जा सकता है.

औद्योगिक प्रक्रियाओं में एनोडिक एचिंग का उपयोग एक सदी से भी अधिक समय से किया जा रहा है. एचिंग पावर डाइरेक्ट करेंट का एक स्रोत है. नक्काशी की जाने वाली सामग्री (एनोड) को इसके धनात्मक ध्रुव से जोड़ दिया जाता है. एक रिसीवर प्लेट (कैथोड) इसके ऋणात्मक ध्रुव से जुड़ा होता है. दोनों को थोड़ा अलग-अलग रखा जाता है और इसे एक उपयुक्त इलेक्ट्रोलाइट के एक उपयुक्त जलीय घोल में डुबाया जाता है. बिजली मेटल को एनोड से बाहर निकालकर घोल में धकेलती है और इसे धातु के रूप में कैथोड पर जमा करती है. 1990 से कुछ ही समय पहले स्वतंत्र रूप से काम करने वाले दो समूहों [6][7] ने इंटैग्लियो प्रिंटिंग प्लेटों को तैयार करने में इसके उपयोग के अलग-अलग तरीके विकसित किये.

मैरियोन और ओमरी बेहर द्वारा आविष्कृत पेटेंटशुदा इलेक्ट्रोटेक प्रणाली में [8][9] एचिंग के कुछ ख़ास गैर-विषाक्त तरीकों के विपरीत एक नक्काशी की गयी प्लेट पर जितनी बार कलाकार चाहे उतनी बार दुबारा काम किया जा सकता है.[10][11][12][13] यह प्रणाली 2 वोल्ट से कम बिजली का इस्तेमाल करती है जो नक्काशी किये गए हिस्सों में धातु के असमान क्रिस्टलों को उजागर करती है जिसका परिणाम स्याही का उत्कृष्ट प्रतिधारण होता है और जिसकी मुद्रित छवि के स्वरुप की गुणवत्ता पारंपरिक एसिड विधियों के समानांतर होती है. न्यूनतम वोल्टेज के विपरीत ध्रुवीयता मेजोंटिंट प्लेट के साथ-साथ "स्टील फेसिंग"[14] तांबे की प्लेटें तैयार करने का एक अपेक्षाकृत सरल तरीका प्रदान करता है.

फोटो-एचिंग[संपादित करें]

चित्र:Monserratecastle.jpg
मोंसेरेट पैलेस, नथानिएल न्गुयेन द्वारा एचिंग 1975-वर्तमान

प्रकाश के प्रति संवेदनशील पॉलीमर प्लेटें फोटोरियलिस्टिक एचिंग की अनुमति देती हैं. प्लेट पर प्लेट सप्लायर या कलाकार द्वारा एक फोटो-सेंसिटिव कोटिंग का प्रयोग किया जाता है. इसे उजागर करने के लिए एक निगेटिव इमेज के रूप में प्लेट पर प्रकाश को केंद्रित किया जाता है. फोटोपॉलीमर प्लेटों को प्लेट निर्माताओं के निर्देशों के अनुसार या तो गर्म पानी में या फिर अन्य रसायनों में डालकर धो दिया जाता है. प्लेट पर से अंतिम छवि को अलग करने के लिए एचिंग से पहले फोटो-एच इमेज के क्षेत्रों को स्टॉप्ड-आउट किया जा सकता है या एक बार प्लेट को नक्काशी किये जाने के बाद स्क्रेपिंग या बर्निशिंग के जरिये इसे हटाया या हल्का कर दिया जाता है. एक बार जब फोटो- एचिंग की प्रक्रिया पूरी हो जाती है तो प्लेट को एक सामान्य इंटैग्लियो प्लेट के रूप में ड्राई प्वाइंट, अगली एचिंग, एनग्रेविंग आदि के लिए काम में लाया जा सकता है. अंतिम परिणाम एक ऐसे इंटैग्लियो प्लेट के रूप में होता है जिसे किसी अन्य की तरह उपयोग किया जा सकता है.

मेटल प्लेटों के प्रकार[संपादित करें]

तांबा हमेशा से एक परम्परागत मेटल रहा है और इसे एचिंग के लिए आज भी पसंद किया जाता है क्योंकि यह एक सामान तरीके से कटाई करता है, बनावट को अच्छी तरह धारण करता है और साफ़ किये जाते समय स्याही के रंग को नष्ट नहीं करता है. जस्ता तांबे से सस्ता है इसीलिये शुरुआत करने वालों के लिए बेहतर है, लेकिन यह तांबे की तरह उतनी सफाई से काट नहीं पाता है और यह स्याही के कुछ रंगों को बदल देता है. एचिंग सब्सट्रेट के रूप में स्टील की लोकप्रियता बढ़ रही है. तांबा और जस्ता की कीमतों ने स्टील को एक स्वीकार्य विकल्प बना दिया है. स्टील की लाइन गुणवत्ता तांबे से कुछ कम अच्छी होती है लेकिन यह जस्ते की तुलना में बेहतर है. स्टील एक प्राकृतिक और उन्नत एक्वाटिंट है.

औद्योगिक उपयोग[संपादित करें]

एचिंग का उपयोग मुद्रित सर्किट बोर्डों और अर्धचालक उपकरणों के विनिर्माण में (देखें एचिंग (माइक्रोफैब्रिकेशन)), कांच पर और सूक्ष्मदर्शीय अवलोकन के लिए धातु के नमूने तैयार करने में भी किया जाता है.

एसिड के प्रभावों का नियंत्रण[संपादित करें]

हार्ड ग्राउंड[संपादित करें]

सड़क के दृश्य के साथ कैफे में युवा लड़की, लेसर उरी द्वारा एचिंग 1861-1931

मुद्रकों के लिए एसिड के प्रभावों को नियंत्रित करने के कई तरीके हैं. सबसे आम तौर पर प्लेट की सतह को एक सख्त, मोमयुक्त "ग्राउंड" से कवर कर दिया जाता है जो एसिड का प्रतिरोध करता है. इसके बाद मुद्रक एक नुकीले प्वाइंट से ग्राउंड को खुरचता है जिससे धातु की वे लाइनें उजागर हो जाती हैं जिनपर एसिड का दुष्प्रभाव पड़ा है.

एक्वाटिंट[संपादित करें]

एक्वाटिंट एक ऐसा बदलाव है जिसमें एक ख़ास रेजिन को प्लेट पर एक सामान तरीके से बाँट दिया जाता है, फिर इसके बाद एक यूनिफॉर्म लेकिन सटीक घनत्व से कम एक स्क्रीन ग्राउंड तैयार करने के लिए इसे गर्म किया जाता है. एचिंग के बाद कोई भी उजागर सतह एक खराब (यानी काली) सतह में बदल जाती है. वैसे क्षेत्र जो अंतिम प्रिंट में हल्के होते हैं उन्हें एसिड बाथ के बीच वार्निशिंग द्वारा संरक्षित किया जाता है. लगातार वार्निशिंग की प्रक्रिया दोहराने और प्लेट को एसिड में रखने से ऐसे टोन वाले क्षेत्र तैयार हो जाते हैं जिसे एक मोमयुक्त ग्राउंड में ड्रॉइंग के जरिये प्राप्त करना मुश्किल या असंभव होता है.

सुगर लिफ्ट और स्पिट बाईट इफेक्ट का उदाहरण

शुगर लिफ्ट[संपादित करें]

इसमें चीनी या कैम्प कॉफी के एक सीरप जैसे घोल में मौजूद डिजाइनों को इसके एक तरल एचिंग ग्राउंड या "स्टॉप आउट" वार्निश में लेप किये जाने से पहले धातु की सतह पर पेंट किया जाता है. बाद में जब प्लेट को गर्म पानी में रखा जाता है तो चीनी घुल जाती है और इमेज को छोड़ कर बाहर निकल आती है. इसके बाद प्लेट पर नक्काशी की जा सकती है.

स्पिट बाइट[संपादित करें]

स्वच्छ एसिड और गम अरबी का एक मिश्रण (या लगभग कभी नहीं - लार) जिसे दिलचस्प परिणाम देने के लिए एक धातु की सतह पर टपकाया, बिखेरा या पेंट किया जा सकता है.

कार्बोग्राफ[संपादित करें]

यह एक अमेरिकी मुद्रक रैंड ह्यूब्श द्वारा 2006 में आविष्कार की गयी एक एचिंग तकनीक है. कार्बोरंडम ग्रिट के छोटे-छोटे कणों को एसिड-प्रतिरोधी ग्राउंड में मिलाया जाता है जिसे हमेशा की तरह नंगी धातु पर ब्रश किया जाता है और सूखने के लिए छोड़ दिया जाता है. जब वह मिश्रण सूख जाता है तो प्लेट पर मेटल स्टाइलस का प्रयोग किया जाता है और इस तरह कुछ धूल कणों को हटा दिया जाता है, जिससे की तांबे के मामूली क्षेत्र एसिड में उजागर हो जाएं और नक्काशी की जा सके, अंततः वे मुद्रण प्रक्रिया के लिए स्याही को पकड़ लेते हैं. इस प्रकार कागज पर बनी इमेज की बनावट चारकोल की ड्राइंग के समान होती है.

मुद्रण[संपादित करें]

प्लेट पर प्रिंटिंग सतह को स्याही से कवर करते हुए की जाती है, इसके बाद टार्लाटन कपड़े या न्यूजप्रिंट से सतह पर लगी स्याही को रगड़ कर हटाया जाता है, जिससे स्याही रफ किये गए क्षेत्रों और लाइनों में रह जाती है. गीले पेपर को प्लेट पर रखा जाता है और दोनों को एक प्रिंटिंग प्रेस में डालकर संचालित किया जाता है; दबाव पेपर को स्याही के संपर्क में लाता है और इमेज स्थानांतरित हो जाता है (सी.एफ़. चाइने-कोले). दुर्भाग्य से यह दबाव प्लेट में मौजूद इमेज को कुछ हद तक खराब भी कर देता है, खराब किये गए क्षेत्रों को चिकना करते हुए और लाइनों को बंद करते हुए; तांबे की प्लेट कहीं बेहतर होती है जिससे कलाकार द्वारा इस खराबी को बहुत अधिक समझे जाने से पहले एक अच्छी तरह से नक्काशी की गयी इमेज के कई सैकडे प्रिंट लिए जा सकते हैं. वैसी स्थिति में कलाकार प्लेट को हाथों से एक बार फिर से नक्काशी करके दुबारा तैयार कर सकता है, अनिवार्य रूप से ग्राउंड को पीछे कर और उनकी लाइनों को दुबारा तलाशकर; वैकल्पिक तौर पर प्रिंटिंग से पहले सतह की सुरक्षा के लिए एक सख्त धातु से प्लेटों को इलेक्ट्रो-प्लेट का स्वरुप दिया जा सकता है. जस्ते का भी इस्तेमाल किया जाता है क्योंकि एक नरम धातु के रूप में नक्काशी किये जाने का समय छोटा होता है, हालांकि यह नरमी प्रेस में इमेज के तेजी से खराब होने का भी कारण बनती है.

त्रुटियाँ[संपादित करें]

फॉक्स-बाइट या "ओवर-बाइटिंग" एचिंग में आम है और यह एसिड की कम मात्रा का प्रभाव है जो ग्राउंड से होकर रिस जाती है जिससे सतह पर मामूली दाग और जलन का निशान उत्पन्न हो जाता है. इस आकस्मिक खराबी को सतह की चिकनाई और पोलिश के जरिये दूर किया जा सकता है, लेकिन कलाकार अक्सर फॉक्स-बाइट छोड़ देते हैं या प्लेट का खराब तरीके से उपयोग कर जान-बूझकर इसे छोड़ देते हैं क्योंकि इसे एक प्रक्रिया के एक वांछनीय चिह्न के रूप में देखा जाता है.

एसिड एचिंग में फाउल बाईट का उदाहरण

"एचिंग" से संबंधित मुहावरे[संपादित करें]

"क्या आप यहाँ आकर मेरी एचिंग्स (तस्वीरों) को देखना चाहेंगी?", यह एक रोमांटिक मुहावरा है जिसमें एक पुरुष किसी कलात्मक चीज दिखाने के बहाने एक महिला को अपने स्थान पर बुलाने की कोशिश करता है. यह वाक्यांश होराटियो एलगर, जूनियर के 1891 में पहली बार प्रकाशित "द एरी ट्रेन ब्वाय" नामक एक उपन्यास में मौजूद कुछ मुहावरों का एक अपभ्रंश है. एल्गर 19 वीं सदी में विशेष रूप से युवाओं के लिए एक बेहद लोकप्रिय लेखक थे और उनकी पुस्तकों को व्यापक रूप से उद्धृत किया गया था. पुस्तक के अध्याय XXII में एक महिला अपने ब्वायफ्रेंड को लिखती है "मेरे पास एचिंग्स का एक नया संग्रह है जो मैं तुम्हें दिखाना चाहती हूँ. क्या तुम एक ऐसी शाम के बारे में नहीं बताओगे जब तुम कॉल कर सको क्योंकि मैं यह सुनिश्चित कर लेना चाहती हूँ कि जब तुम वास्तव में आओ तो मैं घर में निश्चित रूप से मौजूद रहूँ." तब वह ब्वायफ्रेंड वापस लिखता है "इसमें कोई शक नहीं है कि मुझे एचिंग्स की जाँच कर खुशी होगी जिससे तुम्हें कॉल करने की एक प्रेरणा मिली है." इसका संदर्भ जेम्स थर्बर के कार्टून में दिया गया था जहां एक आदमी एक बिल्डिंग लॉबी में एक महिला को कहता है: "तुम यहीं रुको और मैं एचिंग्स को नीचे लेकर आता हूँ."[15] इसके अलावा डैशियेल हैमेट के 1934 के उपन्यास द थिन मैन में, जहाँ लेखक अपनी पत्नी को जवाब देता है जो उस महिला के बारे में पूछती है जिसके साथ वह सैर के लिए गया था, "वह मुझे सिर्फ कुछ फ्रेंच एचिंग्स दिखाना चाहती थी."[16]

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

  • इलेक्ट्रोएचिंग
  • हिस्ट्री ऑफ मेथड के लिए ओल्ड मास्टर प्रिंट्स
  • एसिड टेस्ट (सोना)

संदर्भ[संपादित करें]

  1. http://www.cairnsregionalgallery.com.au/ed-artiststudio.pdf
  2. http://expositions.bnf.fr/bosse/grand/207.htm
  3. http://expositions.bnf.fr/bosse/grand/209.htm
  4. http://expositions.bnf.fr/bosse/grand/210.htm
  5. [1]
  6. Behr, Marion; Behr, Omri (1991), "Environmentally safe Etching", Chem Tech 21 (#4): 210- 
  7. Semenoff, Nick; C. Christos (1991), "Using Dry Copier Toners in Intaglio and Electro-Etching of metal Plates", Leonardo (The MIT Press) 24 (#4): 389–394, doi:10.2307/1575513, http://jstor.org/stable/1575513 
  8. Behr, Marion & Omri Behr, "Electrolytic etching process and apparatus therefor.", US The voltage should be adjustable to operate accurately within a rather narrow voltage range, such that the minimum voltage shall be at least that of the ionization potential of the metal object in the electrolyte chosen and the maximum shall not substantially exceed the sum of the decomposition voltage of the aqueous electrolyte and the over-voltage of the cathode selected. 5102520, issued 04.07.1992
  9. Behr, Omri & Marion Behr, "Method and apparatus for producing etched plates for graphic printing", US 5112453, issued 05.12.1992
  10. Behr, Marion; Behr, Omri (1993), "Etching and Tone Creation Using Low-Voltage Anodic Electrolysis", Leonardo 26 (#1): 53- 
  11. Behr, Marion (1993), "Electroetch, a safe etching system", Printmaking Today 3 (#1): 18- 
  12. Behr, Marion (1995), "Electroetch II", Printmaking Today 4 (#4): 24- 
  13. Behr, Marion; Behr, Omri (1998), "Setting the record straight", Printmaking Today 7 (4): 31–32 
  14. Behr, Omri (1997), "An improved method for steelfacing copper etching plates", Leonardo (The MIT Press) 30 (#1): 47, doi:10.2307/1576375, http://jstor.org/stable/1576375 
  15. http://www.cartoonbank.com/1930s/You-wait-here-and-Ill-bring-the-etchings-down/invt/106061
  16. हैमेट, डेशियल, दी थिन मैन , (1934) इन फाइव कंप्लीट नॉवेल्स, न्यूयॉर्क: एवेनल बुक्स, 1980, पी. 592.

बाह्य कड़ियाँ[संपादित करें]

साँचा:Decorative arts