धौलपुर
| धौलपुर | |||||||
| — शहर — | |||||||
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| समय मंडल: आईएसटी (यूटीसी+५:३०) | |||||||
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| जिला | धौलपुर | ||||||
| जनसंख्या | 92,137 (2001 के अनुसार [update]) | ||||||
| क्षेत्रफल • ऊँचाई (AMSL) |
• 177 मीटर (581 फी॰) |
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विभिन्न कोड
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| आधिकारिक जालस्थल: http://dholpur.nic.in/ | |||||||
निर्देशांक: धौलपुर राजस्थान का एक छोटा सा शहर है। यह धौलपुर जिले में आता है। धौलपुर विशेष रूप से बलुआ पत्थर के लिए जाना जाता है। यहां बनाई जाने वाली अधिकतर इमारतों का निर्माण इन बलुआ पत्थरों से ही किया जाता है। धौलपुर में कई मंदिर, किले, झील और महल है जहां घूमा जा सकता है।
[संपादित करें] इतिहास
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धौलपुर एक पुराने ऐतिहासिक शहर के रूप में जाना जाता है। पहले इस जगह को धवलपुरी के नाम से जाना जाता था। धवल देओ शासन के बाद इस शहर का निर्माण किया गया। इस शहर का निर्माण होने के बाद इस जगह को धौलपुर के नाम से जाना जाने लग। 846 ईसवीं में यहां चौहान राजवंश्ा ने शासन किया था।
[संपादित करें] पर्यटन स्थल
[संपादित करें] लसवारी-
लसवारी एक ऐतिहासिक स्थल है। इसी स्थान पर लार्ड लेक ने दौलत राव सिंधिया की हत्या की थी। इसके अलावा यहां पुराना मुगल गार्डन, दमो जल प्रपात और कानपुर महल भी हैं। यह सभी जगह लसवारी की खूबसूरत जगहों में से है। दमोह् सरमथुरा से २ किमि कि दुरि पर है।यह एक सुन्दर जल प्रपात है। इसकी ऊचाई ३०० फेएत है। सरमथुरा का महाकालेश्वर मन्दिर प्रसिध है। मन्दिर से ५०० मीतर दूर सन्त आसाराम जी का आशरम है।
[संपादित करें] शेरगढ़ किला
यह किला धौलपुर से पांच किलोमीटर की दूरी पर चम्बल नदी के किनार स्थित है। इसे किले का निर्माण जोधपुर नरेश मालदेव ने 1532 ई. के आसपास करवाया था। इसके बाद इस किले का पुन: निर्माण करवाया गया। दोबारा इस किले को शेरशाह सूरी ने बनावाया था। इसीलिए इस किले का नाम शेरगढ़ किला रखा गया।
[संपादित करें] खानपुर महल
इस किले का निर्माण मुगल शासन के दौरान शाहजहां ने करवाया था। इस महल की खूबसूरत बनावट पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करती है।
[संपादित करें] शिव मंदिर
यह एक ऐतिहासिक मंदिर है। इस मंदिर में की गई वास्तुकला काफी खूबसूरत है। यह शिव मंदिर ग्वालियर-आगरा मार्ग पर स्थित है। इसे चौपङा मंदिर कहते है।
[संपादित करें] मच्छकुंड
अगर आप धौलपुर आएं तो मच्छकुंड अवश्य घूमें। इस कुंड का नाम राजा मच्छ कुंड के नाम पर रखा गया। यह कुंड काफी पुराना है। मच्छ कुंड सूर्यवंशी वशं के 24वें राजा थे। ऐसा माना जाता है कि राजा मच्छ कुंड यहां पर सो रहे थे। उसी समय राक्षस काल दमन भगवान कृष्ण का पीछा करते हुए यहां पहुंच गए और उन्होंने गलती से मच्छ कुंड को जगा दिया था। तब से यह स्थान धार्मिक स्थल के रूप में भी जाना जाता है। इस स्थान के आस-पास ऐसी कई जगह है जिसका निर्माण मुगल सम्राट अकबर ने करवाया था। मच्ह्कुन्द को राजस्थान के तईरथो का भान्जा कहा जाता है। * राकेश नायक
[संपादित करें] रामसागर अभ्यारण
यह अभ्यारण धौलपुर से 34 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यह अभ्यारण रामसागर झील का एक हिस्सा है। इस झील में मगरमच्छ के साथ मछलियों एवं सांपों की प्रजातियां देखी जा सकती है। इसके अतिरिक्त पानी में रहने वाली पक्षी जैसे जलकौवा, बत्तख आदि भी देख सकते हैं। bari ke pas me he
[संपादित करें] तालाब-ए-शाही
यह जगह धौलपुर से 40 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। तालाब-ए-शाही काफी खूबसूरत एवं ऐतिहासिक झील है। इस झील का निर्माण शाहजहां ने 1617 ईसवी में करवाया था। इस झील को देखने के लिए काफी संख्या में पर्यटक यहां आते हैं।
वन विहार वन्य जीव अभ्यारण्य- यह अभ्यारण शहर से 18 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यह अभ्यारण धौलपुर शासक का सबसे पुराना वन्य जीव अभ्यारण है। इसका क्षेत्रफल करीबन 59.86 वर्ग किलोमीटर है। वन विहार विंध्यन पठार पर स्थित है। तालब अ शाहई का निर्मान साले खान ने करवायया जो सह्जहा का जागेईदार था
- राकेश नायक
[संपादित करें] उद्योग और व्यापार
इस नगर में रेलवे कार्यशाला तथा उद्योगों में हथकरघा-गलीचा बुनाई व कांच का सामान बनाने की इकाइयां शामिल हैं।
[संपादित करें] जनसंख्या
2001 की जनगणना के अनुसार धौलपुर नगर की कुल जनसंख्या 92,137 है; और धौलपुर ज़िले की कुल जनसंख्या 9,82,815 है।
[संपादित करें] आवागमन
- हवाई मार्ग
सबसे नजदीकी एयरपोर्ट आगरा में है। आगरा से धौलपुर की दूरी 60 किलोमीटर है।
- रेल मार्ग
रेल मार्ग द्वारा धौलपुर से दिल्ली 230 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।
- सड़क मार्ग
सड़क मार्ग द्वारा भरतपुर से धौलपुर 113 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।
[संपादित करें] सन्दर्भ
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[संपादित करें] बाहरी कड़ियां
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