धुआँसा

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लॉस एंजेल्स में १९५४ के आसपास हाईलैण्ड पार्क ऑप्टिमिस्टिक क्लब भोज पर स्मॉग-गैस मास्क पहने हुए

स्मॉग (अंग्रेज़ी: Smog) जिसे हिंदी में धुआँसा या धूम कोहरा कहते हैं, वायु प्रदूषण की एक अवस्था है। बीसवीं सदी के प्रारंभ में एक मिश्र शब्द स्मॉग (स्मोक+फॉग=स्मॉग) द्वारा धुएँ और कुहासे की मिश्रित अवस्था को इंगित किया गया।[1] धूल, धुआँ और कुहासा का मिश्रित शब्द स्वरूप ही हिंदी में धुआँसा कहलाता है।[2] गाड़ियों और औद्योगिक कारखानों से निकले धुएँ में उपस्थित राख, गंधक व अन्य हानिकारक रसायन जब कुहरे के संपर्क में आते हैं तब धुआँसे के रूप में वायु प्रदूषण जनित अनेकों बीमारियों का कारण बन जाते हैं।[3]

इतिहास[संपादित करें]

स्मॉग पद का सर्वप्रथम प्रयोग करने का श्रेय १९0५ के दौरान डॉ॰ हेनरी अंतोनी देस वॉक्स (Creating Henry Antoine Des Voeux) को दिया जाता है।[4] लोक स्वास्थ्य काँग्रेस की बैठक में धुआँ और कुहासा (Fog and Smoke) नामक पत्र पढ़ते हुए डॉ॰ वॉक्स ने उक्त पद का प्रयोग किया था। लंदन के अखबार डेली ग्राफिक ने २६ जुलाई १९0५ के संस्करण में लिखा कि डॉ॰ वॉक्स ने धुएँ और कुहरे के मिश्रित अवस्था को स्मॉग नाम दिया है।[5] हिंदी में स्मॉग का स्थानापन्न धुआँसा पद का लिखित रूप में सर्वप्रथम प्रयोग करने का श्रेय कथाकार संजीव को दिया जा सकता है।[6]

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. Schwartz Cowan, Ruth (1997). A Social History of American Technology. Oxford University Press. आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰ 978-0-19-504605-2. 
  2. सावधन नीचे आग है
  3. भौतिक भूगोल का स्वरूप, सविन्द्र सिंह, प्रयाग पुस्तक भवन, इलाहाबाद, २०१२, पृष्ठ ५२३, ISBN: ८१-८६५३९-७४-३
  4. Smog
  5. Gaia Piazzesi 2006
  6. सावधान नीचे आग है, संजीव, राधाकृष्ण प्रकाशन प्राइवेट लिमिटेड, २000, पृष्ठ-१२, आईएसबीएन संख्या : ८१ ७११९ ५७४ १

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]