धान की भूसी का तेल
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धान की भूसी का तेल, धान के जर्म (अंकुराणु) एवं अन्दर की भूसी से निकाला जाता है। इसका धूम्र बिन्दु बहुत अधिक है (254 °C) जिसके कारण इसका प्रयोग उच्च-ताप पर भोजन बनाने के लिये किया जाता है। बहुत से एशियाई देशों में इसका प्रयोग पाचक-तेल (कुकिंग आयल) जैसे किया जाता है।
धान की भूसी में अनेक प्रकार की वसायें (फैट) पाये जाते हैं जिसमें से ४७% मोनोसचुरेटेड, ३३% पॉलीसैचुरेटेड, तथा २०% सैचुरेटेड होते हैं। धान की भूसी में वसीय अम्लों की उपस्थिति निम्न सारणी में दी गयी है-
| वसीय अम्ल | प्रतिशत |
|---|---|
| Palmitic | 15.0% |
| Stearic | 1.9% |
| Oleic | 42.5% |
| Linoleic | 39.1% |
| Linolenic | 1.1% |
| Arachidic | 0.5% |
| Behenic | 0.2% |