धरती का वीर योद्धा पृथ्वीराज चौहान

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Dharti Ka Veer Yodha Prithviraj Chauhan
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Intertitle of "Dharti Ka Veer Yodha Prithviraj Chauhan"
फॉर्मैट Historical Drama
सर्जनकर्ता Sagar Arts
निर्देशित Noel Smith, Krishnakant Pandey and Manish Singh
अभिनय See Below
शीर्षक गीत "Dharti Ka Veer Yodha Prithviraj Chauhan" by Unknown
मूल देश Flag of India.svg भारत
भाषा(एं) Hindi
अंक संख्या Total 345
निर्माण
निर्माता Moti Sagar, Meenakshi Sagar and Akash Sagar
संपादक Dipendra Singh Vatsa
रनिंग समय 24 minutes
प्रसारण
मूल चैनल STAR Plus
चित्र फॉर्मैट 576i (SDTV),
मूल प्रसारण May 12, 2006 – March 15, 2009
बाहरी सूत्र
आधिकारिक जालस्थल

धरती का वीर योद्धा पृथ्वीराज चौहान एक टेलीविजन कार्यक्रम था जो भारतीय टेलीविजन चैनल स्टार प्लस पर प्रसारित सागर आर्ट्स द्वारा प्रारंभ किया गया जिन्होंने पहले रामायण, महाभारत और हातिम टेलीविजन शृंखला शुरू किया है। यह हिंदी टीवी धारावाहिक मध्यकालीन भारतीय इतिहास के सबसे मशहूर हिन्दू राजाओं में से एक राजा पृथ्वीराज चौहान, उसका प्रारम्बिक जीवन, उसके साहसिक कार्य, राजकुमारी संयोगिता के लिए उसका प्रेम की कहानी को दर्शाता है। ज्यादातर यह प्रारम्बिक हिंदी/अपभ्रंश कवी चन्दवरदाई का महाकाव्य पृथ्वीराज रासो, से आता है लेकिन निर्माताओं ने इस प्रेम कथा को दर्शाने के लिए बहुत अधिक छुट ली है। यह मोहक गाथा मार्च 15, 2009 को दुखद अंत के साथ समाप्त हुआ।

अनुक्रम

कथावस्तु[संपादित करें]

हथियार. वह योद्धा राजा कहलाया जाता था। जब वह दिल्ली के सिंहासन पर आरोह किया, उसने यहाँ किला राइ पिथोरा बनवाया. उसका पूरा जीवन लगातार साहस का शृंखला, वीरता, नम्र एवं सहृदयतापूर्ण व्यवहार और महान कार्यों का है। उसने महाबली भीमदेव, गुजरात का शासक, को केवल उम्र तेरह में हराया .

उसके दुश्मन, जैचंद की बेटी, संयोगिता के साथ उसकी प्रेम कहानी बहुत प्रसिद्द है। उसके 'स्वयंवर' क दिन वह उसे लेकर फरार हुआ था।

उसने अपना साम्राज्य को बढाया, इस दौरान मोहम्मद घोरी ने 1191 में भारत पर आक्रमण किया और तराइन के पहले युद्ध में उसे हरा दिया .अगले वर्ष, 1192 में, घोरी सेना प्रथ्विराज को तराइन के दूसरे युद्ध में चुनौती देने लौट आई.सुल्तान मुहम्मद शाहब-उद-दिन घोरी भारत के तरफ एक बड़ी बल संख्या 120,000 के साथ बड़ा. . जब वह लाहोर पहुंचा, उसने अपने दूत को पृथ्वीराज चौहान का समर्पण का अधिकार माँगने भेजा, लेकिन पृथ्वीराज चौहान ने पालन करने से इनकार किया। पृथ्वीराज चौहान तब अपने साथी राजपूत प्रमुखों को मुस्लिम आक्रमण के खिलाफ अपने मदद के लिए एक औपचारिक सहायता की मांग रखता है। करीब 150 राजपूत प्रमुखों ने उसके अनुरोध में अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की.

पृथ्वीराज भी एक बड़ी सेना के साथ आया था, एक बड़ा हिस्सा जिसमे भारतीय युद्ध के लिए हाथियाँ शामिल थे और उसके साथ तराइन में सुल्तान मुहम्मद शाहब-उद-दिन घोरी को मिलने आगे बड़ा फिर से हराने के उम्मीद के साथ, जहाँ एक साल पहले उसने अपने विरोधी को बुरी तरह हराके कष्ट पहुँचाया था, सुल्तान मुहम्माद घोरी ने पृथ्वीराज को एक अंतिम चेतावनी दी की वह मुस्लिम बने या हार जाये . पृथ्वीराज ने विरोध में एक प्रस्ताव रखा कि मुहम्मद युद्ध विराम समझे, उसे अपने सेना के साथ वापसी क़ी अनुमति दे. सुल्तान मुहम्मद शाहब-उद-दिन घोरी ने हमला करने का फैसला किया।

घोरी ने अपने सैनिकों को पांच भागों में विभाग किया और राजपूत सैनिकों पर दिन के समय से पहले हमला किया धनुर्धारी घुड़सवारों क़ी तरंगों को हमला करने भेजा राजपूत सैनिकों पर, लेकिन वापसी क़ी जैसे राजपूत हाथी व्यूह आगे बड़े.

शाम के बाद नहीं लड़ने का राजपूत परंपरा का फायदा उठाके उसने राजपूत सेना पर हमला करके उन्हें हराया. इसके बाद क्या होता है वहाँ का स्थानीय लोकसंगीत से स्पष्ट है जो अभी भी राजस्थान में प्रमुख है। कहा जाता है कि पृथ्वीराज को उनके राज कवी सह दोस्त, चान्दभार के साथ अफ़घानिस्तान ले जाया गा था। घोरी के अदालत में, पृथ्वीराज और चांदभर को बंधन में लाया गया था। पृथ्वीराज को तीरंदाजी की कला दिखाने के लिए कहा गया था, जिसमें वह उद्देश्य और ध्वनि सुनकर बस निशाना लगा सकता है। इसे शब्दभेदी- बाण भी कहा जाता है। घोरी ने उसे इस कला को दिखाने को कहा. खेल को खुद के लिए दिलचस्प बनाने के लिए, उसने अपने आँखों को गर्म लोहे के धातु से छेद करवाया. चांदभर कहते है,"एक राजा, भले ही एक कैदी हो, एक राजा से ही आदेश प्राप्त कर सकता है। इसलिए यह एक सम्मान होगा अगर आप उसे "निशाना लगाने का आदेश दे". तब वह कुछ श्लोक या कविता कहता है, उन पंक्तियों में से कुछ थे,"चार बांस चौबीस गज, अंगुल अष्ट प्रमाण, ताऊ पर सुल्तान है मत चुको चौहान।". चार बांस मतलब चार बाम्बू के छड़ी, चौबीस गज लगबग 24 गज, आंगल अष्ट प्रवान मतलब आट उँगलियों जितनी चौड़ाई. यह सब एक साथ हर दृष्टि से घोरी का सिंहासन पर बैठने का स्थान बता देता अर्थात चार बांस उंच छड़ी,24 गज दूरी पर और पूरी आट उंगलियाँ ऊपर घोरी बैठा था। "आगे बड़ो ओ चौहान और उद्धेश चूकना नहीं". पृथ्वीराज इस तरह घोरी को उसीके अदालत में मारता है और स्पष्ट रूप से अपनी मौत को दावत है।[1 ]

[संपादित करें] दिल्ली के सिंहासन पर बैठने चौहान वंश के अंतिम शासक, पृथ्वीराज चौहान, अजमेर के राजा सोमेश्वर चौहान, के बेटे के रूप में 1165 में पैदा हुए. वह एक अत्यंत प्रतिभावान बच्चा था और सैनिक कौशल सिखने में बहुत तेज़ था। सिर्फ आवाज़ के आधार पर लक्ष्य को मारने क़ी कुशलता उसमे थी। तेरह वर्ष के उम्र में, 1178 में, जब उनके पिता युद्ध में मारे गए वह अजमेर सिंहासन का उत्तराधिकारी बना. अनंगपाल उसकी माँ का पिता, दिल्ली के शासक, उसकी बहादुरी और साहस के बारे में सुनने के बाद उसे दिल्ली के सिंहासन का उत्तराधिकारी घोषित किया। उसने एक बार बिना किसी हतियार के एक शेर को अपने दम पे मारा था। वह एक योद्धा राजा जाना जाता था। जब वह दिल्ली के सिंहासन पर आरोह किया, उसने यहाँ किला राइ पिथोरा बनाया. उसका पूरा जीवन लगातार साहस, वीरता, सहृदय कर्म और महान कारनामों की एक सतत श्रंखला थी। शक्तिशाली भीमदेव, गुजरात का शासक, को उसने मात्र तेरह वर्ष के उम्र में हराया.

अपने दुश्मन, जैचंद क़ी बेटी, संयोगिता के साथ उसकी प्रेम कहानी बहुत प्रसिद्द है। उसके "स्वयंवर" के दिन वह उसे लेकर फरार हुआ।

उसने अपना साम्राज्य को बढाया, इस दौरान मोहम्मद घोरी ने 1191 में भारत पर आक्रमण किया और तराइन के पहले युद्ध में उसे हरा दिया .अगले वर्ष, 1192 में, घोरी सेना प्रथ्विराज को तराइन के दुसारे युद्ध में चुनौती देने लौट आई.सुल्तान मुहम्मद शाहब-उद-दिन घोरीभारत के तरफ एक बड़ी बल संख्या 120,000 के साथ बड़ा. जब वहलाहोर पहुंचा, उसने अपने दूत को पृथ्वीराज चौहान का समर्पण का अधिकार माँगने भेजा, लेकिन पृथ्वीराज चौहान ने उसे पालन करने से इनकार किया। पृथ्वीराज चौहान तब अपने साथीराजपूत प्रमुखों को मुस्लिम आक्रमण के खिलाफ अपने मदद के लिए एक औपचारिक सहायता की मांग रखता है। करीब 150 राजपूत प्रमुखों ने उसके अनुरोध में अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त क़ी.

पृथ्वीराज भी एक बड़ी सेना के साथ आया था, एक बड़ा हिस्सा जिसमे भारतीय युद्धहाथियाँ शामिल और उसके साथ तराइन में सुल्तान मुहम्मद शाहब-उद-दिन घोरी को मिलने आगे बड़ा फिर से हराने के उम्मीद के साथ, जहाँ एक साल पहले उसने अपने विरोधी को बुरी तरह हराके कष्ट पहुँचाया था, सुल्तान मुहम्माद घोरी ने पृथ्वीराज को एक अंतिम चेतावनी दी की वह मुस्लिम बने या हार जाये . पृथ्वीराज ने विरोध में एक प्रस्ताव रखा कि मुहम्मद युद्ध विराम समझे, उसे अपने सेना के साथ वापसी क़ी अनुमति दे. सुल्तान मुहम्मद-शहब-उद-दिन घोरीने हमला करने का निर्णय लिया।

घोरी ने अपने सैनिकों को पांच भागों में विभाग किया और राजपूत सैनिकों पर दिन के समय से पहले हमला किया। धनुर्धारी घुड़सवारों क़ी तरंगों को हमला करने भेजा राजपूत सैनिकों पर, लेकिन वापसी क़ी जैसे राजपूत हाथी व्यूह आगे बड़े.

शाम के बाद नहीं लड़ने का राजपूत परंपरा का फायदा उठाके उसने राजपूत सेना पर हमला करके उन्हें हरा दिया. इसके बाद क्या होता है यह स्थानीय लोकसंगीत से स्पष्ट है जो अभी भी राजस्थान में प्रमुख है। कहा जाता है कि पृथ्वीराज को उनके राज कवी सह दोस्त, चांदभर के साथ अफ़घानिस्तान ले जाया गया था। घोरी के अदालत में, पृथ्वीराज और चांदभर को बंधन में लाया गया था। पृथ्वीराज को तीरंदाजी की कला दिखाने के लिए कहा गया, जिसमें वह उद्देश्य और ध्वनि सुनकर बस निशाना लगा सकता है। यह शब्दभेदी-बाण के नाम से भी जाना जाता है। घोरी ने इस कला दिखाने को उसे कहा. खेल को खुद के लिए दिलचस्प बनाने के लिए, वह अपने आँखों को गर्म लोहे की छड़ी से छेद करवाता है चांदभर कहते हैं, "एक राजा, हालांकि एक कैदी के रूप में, एक राजा से ही आदेश प्राप्त कर सकता हैं। इसलिए यह एक सम्मान होगा अगर आप उसे "निशाना लगाने का आदेश देंगे. तब वह कुछ छंद या कविता कहता है, उन पंक्तियों में से कुछ थे,"चार बांस चौबीस गज, आंगल अष्ट प्रवान, मार मार मोटे तो चूक न चौहान". चार बांस का मतलब है चार बाण की छड़ी, चौबीस गज लगबग 24 गज, आंगल अस्त प्रवल मतलब आट उँगलियों जितनी चौड़ाई. यह सब साथ में घोरी अपने सिंहासन पर बैठने का ठीक स्थान को दर्शाता है अर्थात चार बांस छड़ी की ऊंचाई,24 गज की दूरी और ठीक आट उंगली ऊपर घोरी बैठा था। "आगे बड़ो हे चौहान और अपना उद्देश चूको मत". पृथ्वीराज इस तरह घोरी को उसीके अदालत में मारता है और स्पष्ट रूप से अपनी खुद की[1] मौत से मिलता है।

परिणाम[संपादित करें]

राजपूत राज्यों जैसेसरस्वती, सामना, कोहराम और हांसी को घोरी ने बिना किसी कठिनाई से कब्ज़ा किया था और बिना किसी चुनौती के वह अजमेर के ओर बड़ा. हारा हुआ पृथ्वीराज को उसकी राजधानी तक पीछा किया जहाँ उसे बंधी के रूप में, वापस अफ्घनिस्तान लाया गया। सुल्तान मुहम्माद -घोरी ने पृथ्वीराज चौहान के बेटे, कोला, को बख्शा जिसने बदले में घोरी के तरफ वफादारी की शपथ ली.

घोर में एक बंधी के रूप में, पृथ्वीराज को जंजीरों में सुल्तान मुहम्मद घोरी के सामने लाया गया। घोरी पृथ्वीराज को अपनी आँखे नीचे झुकाने की आदेश देता है। लेकिन पृथ्वीराज उसे इनकार करता है और कहा"सच्चा राजपूत अपनी ऑंखें झुकाता है जब वह मरता है".वह सुनने के बाद घोरी घुस्से से आग बबूला हुआ और अपनी आदमियों को पृथ्वीराज को लाल गर्म लोहे की छड़ी से अँधा बनाने की आदेश देता है। कुछ समय बाद घोरी तीरंदाजी प्रतियोगिता का एक व्यवस्था करता है। तब चन्द्रा बार्दी जो घोरी राज्य में कवी के रूप में शामिल हुआ था, उसे कहता है की पृथ्वीराज एक नामची धनुर्धर है जो ध्वनि सुनके अपना निशाना लगा सकता है। घोरी ने वह मानने को इनकार किया। फिर उसने अपने आदमी को पृथ्वीराज को प्रतियोगिता में लाने की आदेश दी.लेकिन चन्द्रा बरड़ी ने घोरी को कहा कि वह निशाना लगाएगा जब घोरी उसे आदेश देगा.क्यों मेरे कहने पर ही, घोरी आश्चर्यचकित हुआ। तब चन्द्रा बरडी ने उत्तर दिया कि वह एक राजा है, और वह एक राजा से ही आदेश लेगा, उसके राजदरबार के सदस्यों से नहीं.यह उसका अहंकार को संतुष्ट करेगा.वास्तव में घोरो को मारने क़ी वह एक रणनीति थी जो चाँद और पृथ्वीराज ने पहले से ही विचार किया था। और घोरी को मारने के बाद उन्होंने एक दूसरे पर प्रहार करना भी तैय था। उसके बाद पृथ्वीराज चौहान को प्रतियोगिता क्षेत्र में लाया गया। चाँद पहले से ही वहाँ था और घोरी को मारने का अधिक सहायता दोहे के रूप में दिया जो सिर्फ पृथ्वीराज समझ सकता था।"चार भाष चौबीस गज अंगुल हस्त प्रमाण, त ऊपर सुल्तान है अब मत चुके चौहान".जैसे ही घोरी ने पृथ्वीराज को निशाना लगाने का आदेश दिया, उसें अपना कमान अपने कान तक खींचा और घोरी को ठीक उसके गले में मारा. मौके पर ही घोरी क़ी मृत्यु हो गयी। पृथ्वीराज ने चीख कर कहा,"मै ने मेरे अपमान का बदला लिया है".और तब चाँद ने पृथ्वीराज पर वार किया और पृथ्वीराज ने चाँद पर वार किया, इस प्रकार वे दुश्मन द्वारा फिरसे बंदी नहीं होंगे.और वीर मौत मरे. जैसे संयोगिता को महसूस होता है कि पृथ्वीराज मर रहा है, वह भी मर जाती है। और हम सभी, सभी प्यारे कलाकार खास करके पृथ्वीराज और संयोगिता को याद करते है।

कलाकार[संपादित करें]

किशोर कलाकार[संपादित करें]

वयस्क व्यक्ति कलाकार[संपादित करें]

  • पुंडीर
  • प्रीत सलूजा ...... समर सिंह
  • शीतल दाभोलकर (0} ... संयोगिता (नयी)

अतिथि कलाकार[संपादित करें]

गीत गीतकार[संपादित करें]

डी क़े वि वाई -पि आर सी शीर्षक गीत[संपादित करें]

पृथ्वीराज चौहान ... ... पृथ्वीराज चौहान ...पृथ्वीराज चौहान ..

आआआअ... धा धा गिन धा किट धा गिन धा ..थीटा क त गदी गना

धरती का वीर योद्धा ....पृथ्वीराज चौहान

मितवा (जुगल)[संपादित करें]

संयोगिता मितवा ....मितवा मुझे क्या हो गया,

मितवा मुझे क्या हो गया,

मै चाहूँ कुछ और,

बोलूं कुछ और,

मै सोचूं कुछ और,

देखूं कुछ और,

मेरा मन क्यों रुकता नहीं,

मेरा मन क्यों रुकता नहीं,

ले जाए मुझे किसी ओर,

ले जाए मुझे किसी ओर,

पृथ्वी:ये रिश्ता अंजाना मुझे अपना सा लगे,

ये जीवन भी अब तो मुझे सपना सा लगे...

ये रिश्ता अंजाना मुझे अपना सा लगे,

ये जीवन भी अब तो मुझे सपना सा लगे,

कभी छुप रहे मन मचाये कभी शोर,

अब मेरे मन पे मेरा क्यों चले नहीं जोर,

मेरा मन क्यों रुकता नहीं,

मेरा मन क्यों रुकता नहीं,

ले जाए मुझे किसी ओर,

ले जाए मुझे किसी ओर

संयोगिता:मितवा...मितवा मुझे क्या हो गया,

मै चाहूँ कुछ और,

बोलूं कुछ और

पृथ्वी:मै सोचूं कुछ और,

देखूं कुछ और

जय जय पृथ्वीराज चौहान (लोक गीत)[संपादित करें]

युद्ध का रूप लिए है धरती,

हो..युद्ध का रूप लिए है धरती

अचरज में हर एक नयन,

छलनी होंगे तन कितने ही,

टूटेंगे कितने ही मन,

किसके भाग्य में क्या है,

इसका निर्णय होना बाकी है,

कौन निराशा का भागी है,

आशा किसकी साथी है,

(गले का किसके हार बनेगी)*2

समय की कैसी माला है,

इक अंजाना साया कोई जैसे डसने वाला है,

(देखने वाले देख के सब कुछ)*2

फिर भी है जैसे अंजान,

(जय जय पृथ्वीराज चौहान)* 6

दुश्मन से लोहा ले देखो,

डटे हुए है रण में वीर,

हिला न पाए पथ से उनको,

हो चाहे भले या तीर,

टूट पड़े है शत्रु पर,

लहराते यूँ बाहों के बल,

भाग रहे है दुश्मन,

चारों ओर मची है एक हलचल

कोई करतब काम न आया (2)

दुश्मन के है होश उड़े,

करके फ़तेह महारथियों पर वो,

चाट रहे है धुल पड़े,

रह जाई उनकी अक्कड़ धरी, (2)

और निकल गया सारा अभिमान,

जय जय पृथ्वीराज चौहान

जय जय पृथ्वीराज चौहान

न आँखों में आंसू[संपादित करें]

महिला स्वर (अकेली):कोई जहाँ में तेरी तरह बेक़रार न हो

खुदा करे के किसी से किसी को प्यार न हो

ओओओओओओ

आ आ आ आ आ ...

(न आँखों में आंसूं

न लैब पे शीखायत)*2

यह किस मोड़ पे हमको लायी है किस्मत

जुदा हमसे खुद हो गयी अपने सारे

जो कल थे अपने वो अब है पराये

न आँखों में आंसूं

न लैब पे शिखायत

(वो जिसने मेरे प्यार को जिंदगी दी

मै उसके लिए दिल पे ह़र गम सहूँगी)*2

मेरा जिस्म होता है हो जाए रुसवा

आ आ आ आ ...

मेरा जिस्म होता है हो जाए रुसवा

मोहब्बत पे इल्जाम आने न दूँगी

अगर टूटता है ये दिल टूट जाए

ना आँखों में आंसूं

ना लैब पे शिकायत

ओम नमः शिवाये[संपादित करें]

पुरुष स्वर (अकेला):(ओम नमः शिवाय)*2

समूहगान (म और प):ओम नमः शिवाय..नमः शिवाय...नमः शिवाय

पुरुष स्वर (अकेला):डमरू पाणि, शूल पाणि,

एय नटराजन नमोह नमोह

समूह (म और प):नमोह नमोह

पुरुष स्वर (अकेला):नमोह नमोह

समूह (म और प):नमोह नमोह

पुरुष स्वर (अकेला):नमोह नमोह

समूह (म और प):नमोह नमोह

पुरुष स्वर (अकेला):शेष नाग, भस्म अंग,

कर तिहारन

समूह (म और प):नमोह नमोह

पुरुष स्वर (अकेला):नमोह नमोह

समूह:नमोह नमोह

पुरुष स्वर (अकेला):नमोह नमोह

समूह:नमोह नमोह

पुरुष स्वर (अकेला):नमोह नमोह

समूह (म और प):डमरू पाणि, शूल पाणि,

एय नटराजन नमोह नमोह

पुरुष स्वर (अकेला):तुम आदि देव अनादी हो,

तुम अंतहीन अनंत हो

समूह (म और प):ओम नमः शिवाय

पुरुष स्वर (अकेला):श्रीमंत हो, भगवंत हो,

हे नाथ गिरिजाकांत हो

समूह (पुरुष):ओम नमः शिवाये

समूह (महिला):नमः शिवाये

पुरुष स्वर (अकेला):(ओम नमः शिवाये)*2

समूह (म और प):ओम नमः शिवाये ..नमः शिवाये...नमः शिवाये

गौरव प्रताप सिंह चौहान से

सर्व मंगल मांगल्ये (संस्कृत श्लोक)[संपादित करें]

सर्व

नि नि नि सा सा सा (सरगम जब पृथ्वी और संयो मिलने वाले)[संपादित करें]

(नि नि नि सा सा सा रे रे रे सा सा सा)*2

(नि सा नि सा रे सा रे सा रे म रे म रे म प)*2

नि नि नि सा सा सा रे रे रे सा सा सा

नि सा नि सा रे सा रे सा रे म रे म रे म प

(फीका पड़ने को दोहराएँ)

कसम प्यार की एय सनम[संपादित करें]

संयोगिता:(कसम प्यार की एय सनम

कभी न जुदा होंगे हम)*2

जुदा होके तुमसे तुम्हारी कसम

तुम्हारी कसम जीना पाएंगे हम

(कसम प्यार की एय सनम

कभी ना जुदा होंगे हम)*2

(मुकालिब हवाओं के दुश्मन जहान

मुहब्बत किसी से भी डरती नहीं)*2

अमर होता है दो दिलों का मिलन

बदन मरते है रूह मरती नहीं

(कसम प्यार की एय सनम

कभी ना जुदा होंगे हम)*2

मेरे नाम की मेहंदी[संपादित करें]

पुरुष स्वर (अकेला):(मेरे नाम की मेहँदी अपने हाथों में लगाये रखना)*2

(मेरे प्यार की बिंदिया अपने माथे पे सजाये रखना)*2

मै डोली लेके आऊंगा तुझे लेके जाऊँगा)*2

समूह (महिला) होए..होए!!

समूह (पुरुष) हुर..उर!

महिला स्वर (अकेली):(तेरे नाम की मेहँदी अपने हाथों में लगाउंगी)*2

(तेरे प्यार की बिंदिया अपने माथे पे सजाऊँगी)*2

(डोली में बैतुंगी पिया तेरे संग में जाउंगी)*2

पुरुष स्वर (अकेला) (मै तेरा हूँ

तू मेरी है

फिर मिलने में

क्यूं देरी है)*2

महिला स्वर (अकेली):मैं तेरी थी

मै तेरी हूँ

बस तेरे लिये

मै बैठी हूँ)*2

समूह (पुरुष):मै डोली लेके आऊंगा तुझे लेके जाऊँगा

समूह (महिला):डोली में बैठूंगी पिया तेरे संग मै जाउंगी

समूह (पुरुष):मै डोली लेके आऊंगा तुझे लेके जाऊँगा

समूह (महिला): डोली में बैठूंगी पिया तेरे संग में जाऊंगी

पुरुष स्वर (अकेला):आ आ आ आ आ ....

मेरे नाम की मेहँदी अपने हाथों में लगाये रखना

मेरे प्यार की बिंदिया अपने माथे पे सजाये रखना

मै डोली लेके आऊंगा तुझे लेके जाऊँगा

महिला स्वर (अकेली):तेरें नाम की मेहँदी अपने हाथों में लगाऊँगी

तेरे प्यार की बिंदिया अपने माथे पे सजाऊँगी

डोली में बैठूंगी पिया तेरे संग मै जाऊंगी

समूह (पुरुष):मै डोली लेके आऊंगा तुझे लेके जाऊँगा

सहगान (महिला):होए ..होए! (पृष्ठभूमि में)

सहगान (पुरुष):मै डोली लेके आऊंगा तुझे लेके जाऊँगा

सहगान (महिला):होए...होए! (पृष्ठभूमि में)

सहगान (महिला):डोली में बैठूंगी पिया तेरे संग जाऊंगी

मेरे नाम की मेहंदी[संपादित करें]

पुरुष स्वर (अकेला):(मेरे नाम की मेहँदी अपने हाथों में लगाए रखना)*2

(मेरे प्यार की बिंदिया अपने माथे पे सजाये रखना)*2

(मै डोली लेके आऊंगा तुझे लेके जाऊँगा)*2

सहगान (महिला)::होए...होए!

सहगान (पुरुष) हूर .. उर:!

महिला स्वर (अकेली):(तेरे नाम की मेहँदी अपने हाथों में लगाऊँगी)*2

(तेरे प्यार की बिंदिया अपने माथे पे सजाऊँगी)*2

(डोली में बैठूंगी पिया तेरे संग में जाऊंगी)*2

पुरुष स्वर (अकेला):(मै तेरा हूँ

तू मेरी है

फिर मिलने में

क्यूँ देरी है)*2

महिला स्वर (अकेली):(मै तेरी थी

मै तेरी हूँ

बस तेरे लिये

मै बैठी हूँ)*2

सहगान (पुरुष):मै डोली लेके आऊंगा तुझे लेके जाऊँगा

सहगान (महिला):डोली में बैठूंगी पिया तेरे संग जाऊंगी

सहगान (पुरुष):मै डोले लेके आऊंगा तुझे लेके जाऊँगा

समूहगान (महिला):डोली में बैठूंगी पिया तेरे संग जाऊंगी

पुरुष स्वर (अकेला):आ आ आ आ आ ...

मेरे नाम की मेहँदी अपने हाथों में लगाए रखना

मेरे प्यार की बिंदिया अपने माथे पे सझाये रखना

मै डोली लेके आऊंगा तुझे लेके जाऊँगा

महिला स्वर (अकेली):तेरे नाम की मेहँदी अपने हाथों में लगाऊँगी

तेरे प्यार की बिंदिया अपने माथे पे सजाऊँगी

डोली में बैठूंगी पिया तेरे संग जाऊंगी

समूहगान (पुरुष):मै डोली लेके आऊंगा तुजे लेके जाऊँगा

समूहगान (महिल):होए...होए! (पृष्ठभूमि में)

समूहगान (पुरुष):मै डोली लेके आऊंगा तुजे लेके जाऊँगा

समूहगान (महिला):होए...होए! (पृष्ठभूमि में)

समूहगान (महिला):डोली में बैठूंगी पिया तेरे संग जाऊँगी

सुन रे मेघा (छोटा संस्करण)[संपादित करें]

पृथ्वी:सुन रे मेघा राही गगन के

जा तू मेरा प्रेम दूत बनके

गोरी से कहियो दुःख मेरे मन के

चिम चिम करे चांदनी

तारा छाये रात महल में फिर भी अँधेरा रे

के डाला यहाँ बिरह ने डेरा रे

संयोगिता:सुन सुन शीतल झोंके पवन के

जा तू मेरा प्रेम दूत बनके

प्रीतम से कहियो दुःख मेरे मन के

न हंसना न बोलना, न कोई साज सिंगार

के उन बिन कछु न सुहावे हो

परदेसी पे की याद सतावे हो

पृथ्वी:म्हारी प्रिया के जैसे किसी पे

रूप की लाली छाई न होगी

चतुर चितराइन उसके जैसे

छवि कोई और बनाई न होगी

में घा रे..ए ..ए..ए..

उसको ढूँढने में कोई कठिनाई न होगी

रिम झिम बूंदों में मेरे

आंसू दीजो बरसाई रे

रिनी मेघा रहूँगा मै तेरा रे

के डाला यहाँ बिरह ने डेरा रे

संयोगिता:महल झरोके में बेकल बैठी

नैन झरोके से झांक रही हूँ

मिलन के दिन तक जीने को मै बिरह का

विष फांक रही हूँ

पवन रे .. ए..ए .. ए ....

अपने आंसूं हंसी में ड़क रही हूँ

जब तक तन में सांस है

तब तक मन में आस

ये पंछी कहीं उड़ ही न जावे हो

परदेसी पि की ओदूं पावे हो

प म ग (सरगम)[संपादित करें]

(प म ग म ग रे नि ग रे सा)*2

(सा नि ध नि ध प म नि ध प)*2

(प म ग म ग रे नि ग रे सा)*2

(नि सा नि सा प)*2

सा नि ध म प म नि सा प

प म ग म ग रे नि ग रे सा

(सा नि ध नि ध प म नि ध प)*2

(प म ग म ग रे नि ग रे सा)*2

ये है प्रेम कहानियां[संपादित करें]

महिला स्वर (अकेली):ये है प्रेम कहानियां

ये वफ़ा की सच्ची निशानियाँ

न भुला सका कभी ये जहान

न मिटा सका कभी आसमान

समूहगान (महिला:(ये प्रेम कहानियां)*4

महिला स्वर (अकेली):ये जवान दिलों की है धड़कने

ये जवान दिलों की है दास्ताँ

ये है प्रेम कहानियाँ

ये वफ़ा की सच्ची निशानियाँ

सहगान (महिला):(ये प्रेम कहानियाँ)*6

पुरुष स्वर (अकेला):ये जवान दिलों की है धड़कने

ये जवान दिलों की है दास्ताँ

ये है प्रेम कहानियाँ

यारों के हम यार[संपादित करें]

प्रथम पुरुष स्वर:हो.ओ.ओ.ओ

दोनों पुरुष स्वर:(यारों के हम यार है यारा

बिगड़े तो तलवार है यारा)*2

पहला पुरुष स्वर:साथ जियेंगे साथ मरेंगे

दूसरा पुरुष स्वर:दुश्मन को बर्बाद करेंगे

दोनों पुरुष आवाज़:हम दोस्ती की शान है प्यारे.ए..ए

यारों के हम यार हैं यारा

बिगड़े तो तलवार है यारा

पहला पुरुष आवाज़:मेरे फौलादी सीने में

यारा धडकता सा इक दिल है

हो .. ओ.इस दिल में बैठी जो दुनिया

उसको भुला देना मुश्किल है

दूसरा पुरुष आवाज़:हो..हो..हो..ओ..ओ

याद बहुत आयेंगे अपने

चल मेरे साथी भूल के सपने

पहला पुरुष आवाज़:अब न कदम ये पीछे हटेंगें

आगे बड़े है आगे बढेंगे

दोनों पुरुष आवाज़:हम दोस्ती के शान है प्यारे..ए..ए..

यारों के हम यार है यारा

बिगड़े तो तलवार है यारा

जंगली बिल्ली[संपादित करें]

सहगान (पुरुष):(हमको पता है)*2

सब कुछ रे तू कितनी मासूम है

हमको पता है

सब कुछ रे तू कितनी मासूम है

जाना तेरा भेद जो है

हमको तो मालूम है

सहगान (महिला):(भेद हमारा जान के तू

क्या करेगा भला)*2

उलटी सीधी बातों के

तीर न तू हमपे चला

सहगान (पुरुष):हमको पता है

सब कुछ रे तू कितनी मासूम है

सहगान (महिला):भेद हमारा जान के तू

क्या करेगा भला

पुरुष आवाज़(अकेला)(पृथ्वी):ओ मेरी जंगली बिल्ली

तुझे ले जाऊं दिल्ली

सहगान (पुरुष):एय मेरी जंगली बिल्ली

तुझे ले जाऊं दिल्ली

महिला आवाज़(अकेली)(संयो):बिगड़े रईस तुझे क्या पता

दिल्ली का ये रास्ता

सहगान (महिला):बिगड़े रईस तुझे क्या पता

दिल्ली का ये रास्ता

पुरुष आवाज़(अकेला)(पृथ्वी):तू हमें समझती ??? (हमस्ती) है क्या

मुझको सब है पता

महिला आवाज़(अकेली)(संयो):जंगल में खो जाएगा

खुद को डूंड न पायेगा

पुरुष आवाज़(अकेला)(पृथ्वी):हिम्मत ये दिखला दूंगा

मार के शेर खिला दूंगा

सहगान (पुरुष):हिम्मत ये दिखला दूंगा

मार के शेर खिला दूंगा

महिला आवाज़(अकेली)(संयो):पानी में चेहरा देख तू अपना

टूटेगा ये तेरा सपना

सहगान (महिला):पानी में चेहरा देख तू अपना

टूटेगा ये तेरा सपना

पुरुष आवाज़(अकेला)(पृथ्वी):ये मेरी तलवार देख

देख इसकी धार देख

महिल आवाज़(अकेली)(संयो):मै तेरी तलवार को

तोड़ मोड़ के रख दूँगी

पुरुष आवाज़(अकेला)(पृथ्वी):नाज़ुक तेरी कलाई है

मोच कहीं न आ जाए

सहगान (महिला):होए..ओए..ओए ..ओए ..

कोरस (पुरुष): होए ..आए ..

सहगान (महिला):होए..ओए ..ओए ..ओए ..

सहगान (पुरुष):होए..आए

सहगान (पुरुष):ओ मेरी जंगली बिल्ली

सहगान (महिला):ओ मेरे बिगड़े रईस

सहगान (पुरुष):ओ मेरी जंगली बिल्ली

सहगान (महिला):ओ मेरे बिगड़े रईस

सहगान (पुरुष):जंगली बिल्ली

सहगान (महिला):बिगड़े रईस

सहगान (पुरुष):जंगली बिल्ली

सहगान (महिला):बिगड़े रईस

सहगान (पुरुष):जंगली बिल्ली

सहगान (महिला):बिगड़े रईस


एय मोहब्बत तेरी हर अदा की सलाम[संपादित करें]

सहगान (महिला):(नि नि नि सा सा सा

रे रे रे सा सा सा सा)*2

महिला आवाज़(अकेली):हर नज़र को दुआ..आ..आ ..आ

(हर नज़र को दुआ

हर वफ़ा को सलाम)*2

(एय मोहब्बत तेरी हर अदा को सलाम)*2

हर नज़र को दुआ

हर वफ़ा को सलाम

एय मोहब्बत तेरी हरा अदा को सलाम

सहगान (महिला):(नि नि नि सा सा सा रे रे रे सा सा सा)*2

(सा रे म सा रे म प)*2

रे सा रे सा रे सा नि प म प नि प म प रे सा

महिला आवाज़(अकेली):(हर नई रुत के लबों पर तराना तेरा

जिंदा हर दौर में है फ़साना तेरा)*2

हर धडकते दिलों में ठिकाना तेरा

ये ज़मीन आसमान ये ज़माना तेरा

सहगान (महिला):आ..आ..आ..

महिला आवाज़(अकेली):(हर कदम पे तेरे नक्षे पाओं को सलाम)*2

(एय मोहब्बत तेरी हर अदा को सलाम)*2

कान्हें रे[संपादित करें]

महिला आवाज़(अकेली)(राधा):कान्हा रे, थोडा सा प्यार दे

चरणों में बैठाके तार दे

पुरुष आवाज़(अकेला)(कान्हा):ओ गोरी, घूंघट उभार दे

प्रेम की भिक्षा झोली में डाल दे

सहगान (महिला):कान्हा रे, थोडा सा प्यार दे

चरणों में बैठाके तार दे

महिला आवाज़(अकेली)(राधा):तू झूठा .. वचन तेरे झूठे

मुस्का के बोली.. राधा को लूटे

पुरुष आवाज (अकेला)(कान्हा):मै भी हूँ सच्चा वचन मेरे सच्चे

प्रीत मेरी पक्की तुम्हारे मन कच्चे

महिला आवाज़(अकेली)(कान्हा):जैसे तू राखे वैसे रहूंगी

दूंगी परीक्षा पीड़ा सहूँगी

स्वर्गों के सुख भी मीठे न लागे

तू मिल जाए तो मोक्ष नहीं मांगे

सहगान (महिला):कान्हा रे, थोडा सा प्यार दे

चरणों में बैठा के तार दे

दूसरा पुरुष आवाज़(अकेला):श्रृष्टि के काण्ड काण्ड में इसका आभास है

सहगान (महिला):(यही महा रास है)*2

दूसरा पुरुष आवाज़(अकेला):हो..ओ..तारों में नर्तन फूलों में उल्लास है

सहगान (महिला):यही महा रास है)*2

दूसरा पुरुष आवाज़(अकेला):मुरली की प्रतिध्वनि दिशाओं के पास है

सहगान (महिला):(येही महा रास है)*2

दूसरा पुरुष आवाज़(अकेला):हो..ओ..आध्यात्मिक चेतना का सब में??? विकास है

सहगान (महिला):(यही महा रास है)*2

सहगान (महिला):(महा रास)*4

दूसरा पुरुष आवाज़(अकेला):(पृष्ठभूमि में महिला सहगान के साथ)(महा रास)*2

दूसरा पुरुष आवाज़(अकेला):(महा रास)*2

धन्य धन्य तुम सखा संजम के लिए)[संपादित करें]

पुरुष आवाज़(अकेला):(मूर्छित पड़े धरती पर पिर्थी)

तन से बहे रक्त की धार

आसमान में गिद्हन टोली

मॉस नोचने को तैयार

मार झपाटा माँस नोचने

गिद्ध वहाँ लागे मंडराए

रुंड में कुछ ही दूरी पर

घायल पड़ा है संजम राइ

(गिद्धा नोचें मॉस मित्र का

ये तो हमसे सहा न जाए)*2

मीत हमारा जनम जनम का

कैसे इसे बचाया जाए

काट -काट फेंकता गिद्धन को

(अपने तन का माँस)*2

मित्र धरम की आन की खातिर

संजम ले अंतिम साँस

(धन्य -धन्य तुम सखा

मीत तुम ही थे संजम राइ)*2

गीत तेरे गूंजेंगे मितवा

दिया एक इतिहास बना

ओओओ..एक मित्र था पृथ्वीराज का

उसका नाम था संजम राइ)*2

(धन्य-धन्य तुम सखा

मीत तुम ही थे संजम राइ)*2

पृष्ठभूमि (पुरुष स्वर अकेला) हो ओ ओ ..ओ..आआ..आ

सुन रे मेघा (मूल लम्बा संस्करण)[संपादित करें]

गायक:पृथ्वी के लिए उदित नारायण और संयोगिता के लिए श्रेया घोषाल

गीतकार: रविन्द्र जैन

संगीत निर्देशक: रविन्द्र जैन

पृथ्वी: सुन रे मेघा राही गगन के

जा तू मेरा प्रेम दूत बनके

गोरी से कहियो दुःख मेरे मन के

चिम चिम चिम कर चांदनी

तारा छाए रात महल में फिर भी अंधेरा रे

के डाला यहाँ बिरह ने डेरा रे

संयोगिता:सुन सुन शीतल झोंके पवन के

जा तू मेरा प्रेम दूत बनके

प्रीतम से कहियो दुःख मेरे मन के

ना हसना ना बोलना, ना कोई साझ सिंगार

के उन बिन कछु ना सुहावे हो

परदेसी पे की याद सतावे हो

पृथ्वी :म्हारी प्रिया के जैसी किसी पे

रूप की लाली छायी न होगी

चतुर चितराइन उसके जैसी

छवि कोई और बनाई न होगी

मेघा रइ.. ए..ए..ए..

उसको ढूँढने में कोई कठिनाई न होगी

रिम झिम बूंदों में मेरे

आंसू दीजो बरसाई

रिनी मेघा रहूँगा मै तेरा रे

के डाला यहाँ बिरह ने डेरा रे

संयोगिता:महल झरोंके में बेकल बैठी

नैन झरोके से झाँक रहीं हूँ

मिलन के दिन तक जीने को मैं बिरह का

विष फाँक रही हूँ

पवन रे .. ए..ए..ए..

अपने आँसूं हसीं में ढक रही हूँ

जब तक तन में साँस है

तब तक मन में आस

ये पंछी कही उड़ ही ना जावे हो

परदेसी पि की ओढूँ पावे हो

संयो:साजन आवन कह गयो

कर गयो कोल नीक

गंद्ता गंद्ता ढस गयी

म्हारी आँगन दियारी रेख

पृथ्वी:दूर नहीं वो दिन के जब

ले जाऊँगा तोए

साँचे प्रेमी का वचन

झूठा कभी ना होए

संयो:सूती तो रंग महल म़ा

सूती मै आयो वे जान्जद

भँवर थने सपने में देख्या हो

पृथ्वी:सपना सच हो जाएगा

एक होंगे दो प्राण

मिलेगी जब भाग की रेखा हो

राज दुल्हारे (मूल संस्करण लम्बा)[संपादित करें]

गायक: साधना सरगम

गीतकार: रविन्द्र जैन

संगीत निर्देशक: रविन्द्र जैन

स्त्री स्वर (अकेली) हो..ओ..ओ..हो. ओ.ओ

हम्म ..म..म..म..

राज दुल्हारे सो जा

रैना भई रे

अँखियों के तारे सो जा

रैना भई रे

नखराली निंदिया मानेगी ना कहना

नैनों के द्वारे से जो मुड़ गयी रे..ए..ए.

राज दुल्हारे सो जा

(रैना भई रे)*2

सो जा मेरे प्यारे सो जा

रैना भई रे

संगीत

ममता के आँचल की

तू ओढ़ ले शीतल छाया

निंदिया के हाथों से

लेले सपनों की माया

जाग के तुझको सछ करने है

सपने कई रे ..ए..ए..

राज दुल्हारे सो जा

रैना भई रे

हो. ओ .. ओ.

सो जा मेरे प्यारे सो जा

रैना भई रे

संगीत

कल तुझको बनना है

इस पृथ्वी का रखवाला

रखवालों को मिलता

कहाँ अवसर सोने वाला

आयु के साथ

बढेगी उलझन नई नई रे..ए.

राज दुल्हारे सो जा

रैना भई रे

अखियों के तारे सो जा

रैना भई रे

नखराली निंदिया मानेगी ना कहना

नैनों के द्वारे से जो मुड गई रे ..ए..ए..

राज दुल्हारे सो जा

(रैना भई रे)*2

सो जा मेरे प्यारे सो जा

रैना भई रे

भम भम भोले[संपादित करें]

गायक: सुशील शर्मा, बाबुल सुप्रियो और सहगान

गीतकार:रविन्द्र जैन

संगीत निर्देशक: रविन्द्र जैन

पहला पुरुष स्वर (अकेला) एंड सहगान (पुरुष):(भम भम भोले)*4

सदाशिव भम भम भोले

उमापति भम भम भोले

दयालु भम भम भोले

कृपालू भम भम भोले

पहला पुरुष स्वर (अकेला):(जय भोलेनाथ

तेरे जोडूँ मै हाथ

मेरा इतना काम बना दे)*2

(जिसे दूंढ़ रहा हूँ मेले में)*2

अकेले में उस से मिला दे मिला दे

सहगान (पुरुष):(भम भम भोले)*2

पहला पुरुष स्वर (अकेला):भम भम भोले

सहगान (पुरुष):(भम भम भोले)*2

दूसरा पुरुष स्वर (अकेला):क्या करेगा अकेले में मिल के

सहगान (पुरुष):क्या करेगा अकेले में मिल के

पहला पुरुष स्वर (अकेला):ह्म्म्म .. नैनों से नैन मिलाऊँगा

दूसरा पुरुष स्वर (अकेला):अच्छा

सहगान (पुरुष):फिर

पहला पुरुष स्वर (अकेला):फिर उसको निकट बिठाऊंगा

दूसरा पुरुष स्वर (अकेला):अच्छा

सहगान (पुरुष):फिर

पहला पुरुष स्वर (अकेला):प्यार के हाथ बढ़ाऊंगा

दूसरा पुरुष स्वर (अकेला) और सहगान (पुरुष):फिर

पहला पुरुष स्वर (अकेला):पल भर को चुप हो जाऊँगा

दूसरा पुरुष स्वर (अकेला):ओ ...

सहगान (पुरुष) फिर..फिर

पहला पुरुष स्वर (अकेला):फिर कहूँगा वो बात

जिसे सुनाने के साथ गोरी

हाँ में सर को हिला दे

जय भोलेनाथ

तेरे जोडूँ मै हाथ

मेरा इतना काम बना दे

(जिसे ढूँढ रहा हूँ मेले मै)*2

अकेले में उस से मिला दे मिला दे

सहगान (पुरुष):(भम भम भोले)*4

ब्रह्मा धर शशि धर

नागेश्वर भस्मेश्वर

डमरू धर गौरी वर

नमः शिवाये

पहला पुरुष स्वर (अकेला):ओम नमः शिवाये

सहगान (पुरुष):ओम नमः शिवाये

पहला पुरुष स्वर (अकेला):भोले कोई तुझसे धन माँगे

पहला पुरुष स्वर (अकेला), दूसरा पुरुष स्वर (अकेला) और सहगान (पुरुष):धन माँगे

दूसरा पुरुष स्वर (अकेला) और सहगान (पुरुष):घर माँगे

पहला पुरुस स्वर (अकेला):और कोई पुत्र रतन माँगे

पहला पुरुष स्वर (अकेला), दूसरा पुरुष स्वर (अकेला) और सहगान (पुरुष):रतन माँगे

सहगान (पुरुष):रतन माँगे

पहला पुरुष स्वर (अकेला):कोई स्वर्ग का इन्द्र भवन माँगे

दूसरा पुरुष स्वर (अकेला) और सहगान (पुरुष):पर सबको तू देता मन माँगे

पहला पुरुष स्वर (अकेला):ये प्रेम का रोगी..इ..इ..

रूप का जोगी..इ..इ..

मन मोहिनी के दर्शन माँगे

पहला पुरुष स्वर (अकेला):और सहगान (पुरुष):दर्शन माँगे

सहगान (पुरुष):दर्शन माँगे

पृष्ठभूमि (पहला पुरुष स्वर अकेला):अलक निरंजन

पहला पुरुष स्वर (अकेला):हो..ओ..ओ..

गोरी के देस आया

बदल के भेस मेरा

सोया भाग जगा दे..ए..ए..

सहगान (पुरुष):जय भोलेनाथ तेरे जोड़ें हम हाथ बाबा

इतना काम बना दे

दूसरा पुरुष स्वर (अकेला):जिसे ढूँढ रहा ये मेले मै

ओ .. जिसे ढूँढ रहा ये मेले मै

अकेले मै उस से मिला दे मिला दे

सहगान (पुरुष):(भम भम भोले)*2

पहला पुरुष स्वर (अकेला):भम भम भोले

सहगान (पुरुष):(भम भम भोले)*2

सदाशिव भम भम भोले

उमापति भम भम भोले

दयालु भम भम भोले

कृपालू भम भम भोले

पृष्ठभूमि (दूसरा पुरुष स्वर अकेला):भोले..ए..ए..

भम भम भोले

पहला पुरुष स्वर (अकेला):भोले मुझ पर कृपा लुटा दे

शिवरात्रि की सफल बना दे

तुझे आज मिली तेरी गोरी

मेरी गोरी से मुझको मिला दे

सहगान (पुरुष):भम भम भोले

पहला पुरुष स्वर (अकेला):सदाशिव

सहगान (पुरुष):भम भम भोले

पहला पुरुष स्वर (अकेला):उमापति

सहगान (पुरुष):भम भम भोले

पहला पुरुष स्वर (अकेला):दयालु

सहगान (पुरुष):भम भम भोले

पहला पुरुष स्वर (अकेला):कृपालु

सहगान (पुरुष):(बहम भम भोले)*2

पहला पुरुष स्वर (अकेला):(जय भम भम भोले)*2

भम भोले ...ए!

ओ विधाता[संपादित करें]

गायक: साधना सरगम, रूप कुमार राठौड़ और सहगान

गीतकार: रविन्द्र जैन

संगीत निर्देशक: रविन्द्र जैन

सहगान (पुरुष और महिला):ओ ओ ओ ...

जय जी ब्रह्मा श्रृष्टि कर्ता

वेद वक्ता नमाम्यहम

पुरुष स्वर (अकेला) और सहगान (पुरुष):पुष्कर वाले ब्रह्मा

खम्मा घणी खम्मा

पृष्ठभूमि (सहगान-महिला):आ..आ..आ..आ..आ..

सहगान (पुरुष):पुष्कर वाले ब्रह्मा

खम्मा घणी खम्मा

पृष्ठभूमि (सहगान-महिला): आ..आ..आ..आ..आ..

पुरुष स्वर (अकेला):जगत पिता की

पुरुष स्वर (अकेला) और सहगान (महिला):जय

पुरुष स्वर (अकेला):श्रृष्टि कर्ता की

पुरुष स्वर (अकेला) और सहगान (महिला):जय

पुरुष स्वर (अकेला):कष्ट हर्ता की

पुरुष स्वर (अकेला) और सहगान (महिला):जय

पुरुष स्वर (अकेला):बोलो ब्रह्मा की

पुरुष स्वर (अकेला) और सहगान (महिला):जय

स्त्री स्वर (अकेली):ओओओ..ओओ..ओओ ..ओओ ..ओओओ

पुरुष स्वर (अकेला):(ओ विधाता)*2

विधाता

ओ विधाता

सारा जग है भिखारी

ये सारा जग है भिखारी

बस तू ही एक दाता

महिला स्वर (अकेली):(ओ विधाता)*2

विधाता

ओ विधाता

तेरे द्वार से कोई

हो .. ओ.. तेरे द्वार से कोई

निराश नहीं जाता

दोनों (पुरुष और स्त्री):(ओ विधाता)*2

विधाता

ओ रे विधाता

पुरुष स्वर (अकेला):कोई मुझसे बड़ा कँगाल नहीं

और तुझसा दीन दयाल नहीं

सहगान (पुरुष और महिला):दाता तुझसा दीन दयाल नहीं

पुरुष स्वर (अकेला):जिसे जगत पिता है हाल कर ना सके

ऐसा कठिन तो मेरा सवाल नहीं

सहगान (पुरुष और महिला):ऐसा कठिन तो मेरा सवाल नहीं

पुरुष स्वर (अकेला):कुल दीपक जला दे

स्त्री स्वर (अकेली):अँधियारे को मिटा दे

दोनों (पुरुष और स्त्री):वेल वंश की बड़ा दे

फल उसपे लगा दे

पुरुष स्वर (अकेला):(राजा बनके सवारी)*2

यहाँ झोली फैलाता

स्त्री स्वर (अकेली):(ओ विधाता)*2

विधाता

ओ विधाता

तेरे द्वार से कोई

हो .. ओ.

स्त्री स्वर (अकेली) और सहगान (महिला):तेरे द्वार से कोई

निराश नहीं जाता

दोनों (पुरुष और स्त्री)(अकेले):(ओ विधाता)*2

विधाता

ओ रे विधाता

सहगान (पुरुष):पुष्कर वाले ब्रह्मा

खम्मा घणी खम्मा

पृष्ठभूमि (सहगान-महिला):आ..आ..आ..आ..आ..

सहगान (पुरुष):पुष्कर वाले ब्रह्मा

खम्मा घणी खम्मा

पृष्ठभूमि (सहगान-महिला):आ..आ..आ..आ..आ..

स्त्री स्वर (अकेली):भोले देदे थारे चरना री धूल रे

दाता बक्श दे मारी भूल रे

सहगान (महिला):दाता बक्श दे मारी भूल रे

पृष्ठभूमि (अकेली स्त्री स्वर):हो..ओ..ओ..

स्त्री स्वर (अकेली):म्हारी अर्ज करले क़ुबूल रे

सूने आन्गन्दिये खिलादे एक फूल रे

सहगान (महिला):सूने आन्गन्दिये खिलादे एक फूल रे

पुरुष स्वर (अकेला):वो जो पिता पिता बोले

हो वो जो पिता पिता बोले

स्त्री स्वर (अकेली):जो पुकारे माता माता

(ओ विधाता) * 2

पुरुष स्वर (अकेला) और सहगान (पुरुष):विधाता

ओ विधाता

पुरुष स्वर (अकेला):सारा जग है भिखारी

दोनों (पुरुष और स्त्री-अकेले) और सहगान (पुरुष और महिला):ये सारा जग है भिखारी

बस तू ही एक दाता

दोनों (पुरुष और स्त्री)(अकेले):विधाता

ओ विधाता

विधाता

ओ रे विधाता

पुरुष स्वर (अकेला):पुष्कर वाले ब्रह्मा

खम्मा घणी खम्मा

सहगान (पुरुष):पुष्कर वाले ब्रह्मा

खम्मा घणी खम्मा

पृष्ठभूमि (सहगान-महिला):आ..आ..आ..आ..आ..

पुरुष स्वर (अकेला):जगत पिता की

पुरुष स्वर (अकेला) और सहगान (महिला):जय

पुरुष स्वर (अकेल०;सृष्टी करता की

पुरुष स्वर (अकेला) और सहगान (महिला):जय

पुरुष स्वर (अकेला):कष्ट हर्ता की

पुरुष स्वर (अकेला) और सहगान (महिला):जय

पुरुष स्वर (अकेला):बोलो ब्रह्मा की

पुरुष स्वर (अकेला) और सहगान (महिला):जय

पुरुष स्वर (अकेला) और सहगान (पुरुष):पुष्कर वाले ब्रह्मा

खम्मा घणी खम्मा

पृष्ठभूमि (सहगान-महिला):आ..आ..आ..आ..आ..

सहगान (पुरुष):पुष्कर वाले ब्रह्मा

खम्मा घणी खम्मा

पृष्ठभूमि (सहगान-महिला):आ..आ..आ..आ..आ..

मिट्टी[संपादित करें]

गायक: सुरेश वाडकर

गीतकार: रविन्द्र जैन

संगीत निर्देशक: रविन्द्र जैन

पुरुष स्वर (अकेला):(बस यही से रही सदा मिट्टी)*2

(एक दिन होगा हर गड़ा मिट्टी)*2

(एक दिन खुदबखुद ये होना है)*2

(तू तो मिट्टी में मत मिला मिट्टी)*2

रौन्धता है कुम्हार मिट्टी को)*2

(उसको रौन्धेगी देखना मिट्टी)*2

(जाने कितनी दफा मिले बिछड़े)*2

(आग पानी फलक हफा मिट्टी)*2

(अपने अन्दर छुपाये बैठी है)*2

(सारी दुनिया का फलसफा मिट्टी)*2

(हमने जिसको अजीज तर जाना)*2

(सबसे पहले वो दे गया मिट्टी)*2

(रंग और नसल की तमीज गलत)*2

(आदमी असल में है क्या मिटटी)*2

(कैसी मुद्रापरस्त है दुनिया)*2

(मार के पाती है मर्तिबा मिटटी)*2

(कोई पूछे फकीर से पगले)*2

(काहे मिटटी पे मल रहा है मिट्टी)*2

(जिस्म हमको दिया है मिट्टी)*2

(मांगलेगी दिया हुआ मिट्टी)*2

बस यही दे रही सदा मिट्टी

(एक दिन होगा हर गड़ा मिट्टी)82

वो था पृथ्वीराज चौहान

गायक: शाहिद मल्लिया और सहगान

गीतकार: डॉ॰ सोहन शर्मा

संगीत निर्देशक: गौरव इस्सार

पुरुष स्वर (अकेला):कट कट कट कट ठेगा बाजे हेय

हो!

कट कट कट कट तेगा बाजे

छमक छमक बाजे तलवार

सहगान (पुरुष और महिला):आ..आ..आ..आ..

पुरुष स्वर (अकेला):बेचत धारी है पृथ्वी की

जय पार्ती की मारक धार

कट कट कट कट तेगा बाजे

छमक छमक बाजे तलवार

बेचत धारी हाई पृथ्वी की

जय पार्ती की मारत धार

एक विशाल महा गाथा ये..ए..ए..

पृष्ठभूमि (महिला): हो ओ .. ओ.. ओ.

पुरुष स्वर (अकेला):एक विशाल महा गाथा ये

शब्द भेद का करे बखान

(प्रेम शौर्य का उसका जीवन)*2

वो था पृथ्वीराज चौहान

पृष्ठभूमि (महिला): हो ओ .. ओ.. ओ.

पुरुष स्वर (अकेला) और सहगान (पुरुष और महिला):(वो था पृथ्वीराज चौहान)*4

पुरुष स्वर (अकेला):कट कट कट कट तेगा बाजे..ए..ए..

कट कट कट कट तेगा बाजे

छमक छमक बाजे तलवार

बेचत धारी हाई पृथ्वी की

जय पार्ती की मारक धार

एक विशाल महा गाथा ये

शब्द भेद का करे बखान

प्रेम शौर्य का उसका जीवन

वो था पृथ्वीराज चौहान

सहगान (पुरुष और महिला):(वो था पृथ्वीराज चौहान)*8

पृष्ठभूमि (पुरुष स्वर)(अकेला):हो ओ.. एय ..य..ओ..य

उल्लेख[संपादित करें]

  1. क्योंकि यह लेख धारावाहिक के बारे में है, इस धारावाही ने क्या दिखाया यह अपने में नियंत्रित रखना दूसरा कुछ उल्लेख बिलकुल नहीं

बाह्य संपर्क[संपादित करें]