धनुस्तम्भ

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धनुस्तंभ
टिटनेस
वर्गीकरण एवं बाह्य साधन
Opisthotonus in a patient suffering from tetanus - Painting by Sir Charles Bell - 1809.jpg
Muscular spasms in a patient suffering from tetanus. Painting by Sir Charles Bell, 1809.
आईसीडी-१० A33.-A35.
आईसीडी- 037, 771.3
डिज़ीज़-डीबी 2829
मेडलाइन प्लस 000615
ईमेडिसिन emerg/574 
एम.ईएसएच D013742

धनुस्तंभ (अंग्रेज़ी: Tetanus / टिटेनस) एक संक्रामक रोग है, जिसमें कंकालपेशियों को नियंत्रित करने वाली तंत्रिका-कोशिकाएँ प्रभावित होतीं हैं। कंकालपेशियों के तंतुओं (फाइबर) के लम्बे समय तक खिंचे रह जाने से यह अवस्था प्रकट होती है। यह रोग मिट्टी में रहनेवाले बैक्टीरिया से घावों के प्रदूषित होने के कारण होती है। इस बैक्टीरिया को बैक्टीरियम क्लोस्ट्रीडियम कहा जाता है। यह मिट्टी में लंबी अवधि तक छेद बना कर दीमक के समान रह सकता है। जब कोई घाव इस छेदनुमा घर में रहनेवाले दीमक रूपी बैक्टीरिया से प्रदूषित होता है, तो टेटनस बीमारी पैदा होती है। जब ये बैक्टीरिया सक्रिय होकर तेजी से बढ़ने लगते हैं और मांसपेशियों को प्रभावित करनेवाला जहर पैदा करने लगते हैं, तो टेटनस का संक्रमण फैलता है। टेटनस बैक्टीरिया पूरे वातावरण में, आमतौर पर मिट्टी, धूल और जानवरों के मल में पाया जाता है। हमारे शरीर में बैक्टीरिया के प्रवेश के रास्ता आमतौर पर फटे हुए घाव होता है, जो जंग लगी कीलों, धातु के टुकड़ों या कीड़ों के काटने, जलने या त्वचा के फटने से बनता है।

लक्षण[संपादित करें]

300px\धनुस्तम्भ (टेटेनस) से ग्रसित नवजात शिशु
  • सामान्य टेटनस शरीर की संरचना की सभी मांसपेशियों को प्रभावित कर सकती है। यह सबसे सामान्य और सभी चार प्रकार में सबसे गंभीर है,
  • स्थानीय टेटनस बैक्टीरिया से संक्रमित घाव के आसपास की मांसपेशियों को प्रभावित करता है,
  • सिफेलिक टेटनस में शुरुआत में चेहरे की मांसपेशियां तेजी से प्रभावित होती हैं (एक से दो दिन में)। यह आमतौर पर सिर पर चोट या कान में संक्रमण के कारण होता है,
  • नीयोनेटल टेटनस सामान्य टेटनस जैसा ही होता है, लेकिन यह एक माह से कम उम्र के शिशुओं (जिन्हें नीयोनेट कहा जाता है) को प्रभावित करता है। विकसित देशों में यह स्थिति बहुत कम होती है।

कारण[संपादित करें]

  • इस बीमारी के लिए जिम्मेदार क्लोस्ट्रीडियम टेटानी नामक बैक्टीरिया है। बैक्टीरिया दो स्वरूप में पाये जाते हैं: दीमक या गुणक कोशिका, जो तेजी से बढ़ते हैं।
  • दीमक के स्वरूप वाला बैक्टीरिया मिट्टी, धूल या जानवरों के मल में रहता है और कई वर्षों तक जीवित रह सकता है। दीमक रूपी बैक्टीरिया भीषण तापमान भी सह लेते हैं,
  • टेटनस बैक्टीरिया से, घावों का संक्रमित होना आम बात है। टेटनस हालांकि तभी होता है, जब बैक्टीरिया प्रजनन करते हैं और सक्रिय कोशिका बन जाते हैं,
  • सक्रिय कोशिकाएं दो तरह के जहर, टेटानोलाइसिन और टेटानोस्पैसमिन पैदा करते हैं। टेटानोलाइसिन का काम स्पष्ट नहीं है, लेकिन टेटानोस्पैसमिन ही बीमारी के लिए जिम्मेदार है,
  • यह बीमारी चोट के कारण फटी हुई त्वचा से शुरू होती है। अधिकांश मामलों में त्वचा के कटने या छिलने के कारण त्वचा में पैदा हुई दरार से ही बीमारी शुरू होती है,
  • टेटनस से संक्रमित हो सकनेवाले अन्य घावों में शामिल हैं:
    • शल्य चिकित्सा
    • पिसे हुए घाव
    • छिलना
    • शिशु जन्म और
    • दवा के प्रयोक्ता (सूई के प्रवेश की जगह)
  • मृत उतकों के घाव, जैसे जलना या पिसना या बाहरी तत्वों के घाव में प्रवेश से टेटनस का खतरा बढ़ जाता है।

उन लोगों को भी टेटनस हो सकता है, जिन्हें इसका टीका नहीं पड़ा हो या जो लोग इसकी बूस्टर खुराक नहीं ले रहे हों।

लक्षण[संपादित करें]

सामान्य टेटनस निम्न लक्षण प्रदर्शित करता है:

  • खुजली, मांसपेशियों में खिंचाव, सूजन, कमजोरी या निगलने में कठिनाई सामान्य रूप से देखा गया है,
  • अक्सर चेहरे की मांसपेशियां सबसे पहले प्रभावित होती हैं। जबड़ों की जकड़न या ट्रिसमस आम बात है। यह स्थिति चबाने के लिए जरूरी मांसपेशियों में आयी जकड़न के कारण पैदा होती है,
  • मांसपेशियों की जकड़न लगातार आगे बढ़ती है और पीठ की मांसपेशियों में दर्द होता है, जिसे ओपीस्थोटोनस कहते हैं। मांसपेशियों की जकड़न इतनी भयानक होती है कि इससे हड्डियां टूट सकती हैं और जोड़ हिल सकते हैं,
  • गंभीर अवस्था में बोलने और सांस लेने की नली में जकड़न होती है,
  • सीफैलिक टेटनस में जबड़े के जकड़ने के अलावा चेहरे की कम से कम एक मांसपेशियों में कमजोरी होती है। दो-तिहाई मामलों में इससे सामान्य टेटनस विकसित होता है,
  • स्थानीय टेटनस में घाव की जगह के आसपास की मांसपेशियों में जकड़न पैदा होती है। यह स्थिति आगे चल कर सामान्य टेटनस में बदल सकती है,
  • नीयोनेटल टेटनस सामान्य टेटनस के जैसा ही है। अंतर केवल इतना है कि यह नवजात शिशुओं को प्रभावित करता है। इससे नवजात बेचैन हो जाते हैं और उन्हें चूसने और निगलने में कठिनाई होती है,

बचाव[संपादित करें]

  • टीकाकरण द्वारा टेटनस से पूरी तरह बचाव संभव है: 1920 के दशक में शुरू किया गया टेटनस टॉक्सॉयड सबसे सुरक्षित साबित हुआ है। टेटनस टॉक्सॉयड में निष्क्रिय टेटनस टॉक्सीन को रसायनों और ताप के प्रभाव में लाकर उसके जहरीले प्रभाव को कम किया जाता है, लेकिन इसके एंटीजिनिक प्रभाव को बरकरार रखा जाता है,
  • टेटनस टॉक्सॉयड किसी भी टीके के रूप में आमतौर पर आसानी से उपलब्ध है। इसे शिशुओं के आरंभिक टीकाकरण के लिए डिप्थेरिया टॉक्सॉयड और पर्टूसिस वैक्सीन (डीटीपी) और बड़ों तथा बच्चों के टीकाकरण के लिए कम किये हुए डिप्थेरिया टॉक्सॉयड (टीडी) के साथ मिलाया जा सकता है।
  • वयस्कों के आरंभिक टीकाकरण के लिए चार से छह सप्ताह के अंतराल पर टेटनस टॉक्सॉयड की दो खुराक दी जाती है, जबकि छह से 12 महीने बाद तीसरी खुराक। हर 10 साल पर बूस्टर खुराक की सिफारिश की जाती है, ताकि शरीर में जहर रोधी स्तर बना रहे,

50 या उससे अधिक उम्र के वयस्कों में टीकाकरण की सिफारिश की जाती है, क्योंकि हाल के दिनों में इस आयुवर्ग में टेटनस के कई मामले सामने आये हैं। इन लोगों में टेटनस की आशंका अधिक होती है:

  • जो लोग इस बात को लेकर सुनिश्चित नहीं रहते कि उन्हें बूस्टर की आरंभिक खुराक मिली है या नहीं,
  • गर्म और नम वातावरण वाले बाहरी देशों में जानेवाले,
  • धूल या गोबर की खाद के बीच काम करनेवाले खेतिहर मजदूर,
  • जो लोग ऐसा काम करते हैं, जिसमें कटने या छिलने का खतरा रहता है।
  • वैसी गर्भवती महिलाएँ, जिन्हें टीका नहीं दिया गया हो या अपर्याप्त टीका दिया गया हो या जो स्वच्छ माहौल में प्रसव नहीं करती हैं। टीकाकरण के बाद निरोधी तत्व गर्भाशय के द्रव (प्लेसेंटा) के माध्यम से मां से शिशु में चले जाते हैं।