द लास्ट लीफ

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"द लास्ट लीफ"
लेखक ओ हेनरी
देश Flag of the United States.svg संयुक्त राज्य अमेरिका
भाषा अंग्रेज़ी
शैली लघुकथा
प्रकाशन द ट्रिमड लैम्प एंड अदर स्टोरीज
प्रकाशन तिथि 1907

"द लास्ट लीफ" (अंग्रेज़ी: The Last Leaf, हिन्दी: अन्तिम पत्ता) ओ हेनरी द्वारा रचित एक लघु कथा है। ग्रीनविच गाँव में में रहने वाले पात्रों और विषयों के बारे में इसमें बताया जाता है जैसा ओ हेनरी की कृतियों में पाया जाता है।

कहानी[संपादित करें]

जोहंसी बिमार पड़ गयी है और निमोनिया की वजह से मर रही है। वह अपने कमरे की खिड़की के बाहर एक लता (बेल) से गिरते हुए पत्तों को देखती है और निर्णय कर लेती है कि जब अंतिम पत्ता गिरेगा तो वो मर जायेगी। तब सू ने उससे ऐसा न सोचने के लिए मना किया और उसे ऐसा सोचने से रोकने की कोशिश की।

एक बेहराम नामक बुढ़ा निराश कलाकार उनके नीचे के मकान में रहता है। वह दावा करता है कि वो एक अतिउत्तम रचना का निर्माण करेगा, यद्दपि उसने कभी यह कार्य आरम्भ नहीं किया। सू उसके पास जाती है और उसे बताती है कि उसकी दोस्त निमोनिया से मर रही है और जोहंसी दावा कर रही है कि जब उसके कमरे की खिड़की के बाहर की लता का अन्तिम पत्ता गिरेगा तो वह मर जायेगी। बेहराम ने इसका मजाक उडाया और इसे उसकी मुर्खता बताया लेकिन जैसा कि वह इन दो युवा कलाकारों का रक्षक था — अतः उसने जोहंसी और लता को देखने का निर्णय किया।

रात में एक बहुत ही बुरी आँधी आती है और हवा सरसराहट कर रही है और बारिश की छिंटे लगातार खिड़की पर गिर रही हैं। सू खिड़कियाँ और पर्दे बंद कर देती है और जोहंसी को सोने के लिए कहती है, यद्दपि लता पर अब भी एक पत्ता बचा हुआ था। जोहंसी विरोध करती है लेकिन वह जोर देकर ऐसा करने को कहती है क्योंकि वह नहीं चाहती थी कि जोहंसी अन्तिम पत्ते को गिरते हुए देखे। सुबह, जोहंसी लता को देखना चाहती है कि सभी पत्ते गिर चुके हैं लेकिन उसे आश्चर्य होता है कि अभी भी एक पत्ता बचा हुआ है।

जब जोहंसी हैरान हुई कि वह अब भी वहीं था, तो वह हठ करती है कि यह आज गिरेगा। लेकिन ऐसा नहीं होता है और वह ना ही रात को गिरता है और न ही अगले दिन। जोहंसी को मान लेती है कि यह पत्ता उसे यह दिखाने के लिए ही वहाँ रुका हुआ है कि वह कितनी निर्बल है जो उसने मृत्यू चाहने जैसा पाप किया। उसने अपने आप को जीने के लिए पुनः तैयार किया और दिनभर में बहुत सुधार आता है।

दोपहर को एक चिकित्सक सू से बात करता है। और इस प्रकार कहानी आगे बढ़ती है।

अ नुरूपण[संपादित करें]

इस कहानी पर आधारित १९५२ में ओ. हेनरी'ज फुल हाउस नामक चलचित्र बना और पुनः 1983 में 24-मिनट की फ़िल्म बनी।[1] 2013 में बॉलीवुड फिल्म लुटेरा भी इसी कहनी पर आधारित निर्मित की गयी।[2]

सन्दर्भ[संपादित करें]

बाह्य सूत्र[संपादित करें]

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