द्विपद प्रमेय

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गणित में द्विपद प्रमेय एक महत्वपूर्ण बीजगणितीय सूत्र है जो x + y प्रकार के द्विपद के किसी धन पूर्णांक घातांक का मान x एवं y के nवें घात के बहुपद के रूप में प्रदान करता है। अपने सामान्यीकृत (जनरलाइज्ड) रूप में द्विपद प्रमेय की गणना गणित के १०० महानतम प्रयोयों में होती है।


[संपादित करें] न्यूटन का द्विपद प्रमेय

अपने सरलतम रूप में द्विपद प्रमेय इस प्रकार व्यक्त किया जा सकता है:

(x+y)^n=\sum_{k=0}^n{n \choose k}x^{n-k}y^{k}\quad\quad\quad(1)

जहाँ x और y कोई भी वास्तविक संख्या या समिश्र संख्या हैं तथा n शून्य या कोई धनात्मक पूर्णांक है। उपरोक्त समीकरण (१) में आने वाले द्विपद गुणांक, n के फैक्टोरिअल के रूप में व्यक्त किये जा सकते हैं।

{n \choose k}=\frac{n!}{k!\,(n-k)!}.

उदाहरण के लिये, 2 ≤ n ≤ 5 के लिये द्विपद प्रमेय का स्वरूप इस प्रकार है:

(x + y)^2 = x^2 + 2xy + y^2\,
(x + y)^3 = x^3 + 3x^2y + 3xy^2 + y^3\,
(x + y)^4 = x^4 + 4x^3y + 6x^2y^2 + 4xy^3 + y^4\,
(x + y)^5 = x^5 + 5x^4y + 10x^3y^2 + 10x^2y^3 +5xy^4 + y^5.\,

[संपादित करें] सन्दर्भ

  • Amulya Kumar Bag. Binomial Theorem in Ancient India. Indian J.History Sci.,1:68-74,1966.

[संपादित करें] वाह्य सूत्र