देहरादून के दर्शनीय स्थल

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देहरादून पर्यटन स्थल के रूप में बहुत प्रसिद्ध है। देहरादून की समीपवर्ती पहाड़ियाँ जो अपनी प्राकृतिक सुषमा के लिए जानी जाती हैं, मंदिर जो आस्था के आयाम हैं, अभयारण्य जो पशु-पक्षी के प्रेमियों को अपनी ओर आकर्षित करते हैं, रैफ्टिंग और ट्रैकिंग जो पहाड़ी नदी के तेज़ बहाव के साथ बहने व पहाड़ियों पर चढ़ने के खेल है और मनोरंजन स्थल जो आधुनिक तकनीक से बनाए गए अम्यूजमेंट पार्क हैं, यह सभी देहरादून में हैं। प्रमुख पर्यटन-स्थलों का विवरण इस प्रकार है-

संग्रहालय और संस्थान[संपादित करें]

वन अनुसंधान संस्थान :

वन अनुसंधान संस्थान

घंटा से 7 कि.मी. दूर देहरादून-चकराता मोटर-योग्य मार्ग पर स्थित यह संस्थान भारत में सबसे बड़ा फॉरेस्ट-बेस प्रशिक्षण संस्थान है। अधिकांश वन अधिकारी इसी संस्थान से आते हैं। एफआरआई का भवन बहुत शानदार है तथा इसमें एक बॉटनिकल म्यूजियम भी है। इसकी स्थापना 1906 में इंपीरियल फोरेस्ट इंस्टीट्यूट के रूप में की गई थी। यह इंडियन काउंसिल ऑफ फोरेस्ट रिसर्च एंड एडूकेशन के अंतर्गत एक प्रमुख संस्थान है। इसकी शैली ग्रीक-रोमन वास्तुकला है। इसका मुख्य भवन राष्ट्रीय विरासत घोषित किया जा चुका है। इसका उद्घघाटन 1921 में किया गया था और यह वन शोध के क्षेत्र में प्रसिद्ध है। एशिया में अपनी तरह के इकलौते संस्थान के रूप में यह दुनिया भर में प्रख्यात है। 2000 एकड़ में फैला एफआरआई का डिजाइन विलियम लुटयंस द्वारा किया गया था। इसमें 7 संग्रहालय हैं और तिब्बत से लेकर सिंगापुर तक सभी तरह के पेड़-पौधे यहां पर हैं। तभी तो इसे देहरादून की पहचान और गौरव कहा जाता है।

इंडियन मिलिटरी एकेडमी

एफआरआई (देहरादून) से 3 कि.मी. आगे देहरादून-तकराता मार्ग पर 8 कि.मी. की दूरी पर स्थित इंडियन मिलिटरी एकेडमी सेना अधिकारियों के प्रशिक्षण का एक प्रमुख संस्थान है। एकेडमी में स्थित म्यूजियम, पुस्तकालय, युद्ध स्मारक, गोला-बारुद शूटिंग प्रदर्शन-कक्ष और फ्रिमा गोल्फ कोर्स (18 होल्स) दर्शनीय स्थल हैं।

वाडिया संस्थान :

जनरल माधवसिंह रोड पर घंटाघर से 5 कि.मी. दूर पहाड़ी के ऊपर स्थित वाडिया संस्थान उत्तराखंड हिमनदों का एक अनोखा संग्रहालय है।

धार्मिक स्थल[संपादित करें]

चित्र:Tapkeshwar.jpg
टपकेश्वर मंदिर की गुफा में शिवलिंग

'टपकेश्वर मंदिर :

यह मंदिर सिटी बस स्टेंड से 5.5 कि.मी. की दूरी पर गढ़ी कैंट क्षेत्र में एक छोटी नदी के किनारे बना है। सड़क मार्ग द्वारा यहां आसानी से पहुंचा जा सकता है। यहां एक गुफा में स्थित शिवलिंग पर एक चट्टान से पानी की बूंदे टपकती रहती हैं। इसी कारण इसका नाम टपकेश्वर पड़ा है। शिवरात्रि के पर्व पर आयोजित मेले में लोग बड़ी संख्या में यहां एकत्र होते हैं और यहां स्थित शिव मूर्ति पर श्रद्धा-सुमन अर्पित करते हैं।

गुरु रामराय दरबार :

क्षेत्र की कला ने दरवार साहिब की पेंटिग, गुरू रामराय की सीट को 17 वी शताब्दी के मध्य तक बहुत अधिक प्रभावित किया हैं। ये देखने योग्य दृश्य है। आर्चियोलोजिकल सर्वे आफ इण्डिया ने दरवार साहिब की पेटिंग का एकाकिकरण किया है जो मुगल, राजस्थान और काँगडा शैली का है। गुरू रामराय के आँगन की दीवारे विभिन्न विषयो पर बहुत अच्छी सजी हुई है पेटिंग को प्रस्तुत करती हैं। कुछ मुख्य दृश्य महाभारत, गीता, रामायण और कृष्ण लीला से है। इसके अतिरिक्त नूरजहाँ, हीर-राँझा और लैला-मजनू के है और ब्रिटेनवासी भी प्रसिद्ध दरवार साहिब के पैटिंग में स्थान पाते है।

संतौला देवी मंदिर :

देहरादून से लगभग 15 कि.मी. दूर स्थित प्रसिद्ध संतौला देवी मंदिर पहुंचने के लिए बस द्वारा जैतांवाला तक जाकर वहां से पंजाबीवाला तक 2 कि.मी. जीप या किसी हल्के वाहन द्वारा तथा पंजाबीवाला के बाद 2 कि.मी. तक पैदल रास्ते से मंदिर पहुंचा जा सकता है। यह मंदिर लोगों के विश्वास का प्रतीक है और इसका बहुत सांस्कृतिक और धार्मिक महत्व है। लोकप्रिय कथानक के अनुसार दुश्मनों से मुकाबला करने में खुद को अक्षम पाने के बाद संतलादेवी और उनके भाई ने इसी जगह पर अपने हथियार फैंकने के बाद ईश्वर की प्रार्थना की थी। उनकी प्रार्थना सुनी गई और वे पत्थर की मुर्तियों में तब्दील हो गए। शनिवार को देवी और उनके भाई के पत्थर में बदलने के दिवस के रूप में देखा जाता है।

लक्ष्मण सिद्ध :

ऋषिकेश की ओर देहरादून से 12 कि.मी. दूर यह एक प्रसिद्ध मंदिर है। मंदिर के पास स्थित सुसवा नदी इसकी खूबसूरती और अधिक बढ़ा देती है। प्रत्येक रविवार को जब लक्ष्मण मेले का आयोजन किया जाता है, उस अवसर पर काफी संख्या में लोग यहां आते हैं। स्थानीय दंतकथा के अनुसार राम के भाई लक्ष्मण ने एक ब्राह्मण की हत्या के पाप से खुद को मुक्त करने के लिए यहां पर तपस्या की थी।

चन्द्रबाणी या चंद्रबनी:

देहरादून-दिल्ली मार्ग पर देहरादून से 7 कि.मी. दूर यह मंदिर चन्द्रबाणी (गौतम कुंड) के लिए प्रसिद्ध है। पौराणिक कथाओं के अनुसार इस स्थान पर महर्षि गौतम अपनी पत्नी और पुत्री अंजनी के साथ निवास करते थे। इस कारण मंदिर में इनकी पूजा की जाती है। ऐसा कहा जाता है कि स्वर्ग-पुत्री गंगा इसी स्थान पर अवतरित हुई, जो अब गौतम कुंड के नाम से प्रसिद्ध है। प्रत्येक वर्ष श्रद्धालु इस पवित्र कुंड में डुबकी लगाते हैं। मुख्य सड़क से 2 कि.मी. दूर, शिवालिक पहाड़ियों के मध्य में यह एक सुंदर पर्यटन स्थल है।

साई दरबार :

राजपुर रोड पर शहर से 8 कि.मी. की दूरी पर घंटाघर के समीप साई दरबार मंदिर है। इसका बहुत अधिक सांस्कृतिक और धार्मिक महत्व है तथा देश-विदेश से दर्शनार्थी यहं आते हैं। साई दरबार के समीप राजपुर रोड पर ही भगवान बुद्ध का बहुत विशाल और भव्य तिब्बती मंदिर है।

तपोवन :

देहरादून-राजपुर रोड पर सिटी बस स्टेंड से लगभग 5 कि.मी. दूर स्थित यह स्थान सुंदर दृश्यों से घिरा है। कहावत है कि गुरु द्रोणाचार्य ने इस क्षेत्र में तपस्या की थी।

महान स्तूप  :

यह शानदार स्तूप देहरादून की उत्कृष्ट संरचनाओं में से एक है। सहारनपुर के रास्ते क्लेमेंट टाउन में स्थित इस 85 मीटर ऊंची संरचना का उद्घघाटन दलाई लामा ने किया था। इसके चारों ओर बगीचा है। यह स्तूप तिब्बत की संस्कृति, परंपरा, कला और विरासत का एक अनोखा उदाहरण है। यह विश्व का सबसे बड़ा स्तूप है। तिब्बती बौद्ध कला की सबसे खूबसूरत परंपरा में डिजाइन भित्ति के साथ इसमें कई सारे शानदार मंदिर कक्ष हैं। इस स्तूप का उद्घघाटन 28 अक्टूबर 2002 में हुआ था।

बुद्ध की मूर्ति :

यह देहरादून का एक अन्य बड़ा आकर्षण है। 103 फीट ऊंची यह मूर्ति दलाई लामा को समर्पित है। यह खूबसूरत बगीचे से घिरा हुआ है जिसमें तरह-तरह के रंग-बिरंगे फूल हैं। देश-विदेश के काफी सारे पर्यटक शांति के इस प्रतीक को श्रद्धांजलि देने के लिए यहां पर आते हैं।

अभयारण्य[संपादित करें]

मालसी डियर पार्क :

देहरादून से 10 कि.मी. की दूरी पर मसूरी के रास्ते में यह एक सुंदर पर्यटन स्थल है जो शिवालिक श्रंखला की तलहटी में स्थित है। मालसी डियर पार्क एक छोटा सा चिड़ियाघर है जहां बच्चों के लिए प्राकृतिक सौंदर्य से घिरा एक पार्क भी विकसित किया गया है। सुंदर वातावरण के कारण यहां ताज़गी का अहसास होता है जिससे यह एक आदर्श दर्शनीय-स्थल और पिकनिक-स्पॉट बन चुका है। सहस्त्रधारा सल्फर मिश्रित पानी का झरना है, जिसका औषधिय महत्व भी है। बाल्डी नदी और यहां की गुफाएं एक रोमांचक दृश्य उत्पन्न करती हैं। सिटी बस स्टेंड से 14 कि.मी. की दूर, यहां नियमित बस सेवा और टैक्सियों द्वारा पहुंचा जा सकता है। पारिवारिक पिकनिक के लिए यह एक आदर्श स्थान है।

राजाजी नेशनल पार्क

1966 में स्थापित यह पार्क 820.42 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला हुआ है। शिवालिक रेंज में स्थित इस पार्क में स्तनधारी जानवरों की 23 प्रजातियां हैं। इसका नाम श्री सी राज गोपालाचारी जैसी विशिष्ट शख्सियत के नाम पर रखा गया है जिन्हें लोग प्यार से राजा जी कहकर बुलाते थे। प्रकृति प्रेमियों के लिए यह जगह निहायत रोमांच पैदा करने वाली है। राजाजी नेशनल पार्क तक कई गेटों से पहुंचा जा सकता है जिनमें से दो प्रमुख हैं- रामगढ़ गेट और मोहन्द गेट जो देहरादून से 25 किलोमीटर की दूरी के दायरे में स्थित हैं। यहां यह ध्यान देने की जरूरत है कि राजा जी पार्क जाने वाले लोगों को प्रवेश के लिए विभिन्न समय का ख्याल रखना होता है। पार्क की यात्रा वहां उपस्थित 9 फोरेस्ट रेस्ट हाउस से और अधिक रोमांचक हो जाती है। ये सभी लगभग 100 साल पुराने हैं। यहां आने वाले लोग इन गेस्ट हाउसों में रहकर प्रकृति के करीब होने का सुख ले सकते हैं

आसन कंजर्वेशन रिजर्व

आसन बैराजः यह दलदल भूमि देहरादून से 50 किलोमीटर की दूरी पर यमुना और आसन नदियों के संगम पर स्थित है। यह पक्षी प्रेमियों और वाटर-स्पोर्टस प्रेमियों के लिए एक आदर्श जगह है। प्रवासी पक्षियों की 66 प्रजातियों के साथ यह जगह प्रकृति प्रेमियों को लुभाती हैं। पक्षियों की विलुप्तप्राय प्रजातियों के संरक्षण के लिए आसन कंजर्वेशन रिजर्व का गठन किया गया है। आसन वाटर स्पोर्टस सेंटर एंड रिसोर्ट, जीएमवीएवः असम बैराज के पास यहां वाटर स्कीइंग, केयाकिंग, सेलिंग और नौकाचालन जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं।

ऐतिहासिक महत्व के स्थल[संपादित करें]

कलंगा स्मारक :

देहरादून-सहस्त्रधारा मार्ग पर स्थित यह स्मारक ब्रिटिशों और गोरखाओं के बीच 180 वर्ष पहले हुए युद्ध में बहादुरी की गाथाएं याद दिलाता है। रिसपाना नदी के किनारे पहाड़ी पर 1000 फुट की ऊंचाई पर बना यह स्मारक गढ़वाली शासकों के इतिहास को दर्शाता है।

कालसी

यह यमुना और उसकी सहायक टोंस के संगम पर स्थित है। यह देहरादून से लगभग 56 किलोमीटर दूर है। कालसी में दून घाटी के कुछ बेहद लुभावने दृश्य हैं। यह जगह बाहर घूमने फिरने और दोस्तों तथा परिवार के साथ पिकनिक मनाने के लिए आदर्श है। यहां पक्षियों के बीच गाड़ी चलाने और शांत परिवेश में घूमना अपने आप में एक अनोखा अनुभव है। कालसी सम्राट अशोक के गौरव का भी गवाह है। तीसरी सदी ईसा पूर्व यह शक्तिशाली मौर्य साम्राज्य के प्रभाव के तहत सबसे दूर की जगह थी। यह जगह अशोक के पत्थर के शिलालेख के लिए भी प्रसिद्ध है।

प्राकृतिक दृश्यों के लिए प्रसिद्ध स्थल[संपादित करें]

गुच्छुपानी :

पिकनिक के लिए एक आदर्श स्थान रॉबर्स केव सिटी बस स्टेंड से गढ़वा केंट होते हुए अनारवाला में स्थित केवल 8 कि.मी. पर स्थित है। हरिद्वार-ऋषिकेश मार्ग पर लच्छीवाला-डोईवाला से 3 कि.मी. और देहरादून से 22 कि.मी. दूर है। सुंदर दृश्यावली वाला यह स्थान पिकनिक-स्पॉट है। यहाँ हरे-भरे स्थान पर फॉरेस्ट रेस्ट हाउस में पर्यटकों के लिए ठहरने की व्यवस्था है। बसें अनारवाला गांव तक जाती है जहाँ से यहाँ पहुँचने के लिए एक किलोमीटर की दूरी पैदल तय करनी पड़ती है। कई सारी विशेषताओं में से एक जो इसे अत्यंत लोकप्रिय जगह बनाती है, वह है धरती के नीचे से पानी की धारा का बहना और फिर कुछ मीटर की दूरी पर उसका प्रकट हो जाना। यह गुफा भी चारों तरफ से पहाड़ियों से घिरी है और यह आत्मिक और मानसिक शांति की तलाश में जुटे व्यक्ति के लिए यह एक बेहतरीन अवसर उपलब्ध कराता है।

भागीरथ रिज़ार्ट :

सड़क मार्ग द्वारा चकराता से 18 कि.मी. दूर सेलाकी, देहरादून स्थित भागीरथी रिज़ार्ट से हिमालय की पर्वत श्रेणियों का रोमांचक दृश्य दिखाई देता है। रिजार्ट में बना शांत स्विमिंग पूल, वाटर-स्लाइडें और फव्वारा यात्रियों को आकर्षित करते हैं। पर्वत श्रेणियों की पृष्ठभूमि में बना यह रिज़ार्ट एक आदर्श पर्यटन स्थल है।

लच्‍छीवाला

लच्‍छीवाला देहरादून से 22 किलोमीटर की दूरी पर स्थित एक लोकप्रिय पिकनिक स्थल है। यह सोंग नदी के तट पर स्थित है। लच्‍छीवाला का सबसे बड़ा लाभ यह है कि यह काफी अधिक सस्ता है और सभी तरह के लोग यहां पर आकर मौज-मस्ती कर सकते हैं। यहां पर नौका चालन करने के लिए पर्यटक मौसम के दौरान भी बहुत कम धनराशि खर्च करनी पड़ती हैं। यह स्थान एक खूबसूरत पिकनिक स्थल भी है। यह बच्चों और बड़ों दोनों में समान रूप से लोकप्रिय है। yPNhokyk dk gj utkjk “kkunkj gS-----fQj pkgsa oks ;gkW cgus okyh [kwclwjr unh;k gks ;k gfj;kyh dh pknj vks<+sa ;gkW ds ?kus taxy---- ouksa ls f?kjk yPNhokyk dbZ iztkfr;ksa ds o`{kksa ds fy, Hkh tkuk tkrk gS------yPNhokyk esa eq[;r “kh”ke] [kSj ] xqVsy] lkxksu] dUtw vkSj Hkh dbZ iztkfr;ksa ds o`{k gS-----vkSj lcls [kkl ckr rks ;s gS bl LFky esa ugkusa dh O;oLFkk ds fy, izkd`frd :i ls NksVs NksVs ty Lkzksrksa ls nsokiqjk unh ds ikuh dks eksM+dj nsoiqjk ugj ds :i esa mi;ksx fd;k tkrk gSA ftldk ikuh lkSax unh esa fey tkrk gSA

राफ्टिंग व ट्रैकिंग[संपादित करें]

देहरादून के पास गंगा के तेज़ बहाव में राफ्टिंग की जाती है। कौडियाला और ऋषिकेश के बीच ३६ किलोमीटर के विस्तार पर १० महीनों के लिए १ सितंबर से ६ जून तक रैफ्टिंग का मज़ा लिया जा सकता है। लेकिन इसके लिए पर्यटन विभाग की कुछ शर्तों को पूरा करना होता है। ये शर्ते स्वास्थ्य और प्रशिक्षण से संबंधित होती हैं।

शहन्शाही आश्रम से मसूरी के लिए ट्रेकिंग का सुंदर मार्ग है। शहंशाही से पैदल रास्ता शुरू होता है और झारी-पानी पर समाप्त होता है। यह एक सुन्दर चढा़ई है जो लगभग 4-5 किलोमीटर की दूरी को 2-3 घण्टे में पूरा करती है। पूरा रास्ता पिक्चर महल की तरफ, जो मंसूरी से सात किलोमीटर दूर है जाता है। ऊपर जाने में पथरीला रास्ता और हरियाली है। जैसे जैसे ऊपर बढ़ते हैं हवा ठंडी और ताजी होती जाती है। रूकना और साँस लेना, चारो ओर देखना अच्छा लगता है। यदि इस रास्ते से गर्म मौसम में जाना हो तो पीने के पानी की बोतल साथ लेकर जाना ठीक रहेगा। एक रास्ता पुराने राजपुर गाँव से भी मसूरी की ओर जाता है। यदि पैदल चलने का आन्नद लेना है तो यह पैदल चलने का ठीक मार्ग है। मुख्य राजपुर सडक के अन्त में, पुराना राजपुर गाँव जहाँ पर तिब्बती, पंजाबी, गढवाली मूल के लोग रहते है। लगभग 2 किलोमीटर दूर राजपुर गाँव या डाकपट्टी एक ढा़ल पर है। मशहूर राजपुर 'पकोडे वाले' की दुकान से चढाई की शुरूवात होती है और थोडी दूर चलने पर मोड के पास सुन्दर पुरानी इमारतें दिखाई देती है।

मनोरंजन पार्क[संपादित करें]

फन एंड फूड किंगडमः

यह घंटाघर से 11 किलोमीटर की दूरी पर प्रेम नगर के कौलागढ़ में स्थित है। यह इस क्षेत्र के सबसे बड़े आकर्षणों में से एक है। कुछ बेहतरीन वाटर गेम्स और लुभावनी प्रकृति परिवार के साथ यहां मौज-मस्ती के लिए प्रेरित करती है। फन एंड फूड ने अपने आप को देहरादून के आसपास एक बेहतरीन आकर्षण के रूप में खुद को स्थापित किया है।

फन वैलीः

यह देहरादून से 32 किलोमीटर की दूरी पर हरिद्वार रोड पर स्थित है। यह अम्यूजमेंट पार्क अपनी तरह का अनोखा है जहां हमेशा देहरादून, ऋषिकेश और हरिद्वार आने वाले लोगों की भारी भीड़ रहती है। यहां पर शांत नदी, कई सारी झीलें, किड पूल और वाटर डिस्को हैं। इन सभी आकर्षणों के अलावा यहां पर रेसिंग कार, ड्रेगोन कोस्टर, मिनी ट्रेन, सिक्कों के खेल और मिनी टेली-कमबेट गेम आदि हैं। यहां पर जन्म दिन, शादी की पार्टियों, कारपोरेट सम्मेलनों और सेमीनारों के आयोजन काफी सस्ती दरों पर होते हैं।