देनदारी लेखे

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देय तथा प्राप्य खाता (Account Payable and Account Receivable)[संपादित करें]

किसी संस्थान में जमा ऐसा व्यापारिक अग्रिम जिसके मद में जमाकर्ता को न तो कोई माल दिया गया हो और न उसकी कोई व्यापारिक सेवा की गई हो उस संस्थान के लिय देय धन है। यह रकम संस्थान में देय खाते में अंकित की जाती है। स्वामी, साझेदारों, संचालकों तथा कर्मचारियों द्वारा संस्थान को दिया गया ऋण इस खाते में प्रविष्टि नहीं पाता। वह एक अलग देय ऋणखाते में अंकित किया जाता है। देय खाता व्यापारिक अग्रिम का खाता है। वह संस्थान के लिए देय तो है पर वह ऋण नहीं है इसलिए इसकी स्वतंत्र स्थिति है। व्यापार से संबद्ध अग्रिम जमा राशि मात्र का इसमें अंकन होता है। ठीक यही स्थिति संस्थान द्वारा दिए गए व्यापारिक अग्रिम की है। वह धनराशि जो अग्रिम के रूप में अन्य किसी व्यापारिक संस्थान को दी गई हो और उसके मद में न तो कोई माल आया हो और न अन्य व्यापारिक सेवा ली गई हो संस्थान के प्राप्य खाते में डाली जाती है। जिसके नाम यह राशि प्राप्य खाते में डाली जाती है वह संस्थान अपने यहाँ इस रकम को देय खाते में डालता है।

देय तथा प्राप्य खाता बहियाँ (Account payable Ledger or Account Receivable Ledger)[संपादित करें]

संस्थान की ये सहायक खाता बहियाँ है। देय खाता बही में संस्थान के सभी देय खाते तथा प्राप्य खाता बही में उसके सभी प्राप्य खाते अंकित रहते हैं। यदि खातों की संख्या अधिक हुई तो एक से अधिक खाता बहियाँ वर्णानुक्रम या भौगोलिक आधार पर सुविधानुसार भी ये बहियाँ रखी जाती है। संस्थान के समान्य खाते में भी देय तथा प्राप्य धन का आलेख रहता है। इन खाता बहियों की अलग व्यवस्था श्रमविभाजन के सहज लाभ के कारण की जाती है क्योंकि इसके द्वारा वित्त विभाग को बाँट कर तथा अलग स्वतंत्र रूप से भी काम करने में सहायता मिलती है। साथ ही श्रम और समय की बचत होती है। हिसाब किताब के मिलान में भी इससे सहायता मिलती है क्योंकि संस्थान के सामान्य खाते से इन बहियों के खाते का संतुलन समय समय पर होता रहता है जिससे भूल चूक की छानबीन भी आसानी से हो जाती है। बड़े व्यापारिक संस्थानों में इन सहायक बहियों का उपयोग व्यापक पैमाने पर किया जाता है।

परिचय[संपादित करें]

देनदारी लेखा एक ऐसा फ़ाइल या खाता है, जिसमें व्यक्ति या कंपनी द्वारा आपूर्तिकर्ताओं को बकाया, लेकिन अब तक अदत्त (कर्ज़ का एक रूप) पैसा होता है। जब आपको बीजक प्राप्त होता है, तो आप उसे फ़ाइल से जोड़ते हैं और भुगतान करते समय उसे हटाते हैं। इस प्रकार, A/P ऋण का एक ऐसा स्वरूप है, जो आपूर्तिकर्ता अपने ख़रीदारों को पेश करते हैं, जिसके ज़रिए पहले से ही प्राप्त किसी उत्पाद या सेवा के लिए बाद में भुगतान अनुमत होता है।

यह व्यवसाय अनियमित है, हालांकि अंतर्राष्ट्रीय मानक स्थापित करने वाले निकाय मौजूद हैं, जिनका एक उदाहरण है संयुक्त राज्य अमेरिका, कनाडा, ब्रिटेन और अन्य देशों में 5,000 से अधिक सदस्यों का एक संघ, अंतर्राष्ट्रीय देनदारी लेखों के पेशेवर (IAPP).[1] अपनी व्यावसायिक मानक संरचना के अंश के रूप में,[2] IAPP ने देनदारी लेखों की एक नई परिभाषा स्थापित की है:

देनदारी लेखे एक सामरिक, मूल्य-योजित लेखा कार्य है, जो एक संगठन में प्राथमिक बिना वेतन-चिट्ठे के वितरण कार्य संपन्न करता है। अतः AP परिचालन, संगठन के वित्तीय चक्र में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। AP संगठन को संपूर्ण देनदारी प्रक्रिया के प्रभाव के मूल्यांकन और सुधार हेतु, व्यवस्थित और अनुशासित दृष्टिकोण के ज़रिए अपने उद्देश्यों को पूरा करने में सक्षम बनाता है। पारंपरिक AP गतिविधियों के अलावा, जिसमें अन्य पक्ष इकाइयों (आपूर्तिकर्ता, विक्रेता, कर प्राधिकारी, आदि.) की देयताओं को स्वीकारा जाता है और कंपनी और आपूर्तिकर्ताओं के बीच सहमत ऋण नीतियों के आधार पर भुगतान किया जाता है, वर्तमान AP विभागों ने धोखाधड़ी निवारण, लागत में कमी, कार्यप्रवाह प्रणाली समाधान, नकदी प्रवाह प्रबंधन, आंतरिक नियंत्रण तथा विक्रेता (सप्लाई चेन) वित्त पोषण समेत और भी व्यापक भूमिकाओं को ग्रहण किया है .[3]

घरों में आम तौर पर विद्युत कंपनी, टेलीफोन कंपनी, केबल टेलीविज़न या उपग्रह डिश सेवा, अख़बार का चंदा और अन्य ऐसी नियमित सेवाएं देनदारी लेखे हैं। गृहस्थ लोग सामान्यतः चेक या क्रेडिट कार्ड का उपयोग करते हुए, हस्तचालित तरीक़े से मासिक आधार पर इनका ध्यान रखते और भुगतान करते हैं। व्यापार में, आम तौर पर A/P फ़ाइल में व्यापक सेवाएं शामिल होती हैं और सामान्य रूप से लेखाकार या बही-खाता लिखनेवाले, जब उन्हें बीजक मिलता है तो इस देनदारी खाते में आने वाले धन और जब वे भुगतान करते हैं, तो इस खाते से जाने वाले धन के प्रवाह की खोज-ख़बर के लिए लेखांकन सॉफ्टवेयर का प्रयोग करते हैं। बड़ी कंपनियां एक संगठन के बीजकों के संसाधन में प्रयुक्त काग़ज़ और हस्तचालित तत्वों को स्वचालित करने के लिए तेजी से विशेष देनदारी लेखों के स्वचालन का प्रयोग कर रही हैं।

आम तौर पर, आपूर्तिकर्ता एक उत्पाद को जहाज़ पर चढ़ाता है, बीजक जारी करता है और बाद में भुगतान प्राप्त करता है, जिससे एक नकदी रूपांतरण चक्र, एक समयावधि, जिस दौरान आपूर्तिकर्ता ने पहले से ही कच्चे माल के लिए भुगतान किया है, लेकिन बदले में अंतिम ग्राहक द्वारा उसे चुकौती नहीं की गई है।

जब बीजक आता है तो पैकिंग पर्ची और खरीद आदेश से उसका मिलान किया जाता है और अगर सब कुछ सही है, तो बीजक का भुगतान कर दिया जाता है। इसे तीन-तरफ़ा मिलान के रूप में निर्दिष्ट किया जाता है।[4]

व्यय प्रशासन[संपादित करें]

व्यय प्रशासन आम तौर पर देनदारी लेखों के साथ क़रीब से जुड़ा हुआ है और कभी-कभी एक ही कर्मचारी द्वारा ये कार्य किए जाते हैं। व्यय प्रशासक यह पुष्टि करते हुए कर्मचारी के व्यय रिपोर्ट का सत्यापन करता है कि विमान यातायात, भू-परिवहन, भोजन और मनोरंजन, टेलीफ़ोन, होटल तथा अन्य व्यय के समर्थन में रसीदें उपलब्ध हैं। यह प्रलेखन, कर उद्देश्यों के लिए और अनुपयुक्त या ग़लत खर्चों की प्रतिपूर्ति की रोकथाम के लिए आवश्यक है। विमान यातायात खर्च में, शायद सबसे अधिक धोखाधड़ी की संभावना है, क्योंकि हवाई यात्रा की उच्च लागत और हवाई यात्रा संबंधी प्रलेखन की भ्रामक प्रकृति की वजह से, जिसमें आरक्षण, रसीदें और वास्तविक टिकटों का विन्यास शामिल हैं।

आंतरिक नियंत्रण[संपादित करें]

आम तौर पर देनदारी लेखों के कर्मियों द्वारा ग़बन रोकने के लिए, दुरुपयोग के खिलाफ़ विविध जांच मौजूद हैं। कर्तव्यों का पृथक्करण एक आम नियंत्रण है। लगभग सभी कंपनियों में चेक के संसाधन और मुद्रण के लिए एक जूनियर कर्मचारी और चेक के पुनरीक्षण और उस पर हस्ताक्षर करने के लिए एक वरिष्ठ कर्मचारी होता है। अक्सर, लेखांकन सॉफ्टवेयर प्रत्येक कर्मचारी को केवल उन्हें सौंपे गए कार्य को निष्पादित करने तक ही सीमित करते हैं, ताकि ऐसा कोई ज़रिया मौजूद ना हो, जिससे कोई कर्मचारी - नियंत्रक भी - अकेले कोई भुगतान कर पाए.

कुछ कंपनियां नए विक्रेताओं को जोड़ने और वाउचर प्रविष्ट करने के कार्य को भी अलग करती हैं। इससे किसी कर्मचारी के लिए असंभव हो जाता है कि वह ख़ुद को विक्रेता के रूप में जोड़े और फिर किसी अन्य कर्मचारी के साथ बिना सांठ-गांठ के अपने नाम चेक काटें. यह फ़ाइल मास्टर वेंडर फ़ाइल के रूप में निर्दिष्ट है। यह कंपनी के आपूर्तिकर्ताओं के बारे में सभी महत्वपूर्ण जानकारी का भंडार है। जहां बीजक के भुगतान का मामला है, यह देनदारी लेखों का संदर्भ बिंदु है।[5]

इसके अलावा, अधिकांश कंपनियों में एक निर्धारित सीमा से अधिक राशि के चेक पर दूसरे हस्ताक्षर की आवश्यकता होती है।

देनदारी लेखों के कर्मियों द्वारा फ़र्जी बीजकों पर नज़र रखनी चाहिए. खरीद आदेश प्रणाली के अभाव में, रक्षा की पहली पंक्ति है अनुमोदित करने वाला प्रबंधक. फिर भी, A/P स्टॉफ़ को कुछ सामान्य समस्याओं के साथ परिचित होना चाहिए, जैसे "यल्लो पेजस" धोखाधड़ियां, जिसमें कपटी प्रचालक विज्ञापन देते हैं। चलने वाली उंगलियों के लोगो को कभी ट्रेडमार्क नहीं बनाया गया है और यल्लो पेजस शैली की कई निर्देशिकाएं उपलब्ध हैं, जिनका बहुत कम वितरण होता है। शीतकालीन 2000 अमेरिकी पेरोल एसोसिएशन के एम्पलॉयर प्रैक्टिसस के एक लेख के अनुसार, "विक्रेता ऐसे दस्तावेज़ भेज सकते हैं जो देखने में बीजक के समान लगे, लेकिन जिन पर छोटे अक्षरों में मुद्रित होता है "यह बिल नहीं है". ये निर्देशिका सूचीकरण या विज्ञापन के लिए शुल्क हो सकते हैं। हाल ही में, कुछ कंपनियों ने जो चेक भेजने शुरू किए हैं, वे देखने में तो छूट या वापसी की प्रतीत होती हैं; वास्तव में, यह सक्रिय सेवाओं के लिए पंजीकरण है, जब दस्तावेज़ हस्ताक्षर के साथ लौटाए जाते हैं।"

देनदारी लेखों में, एक साधारण ग़लती से अधिक भुगतान हो सकता है। एक सामान्य उदाहरण में डुप्लीकेट बीजक शामिल हैं। एक बीजक अस्थाई रूप से ग़लत जगह रखा जा सकता है या अभी भी अनुमोदन स्तर पर हो सकती है, जब विक्रेता उसके भुगतान की स्थिति मालूम करने के लिए संपर्क करता है। A/P स्टाफ़ सदस्य छान-बीन करता है और पाता है कि उसका भुगतान अभी नहीं हुआ है, तो विक्रेता डुप्लीकेट बीजक भेजता है; इस बीच मूल बीजक का पता चलता है और उसका भुगतान हो जाता है। उसके बाद डुप्लीकेट बीजक आता है और अनजाने में उसका भी भुगतान हो जाता है, शायद किसी अलग बीजक संख्या के अधीन.

देनदारी लेखों का लेखा-परीक्षण[संपादित करें]

लेखा-परीक्षक अक्सर काटे गए चेकों के समर्थन में अनुमोदित बीजकों, व्यय रिपोर्टों और अन्य समर्थक प्रलेखनों की मौजूदगी पर ध्यान केंद्रित करते हैं। आपूर्तिकर्ता से पुष्टिकरण या बयान का होना, खाते के अस्तित्व का समुचित प्रमाण है। यह असामान्य नहीं है कि लेखा-परीक्षा के चालू होने तक, इनमें से कुछ प्रलेखन खो जाएं या ग़लत फ़ाइलों में रखे जाएं. ऐसी स्थितियों में लेखा-परीक्षक नमूने के आकार को बढ़ाने का फ़ैसला कर सकते हैं।

लेखा परीक्षक किसी निश्चित अवधि में (30, 60, 90 दिन, आदि) बकाया ऋण की बेहतर समझ के लिए विशिष्ट रूप से देनदारी लेखों की वयगत संरचना को तैयार करते हैं। ऐसी संरचनाएं वर्षांत में तुलन पत्र की सही प्रस्तुति में सहायक होती हैं।

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

संदर्भ[संपादित करें]

  1. http://www.theiapp.org
  2. http://www.theiapp.org/standards IAPP Professional Standards Framework
  3. http://www.theiapp.org/apdefinition IAPP Definition of Accounts Payable
  4. Schaeffer, Mary S. (2007). Controller and CFOs Guide to Accounts Payable. John Wiley & Sons. आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰ 047178589X. 
  5. Schaeffer, Mary S. (2006). Accounts Payable & Sarbanes Oxley: Strengthening Your Internal Controls. John Wiley & Sons. आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰ 0471785881.