दीवान-ए-ख़ास
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दीवान-ए-ख़ास आगरा के किले में स्थित एक सभागार है। इसका प्रयोग मुगल बादशाहों के उच्च पदाधिकारियों की गोष्ठी और मंत्रणा के लिये किया जाता था,जहाँगीर का काला सिंहासन इसकी विशेषता थी।यह कमरा केवल निजी लोगों के लिए था। इसका निर्माण भी शाहजहां ने करवाया था। यह कमरा दो हिस्सों मे बंटा हुआ है जो तीन बुर्जों से आपस में जुड़ा हुआ है। यहीं से प्रसिद्ध मयूर सिंहासन को औरंगजेब दिल्ली ले गया था जो बाद में इरान ले जाया गया।
[संपादित करें] अष्ठभुजीय इमारत
खूबसूरती से तराशी गई यह इमारत दीवान-ए-खास के पास स्थित है। यही वह जगह है जहां औरंगजेब की कैद में शाहजहां ने अपनी जिंदगी के आखिरी सात साल बिताए। माना जाता है कि यहां से ताज का सबसे सुंदर नजारा दिखाई पड़ता है जो अधिक प्रदूषण के कारण अब अधिक स्पष्ट नहीं होता।
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