त्रिपिटक

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त्रिपिटक

    विनय पिटक    
   
                                       
सुत्त-
विभंग
खन्धक परि-
वार
               
   
    सुत्त पिटक    
   
                                                      
दीघ
निकाय
मज्झिम
निकाय
संयुत्त
निकाय
                     
   
   
                                                                     
अंगुत्तर
निकाय
खुद्दक
निकाय
                           
   
    अभिधम्म पिटक    
   
                                                           
ध॰सं॰ विभं॰ धा॰क॰
पुग्॰
क॰व॰ यमक पट्ठान
                       
   
         

त्रिपिटक (पालि भाषा:तिपिटक; शाब्दिक अर्थ: तीन पिटारी) बौद्ध धर्म का प्रमुख ग्रंथ है जिसे सभी बौद्ध सम्प्रदाय (महायान, थेरवाद, बज्रयान, मूलसर्वास्तिवाद, नवयान आदि) मानते है। यह बौद्ध धर्म के प्राचीनतम ग्रंथ है जिसमें भगवान बुद्ध के उपदेश संग्रहीत है [1] । यह ग्रंथ पालि भाषा में लिखा गया है और विभिन्न भाषाओं में अनुवादित है। इस ग्रंथ में भगवान बुद्ध द्वारा बुद्धत्त्व प्राप्त करने के समय से महानिर्वाण तक दिए हुए प्रवचनों को संग्रहित किया गया है[2]

ग्रंथ-विभाजन[संपादित करें]

त्रिपिटक को तीन भागों में विभाजित किया गया है, विनयपिटक, सुत्तपिटक और अभिधम्म पिटक । इसका विस्तार इस प्रकार है[1]-

  • विनयपिटक
    • सुत्तविभंग (पाराजिक, पाचित्तिय)
    • खन्धक (महावग्ग, चुल्लवग्ग)
    • परिवार
    • पातिमोक्ख
  • सुत्तपिटक
    • दीघनिकाय
    • मज्झिमनिकाय
    • संयुत्तनिकाय
    • अंगुत्तरनिकाय
    • खुद्दकनिकाय
      • खुद्दक पाठ
      • धम्मपद
      • उदान
      • इतिवुत्तक
      • सुत्तनिपात
      • विमानवत्थु
      • पेतवत्थु
      • थेरगाथा
      • थेरीगाथा
      • जातक
      • निद्देस
      • पटिसंभिदामग्ग
      • अपदान
      • बुद्धवंस
      • चरियापिटक
  • अभिधम्मपिटक
    • धम्मसंगणि
    • विभंग
    • धातुकथा
    • पुग्गलपञ्ञति
    • कथावत्थु
    • यमक
    • पट्ठान।


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संस्कृत विकिस्रोत पर इस लेख से संबंधित मूल पाठ उपलब्ध है:

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

टीका[संपादित करें]

  1. प्राचीन भारत की श्रेष्ठ कहानियाँ, लेखकः जगदीश चन्द्र जैन, प्रकाशक:भारतीय ज्ञानपीठ, प्रकाशित : मई ०९, २००३
  2. पृष्ठ ९, पुस्तकःबुद्धवचन त्रिपिटकया न्हापांगु निकाय ग्रन्थ दीघनिकाय,वीरपूर्ण स्मृति ग्रन्थमाला भाग-३, अनुवादक:दुण्डबहादुर बज्राचार्य, भाषा:नेपालभाषा, मुद्रकःनेपाल प्रेस