तीर्थ प्रबन्ध

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तीर्थ प्रबन्ध सोलहवीं शती के द्वैत दार्शनिक एवं सन्त श्री वदिराज स्वामी द्वारा संस्कृत में रचित प्रमुख ग्रंथ है। यह ग्रन्थ एक यात्रावर्णन की भांति लिखा गया है जिसमें सम्पूर्ण भारत के तीर्थस्थानों का वर्णन है। इस ग्रन्थ में कुल २३५ श्लोक हैं जो चार अध्यायों में विभक्त हैं। हर दिशा के लिये एक अध्याय है।

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