तरंग

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तरंग (Wave) का अर्थ होता है - 'लहर'। भौतिकी में तरंग का अभिप्राय अधिक व्यापक होता है जहां यह कई प्रकार के कंपन या दोलन को व्यक्त करता है। इसके अन्तर्गत यांत्रिक, विद्युतचुम्बकीय, ऊष्मीय इत्यादि कई प्रकार की तरंग-गति का अध्ययन किया जाता है।

तरंग के गुण[संपादित करें]

तरंग का ग्राफीय चित्रण

किसी तरंग का गुण उसके इन मानकों द्वारा निर्धारित किया जाता है

यह सिद्ध किया जा सकता है कि-

v = nl

जहाँ v तरंग का वेग है, n तरंग की आवृत्ति है और l तरंग की तरंग दैर्ध्य (wavelength) है।

विशिष्टताएँ (charecteristics)[संपादित करें]

तरंगें निम्नलिखित गुण प्रदर्शित करतीं हैं-

तरंग के प्रकार[संपादित करें]

गति की दिशा तथा कम्पन की दिशा के सम्बन्ध के आधार पर
  • अनुप्रस्थ तरंग (transverse wave) - इसमें तरंग की गति की दिशा माध्यम के कम्पन की दिशा के लम्बवत होती है।
  • अनुदैर्घ्य तरंग (longitudenal wave) - इसमें तरंग की गति की दिशा माध्यम के कम्पन की दिशा के में ही होती है।
तरंग की प्रकृति के आधार पर

तरंगों का गणितीय निरूपण[संपादित करें]

आवर्ती तरंग (हार्मोनिक वेव)[संपादित करें]

ज्यावक्रीय (साइनस्वायडल) तरंग
y(t,z)=A \sin \left(\frac{2\pi}{T} t - \frac{2\pi} \lambda z + \varphi\right) \,

इसको निम्न प्रकार से भी लिख सकते हैं:

y(t,z)=A \sin (\omega t - k z + \varphi) \,

जहाँ:

  • A – तरंग का आयाम,
  • T – आवर्तकाल (Time period)
  • λ – तरंगदैर्ध्य (तरंग की लम्बाई / wave length)
  • ω – तरंग का कोणीय वेग \omega=\frac{2\pi}{T} \, ,
  • kतरंग संख्या (wave number), k=\frac{2\pi} \lambda \,
  • φ – आरम्भिक कला (epoch)

ज्या (साइन) के कोणांक अर्थात् \frac{2\pi}{T} t - \frac{2\pi} \lambda z + \varphi = \omega t - k z + \varphi   को तरंग की 'कला' (फेज) कहते हैं।

कला वेग (या फेज वेलॉसिटी)-
v_f=\frac{\lambda}{T}=\frac{\omega}{k},
समूह वेग (ग्रुप वेलॉसिटी)-
v_{g}=\frac{d\omega(k)}{dk}

अप्रगामी तरंग (स्थिर तरंग)[संपादित करें]

अप्रगामी तरंग में कुछ निश्चित स्थानों पर स्थित कणों का कम्पन सबसे कम (शून्य) होता है, कुछ निश्चित स्थानों के कणों का कम्पन सर्वाधिक होता है।

एक अप्रगामी तरंग

इन्हें भी देखें[संपादित करें]