तनाह लोत

मुक्त ज्ञानकोश विकिपीडिया से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज
तनाह लोत में सूर्यास्त
मंदिर, पास से
पुरा बातु बलोंग, एक अन्य मंदिर

तनाह लोत, इंडोनेशिया के प्रान्त बाली के सागर तट पर स्थित एक शैलसमूह है। यह इंडोनेशिया के विश्व प्रसिद्ध मंदिर पुरा तनाह लोत घर है, साथ ही यह छायाकारी के शौकीनों और विदेशी पर्यटकों के बीच विशेष रूप से लोकप्रिय है।[1]

इतिहास[संपादित करें]

तनाह लोत का बाली भाषा में अर्थ समुद्री भूमि (समुद्र में भूमि) होता है। [2] यह देनपसार से लगभग 20-किलोमीटर (12 मील) की दूरी पर स्थित है और तबानन रीजेंसी का एक हिस्सा है। दक्षिण पश्चिम तट पर स्थित मंदिर एक बडी चट्टान पर बना है, जिसे हजारों वर्षों के दौरान समुद्री पानी के ज्वार से हुये क्षरण के फलस्वरूप यह आकृति प्राप्त हुई है।

माना जाता है पुरा तनाह लोत का निर्माण १५वीं शताब्दी में एक पुजारी निरर्थ ने कराया था। दक्षिणी तट के किनारे किनारे चलते हुये वो इस स्थान पर पहुंचे और उन्हें इस स्थान की सुन्दरता ने मोह लिया। कुछ मछुआरों ने उन्हें देखा और उन्हें उपहार प्रदान किये। निरर्थ ने फिर रात इस शिला पर बिताई। बाद में उन्होनें मछुआरों से इस स्थान पर बाली के समुद्री देवता के मंदिर के निर्माण का आग्रह किया। [3]

तनाह लोत मंदिर, शताब्दियों से बाली की पौराणिक संस्कृति का एक अभिन्न अंग है। यह मंदिर सागर तट पर बने उन सात मंदिरों में से एक है जिन्हें एक श्रृंखला के रूप में बनाया गया है। हर मंदिर से अगला मंदिर दिखता है। सैलानियों के बीच लोकप्रिय इन मंदिरों पर हिन्दु मिथकों का स्पष्ट प्रभाव देखा जा सकता है।

माना जाता है कि बुरी आत्माओं और घुसपैठियों से इस मंदिर की सुरक्षा इसकी शिला के नीचे रहने वाले विषैले सर्प करते हैं। एक कथा के अनुसार निरर्थ के दुपट्टे से बना एक विशाल समुद्री सर्प इस मंदिर की आज भी सुरक्षा करता है।

जीर्णोद्धार[संपादित करें]

१९८० में मंदिर की शिला भुरभुरी होकर झडने लगी थी और मंदिर और इसके आसपास के क्षेत्र को खतरनाक घोषित कर दिया गया था।[4] तब जापान की सरकार ने इंडोनेशिया की सरकार को इस मंदिर के बचाने के लिए 800 अरब इंडोनेशियाई रुपियाह का ऋण दिया था [5]) इसके फलस्वरूप तनाह लोत की चट्टान के लगभग एक तिहाई हिस्से को कृत्रिम चट्टान से ढककर एक नया रूप दिया गया है जिसका पर्यवेक्षण जापानियों द्वारा स्वयं किया गया है।

पर्यटन[संपादित करें]

तनाह लोत के आसपास का क्षेत्र अत्यधिक रूप से व्यवसायिक है और लोगों को इस क्षेत्र में प्रवेश के लिए भुगतान करना पड़ता हैं। मंदिर तक पहुँचने के लिए, आगंतुकों को बाली लोगों के एक बाजार से होकर गुजरना पडता है जो यादगार वस्तुयें बेचते हैं। चट्टान की चोटी पर, पर्यटकों के लिए रेस्तरां बनाये गये हैं।

यह भी देखें[संपादित करें]

संदर्भ[संपादित करें]

  1. South-East Asia on a shoestring. Lonely Planet South-East Asia: On a Shoestring. Lonely Planet Edition 7. Lonely Planet Publications, 1992. ISBN 0-86442-125-7, ISBN 978-0-86442-125-8. 922. pp257
  2. Philip Hirsch, Carol Warren. The politics of environment in Southeast Asia: resources and resistance. Publisher Routledge, 1998 ISBN 978-0-203-03017-2. 325 pages. pp 242-244
  3. South-East Asia on a shoestring. Lonely Planet South-East Asia: On a Shoestring. Lonely Planet Edition 7. Lonely Planet Publications, 1992. ISBN 0-86442-125-7, ISBN 978-0-86442-125-8. 922. pp257
  4. Pringle, p 192-194
  5. 1980 exchange rate of US $1 to Rp 6000 from Gordon De Brouwer, Masahiro Kawai. Indonesian Rupiah in Exchange rate regimes in East Asia Vol 51. Publisher: Routledge, 2004. ISBN 0-415-32281-2, ISBN 978-0-415-32281-2. 466 pages

बाह्य सूत्र[संपादित करें]

Erioll world.svgनिर्देशांक: 8°37′16″S 115°05′14″E / -8.62107, 115.08716

साँचा:इंडोनेशिया के पर्यटन आकर्षण साँचा:इंडोनेशिया के हिन्दु मंदिर