तंत्रीय प्रौद्योगिकी

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जटिल परियोजनाओं के संचालन में तंत्रीय प्रौद्योगिकी की जरूरत पड़ती है : स्पेसक्राफ्ट से लेकर चिप तक; रोबोटिक्स से लेकर विशाल साफ्टवेयरों के निर्माण में यह अपने कुछ उपकरणों (माडेलिंग, सिमुलेशन, आवश्यकता विश्लेषण, समय-निर्धारण आदि) का प्रयोग करके कार्य को सुचारु रूप से आगे बढने मे मदद करती है।

तंत्रीय प्रौद्योगिकी या सिस्टम्स इंजिनीयरिंग (Systems engineering) प्रौद्योगिकी का एक ऐसा क्षेत्र है जो ज्ञान की अलग-अलग विधाओं को परस्पर जोड़ता है। जटिल कृत्रिम तंत्रों के विकास एवं समन्वय के लिये इसकी आवश्यकता होती है।

अन्य मिलते-जुलते क्षेत्र[संपादित करें]

ज्ञान के अनेक ऐसे क्षेत्र हैं जो तंत्रीय प्रौद्योगिकी से बहुत निकट का सम्बन्ध रखते हैं। इन्हीं क्षेत्रों के बदौलत ही तंत्रीय प्रौद्योगिकी एक अलग क्षेत्र के रूप में विकसित हो पाया है। इनमें से कुछ इस प्रकार है:

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

अन्य पठनीय सामग्री[संपादित करें]

  • Harold Chestnut, Systems Engineering Methods. Wiley, 1967.
  • Harry H. Goode, Robert E. MacholSystem Engineering: An Introduction to the Design of Large-scale Systems, McGraw-Hill, 1957.
  • David W. Oliver, Timothy P. Kelliher & James G. Keegan, Jr. Engineering Complex Systems with Models and Objects. McGraw-Hill, 1997.
  • Simon Ramo, Robin K. St.Clair, The Systems Approach: Fresh Solutions to Complex Problems Through Combining Science and Practical Common Sense, Anaheim, CA: KNI, Inc, 1998.
  • Andrew P. Sage, Systems Engineering. Wiley IEEE, 1992.
  • Andrew P. Sage, Stephen R. Olson, Modeling and Simulation in Systems Engineering, 2001.

बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]