ज्वार-भाटा

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ज्वार के समय फण्डी की खाड़ी का दृष्य
भाटा के समय फण्डी की खाड़ी का दृष्य

धरती पर स्थित सागरों के जल-स्तर का सामान्य-स्तर से उपर उठना ज्वार तथा नीचे गिरना भाटा कहलाता है। ज्वार-भाटा की घटना केवल सागर पर ही लागू नहीं होती बल्कि उन सभी चीजों पर लागू होतीं हैं जिन पर समय एवं स्थान के साथ परिवर्तनशील गुरुत्व बल लगता है। (जैसे ठोस जमीन पर भी)

पृथ्वी, चन्द्रमा और सूर्य की पारस्परिक गुरुत्वाकर्षण शक्ति की क्रियाशीलता ही ज्वार-भाटा की उत्पत्ति का प्रमुख कारण हैं।

== ज्वार-भाटा के प्र उच्च ज्वार भाटा तथा दो बराबर shorelines अनुभव कुछ कम दो ज्वार-भाटे नामक एक दिन एक अर्ध-ज्वार हैं।ये दिवाचर होते हैं। कुछ स्थानों पर केवल एक उच्च अनुभव और प्रत्येक दिन एक कम ज्वार, दैनिक ज्वार कहते हैं।


उच्च ज्वार की चित्रीय परिकल्पना
निम्न ज्वार की चित्रीय परिकल्पना

- जब सूर्य, पृथ्वी तथा चन्द्र्मा एक सीध में होते हैं।

- जब सूर्य, पृथ्वी तथा चन्द्र्मा समकोणिक अवस्था में होते हैं।

पृथ्वी के चक्कर लगाता चन्द्रमा

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

वाह्य सूत्र[संपादित करें]