जेम्स डी. वाटसन

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जेम्स डी. वाटसन, एक अमेरिकन जीवाणु वैज्ञानिक हैं। वे डी.एन.ए. {deoxyribonucleic acid (D.N.A.)} की बनावट पता करने के लिये जाने जाते हैं। इस कार्य के लिये उन्हे, फ्रैन्सिस क्रिक (Francis Crick), और मॉरिस विल्किंस (Maurice Wilkins) को १९६२ में नोबल पुरुस्कार मिला।

जन्म और प्रारम्भिक जीवन[संपादित करें]

जेम्स डी. वाटसन (James Dewey Watson) का जन्म ८ अप्रैल १९२८ को शिकागो में हुआ था। उन्होंने शिकागो विश्वविद्यालय में प्राणिशास्त्र की पढ़ाई की और उसके बाद इंडियाना विश्वविद्यालय से पी.एच.डी. की डिग्री प्राप्त की। १९५० के दशक में, कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय (Cambridge University) में, फ्रांसिस क्रिक (Francis Crick) के साथ काम करते हुये, उन्होंने डी.एन.ए. {deoxyribonucleic acid (D.N.A.)} की बनावट का पता लगाया। इसके लिए वाटसन एवं क्रिक को १९६२ में नोबल पुरूस्कार मिला। नोबल कमेटी ने पुरूस्कार देते समय, मॉरिस विल्किंस (Maurice Wilkins) के द्वारा, इस क्षेत्र में किये गये कार्य को सराहा और उन्हे भी, नोबल पुरूस्कार में, शामिल किया। आप यहां क्रिक का साक्षात्कार सुन सकते हैं जिसमें वे बताते हैं कि उन्होंने और वाटसन ने, डी.एन.ए. बनावट का कैसे पता लगाया।

डी.एन.ए. की बनावट[संपादित करें]

डी.एन.ए. की बनावट

D.N.A. की बनावट डबल हेलिक्स (Double helix) की तरह है। यह किस तरह से पता चला, इसी का वर्णन वाटसन ने 'द डबल हेलिक्स' (The Double helix) पुस्तक में लिखा है। वाटसन और क्रक ने इस बनावट को किस तरह से पता लगाया, इसका वर्णन उन्होने 'द डबल हेलिक्स' (The Double helix) पुस्तक में लिखा है। खेल खेल में डीएनऐ के बारे में जानने के लिये यहां चटका लगायें।

वाटसन और क्रिक डी.एन.ए. के महत्व को जानते थे और यह भी जानते थे कि जो इसकी बनावट का पता लगायेगा उसे नोबल पुरस्कार मिलेगा। उस समय होड़ लगी थी कि कौन यह पहले कर लरगा। इस बात ने इस वर्णन को रोमांचकारी बना दिया था। इसका अपना प्रवाह है। इस पुस्तक को एक बार पढ़ना शुरू करने पर छोड़ने का मन नहीं करता है।

इस पुस्तक की सबसे अच्छी बात यह है कि इस पुस्तक को पढ़ने या समझने के लिये आपको प्राणिशास्त्र के ज्ञान की जरूरत नहीं है। यह इसके बिना भी आसानी से समझ में आती है।

वाटसन - विवाद[संपादित करें]

वाटसन आजकल विवाद में फंस गये हैं। कुछ समय पहले, संडे टाइम्स के साथ साक्षात्कार में उन्होंने कहा कि वे

'gloomy about prospect of Africa..............all over social policies are based on the fact that their intelligence is the same as ours .....where as all the testing says not really.' अफ्रीका के भविष्य के बारे में चिन्तित हैं... सारी सामाजिक नीतियां इस पर आधारित हैं कि उनकी बुद्घि हमारे समान है... पर सारे टेस्ट इसके विपरीत हैं।

वाटसन ने, इस कथन के लिये, माफी मांग ली। हांलाकि उन्हें, कोल्ड स्प्रिंग हार्बर प्रयोगशाला (Cold Spring Harbour Laboratory, Long Island U.S.A.) से, कार्य-मुक्त कर दिया गया। साइंस म्यूज़ियम लंडन (Science Museum, London) में उनका प्रस्तुतीकरण भी रद्द कर दिया गया।

स्रोत[संपादित करें]