जूनो (अंतरिक्ष यान)

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बृहस्पति के आगे जूनो शोध यान का काल्पनिक चित्र

जूनो (अंग्रेज़ी: Juno) अमेरिकी अंतरिक्ष अनुसन्धान परिषद्, नासा, द्वारा हमारे सौर मंडल के पाँचवे ग्रह, बृहस्पति, पर अध्ययन करने के लिए पृथ्वी से 5 अगस्त 2011 को छोड़ा गया एक अंतरिक्ष शोध यान है।

यान की यात्रा और शोध की योजना[संपादित करें]

इसे पृथ्वी से बृहस्पति पहुँचने में 5 साल लगेंगे और अनुमान है कि जून 2016 में यह बृहस्पति के इर्द-गिर्द ऐसी परिक्रमा कक्षा में स्थान लेगा जो इसे उस ग्रह के ध्रुवों के ऊपर से ले जाया करेगी। वैज्ञानिक इसे बृहस्पति के 33 चक्कर लगवाएँगे, जिन्हें पूरा करने में इसे अक्टूबर 2017 तक का समय लग जाएगा। इस समय में यह यान उस ग्रह की बनावट, चुम्बकीय क्षेत्र और (कुछ हद तक) मौसम के बारे में जानकारी बटोरकर पृथ्वी की ओर प्रसारित करता रहेगा। बृहस्पति एक गैस दानव ग्रह है और जूनो यान यह पता लगाने की कोशिश करेगा की उस हज़ारों मील मोटी गैस की परत के नीचे कोई पत्थरीला केंद्र है भी कि नहीं। वातावरण में आक्सीजन और हाइड्रोजन कि मात्राओं का अध्ययन करके पानी की मात्रा का भी अंदाज़ा लगाने का प्रयास किया जाएगा। अक्टूबर 2017 में, ग्रह की 33 परिक्रमाएँ पूरी होने पर इस यान को धीमा कर के बृहस्पति के वायुमंडल में घुसाकर ध्वस्त कर दिया जाएगा।[1][2]

सौर उर्जा का प्रयोग[संपादित करें]

बृहस्पति सूरज से दूर है और वहाँ सूरज की रौशनी बहुत मध्यम दिखती है, जिस से वहाँ पर पहुँचे हुए यानों में सौर उर्जा का प्रयोग संभव नहीं रहा है। उसकी बजाये सारे यानों ने परमाणु ऊर्जा इस्तेमाल की है। लेकिन सौर प्रौद्योगिकी में तरक्की होने से अब ऐसे उपकरण बन गएँ हैं जो इस धीमी रौशनी में भी बिजली बना सकते हैं। जूनो बृहस्पति जाने वाले पहला यान होगा जो सौर उर्जा का प्रयोग करेगा। इसपर बड़े-बड़े सौर पैनल लगे हुए हैं जिनका कुल क्षेत्रफल 650 वर्ग फ़ुट से भी अधिक है और जो हर समय लगभग 450 वाट बिजली पैदा करेंगे।

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. Juno - Mission Info Accesses April 18th, 2011
  2. Juno - Mission Overview NASA mission pages. 03.03.09. Accessed April 18th, 2011