जूं

मुक्त ज्ञानकोश विकिपीडिया से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज
नर एवं मादा जूँ - माचिस की तिल्ली के नोक से तुलना

जूं (Head Louse) एक परजीवी है जो मनुष्य के शरीर में पैदा हो जाते हैं। यह सामान्यत: बालों में पाये जाते हैं।

भारतीय स्त्रियों में बाल रखने की प्रथा है। हर सौभाग्यवती नारी बाल रखना पसंद करती है। मनुष्य शरीर में जो परजीवी पैदा हो जाते हैं, उनमें जूं मुख्य हैं। जूं को दूसरे नामों से भी बुलाते है। चिलुआ इनका दूसरा नाम है - दोनो में जो पहिचान होती है, उसमे चिलुआ सफ़ेद रंग का होता है, और जूं काले रंग का होता है। जूं सिर के बालों में पनपता है और चिलुआ शरीर मे पहने गये कपडों में पसीने वाले स्थानों में पैदा हो जाते हैं। दोनो का काम ही शरीर का खून पीना होता है.

जूं से होने वाले रोग[संपादित करें]

बालों में जूम किसी की खोपडी से चढ जाते हैं और रातों रात अपने असंख्य अंडों जिन्हे लीख भी कहते है,को पैदा करने के बाद तीसरे दिन ही वे लीख फ़ूट कर जूं के बच्चे जिन्हें सिरुइया कहते हैं,पैदा हो जाते हैं,फ़िर यह अपने द्वारा सिर में बहुत ही बुरी तरह से खून को पीते हैं,और जब यह खून पीते है,तो सिर को बुरी तरह से खुजलाना पडता है,इस खुजलाने के अन्दर सिर में नाखून का जहर फ़ैलने से घाव तक बन जाते हैं,अधिक जूं होने के बाद वे बहुत ही तरीक्से से साफ़ किये जाते हैं,आजकल औरतें जूं को साफ़ करने के लिये कई तरह के केमिकल प्रयोग करती हैं,उनका भी प्रभाव सिर और आंखों के प्रति बुरा पडता है,अगर एक जूं किसी तरह से किसी के खाने में चला जावे तो जलोदर नामका रोग हो जाता है,और पेट में पानी बढता चला जाता है,इसका कोई इलाज आजतक तक दुनिया मे नही है.

जूं को निकालने के देशी उपाय[संपादित करें]

महीन दांतों वाली ककई या जिसे कंघी भी कहते हैं,बाजार से लाकर सिर से नहाकर बालों को उससे साफ़ करना चाहिये,और बालों को साफ़ करते वक्त जमीन पर बैठ कर किसी रद्दी पेपर को बिछा लेना चाहिये,अधिकतर औरतें ककई करते वक्त निकलने वाली जूं को अपने नाखूनों के द्वारा मारती रहती हैं,और जूं का जहर हाथो के नाखूनों से शरीर मे जाने के साथ जलोदर रोग होने की संभावना अधिक होती है

  • कम से कम केमिकल का प्रयोग करना चाहिये.
  • रोजाना अपने शरीर को साफ़ रखना चाहिये,
  • किसी दूसरे के पास बैठने पर दूरी बनाकर रखनी चाहिये,और जो औरत अपने शरीर को बार खुजला रही हो,उससे तो बहुत ही दूर रहना चाहिये.
  • जमजुई शरीर में जननांगों में होती हैं,और अधिकतर उनके होती हैं,जिनके जननांगों के बाल बहुत बढ जाते हैं और जो संभोग के बाद अपने जननांगों को सही तरीके से साफ़ नही करते हैं.इन परजीवी कीडों के द्वारा एड्स भी होता है.
  • संसार के डाक्टरों की नजर अभी इन परजीवी कीडों पर नही है,मगर जहां पानी और सफ़ाई के साधनों में कमी है,वहां पर स्वास्थ्य कार्य कर्ताओं को विशेष ख्याल रखना चाहिये.