जीववैज्ञानिक वर्गीकरण
जीव जगत के समुचित अध्ययन के लिये आवश्यक है कि विभिन्न गुणधर्म एवं विशेषताओं वाले जीव अलग-अलग श्रेणियों में रखे जाऐं। इस तरह से जीवों एवं पादपों के वर्गीकरण को वर्गिकी या वर्गीकरण विज्ञान कहते हैं। अंग्रेजी में वर्गिकी के लिये दो शब्द प्रयोग में लाये जाते हैं - टैक्सोनॉमी (Taxonomy) तथा सिस्टेमैटिक्स (Systematics)। कार्ल लीनियस ने 1735 ई. में सिस्तेमा नातूरै (Systema Naturae) नामक पुस्तक सिस्टेमैटिक्स शब्द के आधार पर लिखी थी। आधुनिक युग में ये दोनों शब्द पादप और जंतु वर्गीकरण के लिए प्रयुक्त होते हैं।
वर्गिकी का कार्य आकारिकी, आकृतिविज्ञान (morphology) क्रियाविज्ञान (physiology), परिस्थितिकी (ecology) और आनुवंशिकी (genetics) पर आधारित है। अन्य वैज्ञानिक अनुशासनों की तरह यह भी अनेक प्रकार के ज्ञान, मत और प्रणालियों का सश्लेषण है, जिसका प्रयोग वर्गीकरण के क्षेत्र में होता है। जीवविज्ञान संबंधी किसी प्रकार के विश्लेषण का प्रथम सोपान है सुव्यवस्थित ढंग से उसका वर्गीकरण; अत: पादप, या जंतु के अध्ययन का पहला कदम है उसका नामकरण, वर्गीकरण और तब वर्णन।
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[संपादित करें] जैविक वर्गीकरण का इतिहास
वर्गीकरण विज्ञान का इतिहास उतना ही पुराना है जितना मानव का इतिहास। समझ बूझ होते ही मनुष्य ने आस पास के जंतुओं और पौधों को पहचानना तथा उनको नाम देना प्रारंभ किया। यूनान (ग्रीस) के अनेक प्राचीन विद्वान, विशेषत: हिपाक्रेटीज (46-377 ईसा पूर्व) ने और डेमॉक्रीटस ( 465-370 ईसा पूर्व), ने अपने अध्ययन में जंतुओं को स्थान दिया है। स्पष्ट रूप से अरस्तू (384-322 ईसा पूर्व) ने अपने समय के ज्ञान का उपयुक्त संकलन किया है। अरस्तू (ऐरिस्टॉटल) उल्लेख में वर्गीकरण का प्रारंभ दिखाई पड़ता है। इनका मत है कि जंतु अपने रहन सहन के ढंग, स्वभाव और शारीरिक आकार के आधार पर पृथक किए जा सकते हैं। उन्होंने पक्षी, मछली, ह्वेल, कीट आदि जंतुसमूहों का उल्लेख किया है और छोटे समूहों के लिए कोलियॉप्टेरा (Coleoptera) और डिप्टेरा (Diptera) आदि शब्दों का भी प्रयोग किया है। इस समय के वनस्पतिविद अरस्तू की विचारधारा से आगे थे। उन्होंने स्थानीय पौधों का सफल वर्गीकरण कर रखा था। ब्रनफेल्स (Brunfels, 1530 ई.) और बौहिन (Bauhim, 1623 ई.) पादप वर्गीकरण को सफल रास्ते पर लानेवाले वैज्ञानिक थे, परंतु जंतुओं का वर्गीकरण करनेवाले इस समय के विशेषज्ञ अब भी अरस्तू की विचारधारा के अंतर्गत कार्य कर रहे थे।
[संपादित करें] आधुनिक वर्गीकरण
इस समय साधारण तौर से काम लाई जानेवाली श्रेणियाँ निम्नलिखित है :
- जगत (Kingdom),
- संघ (Phylum),
- उपसंघ (Subphylum),
- अधिवर्ग (Superclass),
- वर्ग (Class)
- उपवर्ग (Subclass),
- सहगण या कोहऑर्ट (Cohort),
- अधिगण (Superorder),
- गण (order),
- उपगण (Suborder),
- अधिकुल (Superfamily),
- कुल (Family),
- उपकुल (Subfamily),
- आदिम जाति (Tribe),
- वंश (Genus),
- उपवंश (Subgenus),
- जाति (Species) तथा
- उपजाति (Subspecies)
[संपादित करें] पारजैविकी वर्गिकी
परजीवियों में वृहत भिन्नता, जीव वैज्ञानिकों के लिये उनका वर्णन करना तथा उन्हें नामावली बद्ध करना एक बड़ी चुनौती उपस्थित करती है। हाल ही में हुए विभिन्न जातियों को पृथक करने, पहचानने व विभिन्न टैक्सोनॉमी पैमानों पर उनके विभिन्न समूहों के बीच संबंध ढूंढने हेतु डी.एन.ए. प्रयोग पारजैवज्ञों के लिये अत्यधिक महत्वपूर्ण व सहायक रहे हैं।
[संपादित करें] वर्गीकरण श्रेणियां
वर्गीकरण की कुल आठ श्रेणियां (रैंक) हैं।
[संपादित करें] इन्हें भी देखें
- आईयूपीएसी नामकरण - रसायनों के नाम की वैज्ञानिक पद्धति
- द्विपद नामकरण
- वानस्पतिक नाम
[संपादित करें] वाह्य सूत्र
- Tree of Life Web Project - explore complete phylogenetic tree interactively
- Tree of Life illustration - A modern illustration of the complete tree of life.
- Science Magazine Tree of Life - Sample tree of life from Science journal.
- Science journal issue - Issue devoted to the tree of life.
- [1]-Report on recent paper on "pruning" of the tree of life model.
- The Tree of Life by Garrett Neske, The Wolfram Demonstrations Project: "presents an interactive tree of life that allows you to explore the relationships between many different kinds of organisms by allowing you to select an organism and visualize the clade to which it belongs."
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