जींद
| जीन्द | |||||||
| — city — | |||||||
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| समय मंडल: आईएसटी (यूटीसी+५:३०) | |||||||
| देश | |||||||
| राज्य | हरियाणा | ||||||
| जिला | जींद | ||||||
| जनसंख्या | 136,089 (2001 के अनुसार [update]) | ||||||
| क्षेत्रफल • ऊँचाई (AMSL) |
• 227 मीटर (745 फी॰) |
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विभिन्न कोड
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निर्देशांक: जीन्द हरियाणा में स्थित एक प्रमुख शहर है। महाभारत की कई कथाएं जीन्द से जुड़ी हुई हैं। इसके अलावा वामन पुराण, नारद पुराण और पद्म पुराण में भी जीन्द का उल्लेख मिलता है। यह कहा जाता है कि महाभारत काल में पाण्डवों ने यहां पर विजय की देवी जयंती देवी के मन्दिर का निर्माण किया था। युद्ध में कौरवों को हराने के लिए उन्होंने इसी मन्दिर में पूजा की थी। देवी के नाम पर ही इसका नाम जयंतापुरी रखा गया था। समय के साथ इसका नाम जयंतापुरी से बदलकर जीन्द हो गया।
जीन्द में पर्यटक अर्जुन स्टेडियम, दूध प्लांट, पशुओं का चारा प्लांट, बुलबुल रेस्टोरेन्ट और अनाज मण्डी घूमने जा सकते हैं। इनके अलावा पर्यटक अनेक पवित्र स्थलों की यात्रा कर सकते हैं और घूमने के साथ-साथ तीर्थाटन का लाभ भी उठा सकते हैं। जींद शहर ऐतिहासिक एवं धार्मिक दृष्टि से अत्यन्त महत्त्वपूर्ण है।
अनुक्रम |
[संपादित करें] इतिहास
जींद के बारे में मान्यता है कि इसकी स्थापना महाभारत महाकाव्य के पांडवों ने की थी, जिन्होंने यहाँ एक मंदिर बनवाया था, जिसके इर्द-गिर्द जींद (जैंतपुरी) नगर बसा था। जींद पहले 18वीं शताब्दी में एक सिक्ख सरदार द्वारा स्थापित पंजाब के फुलकियाँ रजवाड़ों में से एक था।
यहाँ पर स्थित सुविख्यात जयन्ती देवी मंदिर के नाम से इस नगर का नाम जींद पड़ा है। पांडवों ने महाभारत का युद्ध लड़ने से पहले अपनी सफलता के लिए 'विजय देवी-जयन्ती देवी' मंदिर का निर्माण करके श्रद्धापूर्वक देवी की आराधना की। जयन्ती देवी की आराधना के बाद ही पांडवों ने कौरवों के विरुद्ध सत्य समर्पित महासंग्राम किया, जो महाभारत के रूप में विश्वविख्यात हुआ।
[संपादित करें] कृषि और खनिज
यह क्षेत्र नहरों और नलकूपों द्वारा विस्तृत रूप से सिंचित है। गेहूँ व चावल प्रमुख फ़सलें हैं, अन्य फ़सलों में बाजरा, तिलहन, चना और गन्ना शामिल हैं। जींद एक महत्त्वपूर्ण स्थानीय कृषि बाज़ार है।
[संपादित करें] उद्योग और व्यापार
यहाँ के उद्योगों में सूती वस्त्र, चीनी, स्टील की ट्यूब, मशीनों के पुर्ज़ों के साथ-साथ कपास ओटने, इस्पात की री-रोलिंग और हथकरघे से बुनाई शामिल हैं।
[संपादित करें] यातायात और परिवहन
दिल्ली-फ़िरोज़पुर रेलमार्ग पर स्थित जींद रेलमार्ग द्वारा पानीपत से और सड़क मार्ग द्वारा दिल्ली व हरियाणा के अन्य महत्त्वपूर्ण शहरों से जुड़ा है।
[संपादित करें] शिक्षण संस्थान
यहाँ स्थित महाविद्यालय कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से संबद्ध हैं।
[संपादित करें] जनसंख्या
2011 की जनगणना के अनुसार इस शहर की जनसंख्या 3,03,923, और इस ज़िले की कुल जनसंख्या 13,32,042 है।
[संपादित करें] प्रमुख आकर्षण
[संपादित करें] अश्वनी कुमार तीर्थ
जीन्द में स्थित अश्वनी कुमार तीर्थ असान गांव में है। यह जीन्द से 14 किमी. दूर है। इस स्थान से अश्वनी देवाताओं की कथा जुड़ी हुई है। यहां पर एक तालाब भी है। स्थानीय लोगों का मानना है कि मंगलवार के दिन इसमें स्नान करने से व्यक्ति के पाप धुल जाते हैं। महाभारत, पदम पुराण, नारद पुराण और वामन पुराण में भी इस तालाब का उल्लेख मिलता है।
[संपादित करें] वराह
वराह जीन्द से 10 किमी. दूर बराह गांव में स्थित है। वामन पुराण, पदम पुराण और महाभारत के अनुसार भगवान विष्णु ने यहां वराह का अवतार लिया था।
[संपादित करें] इकाहमसा
इकाहमसा जीन्द की दक्षिण-पश्चिम दिशा में पांच किमी. की दूरी पर स्थित है। स्थानीय परंपराओं के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण गोपियों से बचने के लिए हंस के रूप में यहीं पर छुपे थे। यह बहुत खूबसूरत है और पर्यटक यहां तक आसानी से पहुंच सकते हैं।
[संपादित करें] मुंजावता
निरजन में स्थित मुंजावता बहुत खूबसूरत है और जीन्द से 6 किमी. की दूरी पर है। वामन पुराण के अनुसार यहां से भगवान महादेव की कथा जुड़ी हुई है। यह माना जाता है कि जो व्यक्ति एक रात यहां पर उपवास रख ले उसे भगवान गणेश का आवास गणपत्या मिलता है।
[संपादित करें] यक्षिणी तीर्थ
यह जीन्द से 8 किमी. की दूरी पर दिखनीखेड़ा में स्थित है। यह माना जाता है कि जो व्यक्ति यहां स्नान कर लेता है और यक्षिणी को खुश कर देता है, उसके सभी पाप धुल जाते हैं।
[संपादित करें] पुष्कर
पुष्कर जीन्द से 11 किमी. की दूरी पर पोंकर खेड़ी गांव में है। पुराणों के अनुसार इसकी खोज जमादाग्नि के पुत्र परशुराम ने की थी। प्राचीन समय में यहां पर देवों और पूर्वजों को खुश करने के लिए अश्वमेघ यज्ञ भी किया गया था। पुष्कर के अलावा कपिल महायक्ष घूमने भी जाया जा सकता है।