जलविद्युत

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थ्री जार्ज बांध - विश्व का सबसे बड़ा जलविद्युत स्टेशन

गिरते हुए या बहते हुए जल की उर्जा से जो विद्युत उत्पन्न की जाती है उसे जलविद्युत (Hydroelectricity) कहते हैं। सन् २००५ में विश्व भर में लगभग ८१६ GWe (जिगावाट एलेक्ट्रिकल) जलविद्युत उत्पन्न की जाती थी जो कि विश्व की सम्पूर्ण विद्युत उर्जा का लगभग २०% है।

[संपादित करें] जल विद्युत के लाभ

  • ऊर्जा का एक नवीकरण योग्य स्रोत – दुर्लभ ईंधन संसाधनों की रक्षा करता है ।
  • प्रदूषण रहित और इसलिए पर्यावरण अनुकूल ।
  • दीर्घकालिक – वर्ष 1897 में दार्जिलिंग में पूर्ण की गई पहली जल विद्युत परियोजना अभी तक प्रचालनरत है ।
  • ऊर्जा के अन्य स्रोतों की तुलना में उत्पादन, प्रचालन तथा अनुरक्षण की लागत कम है ।
  • शीघ्र प्रारंभ तथा रूकने की क्षमता और भार को त्वरित स्वीकार/अस्वीकार करना इसे अधिकतम मांग को पूरा करने और प्रणाली की विश्‍वसनीयता तथा स्थिरता में वृद्धि करने के लिए उपयुक्त बनाता है ।
  • तापीय (35 प्रतिशत) और गैस (लगभग 50 प्रतिशत) की तुलना में उच्चतर दक्षता (90 प्रतिशत से अधिक) ।
  • उत्पादन की लागत प्रारंभिक स्थापन के पश्‍चात मुद्रास्फीति के प्रभावों से मुक्त होती है ।
  • भण्डारण आधारित जल विद्युत योजनाएं अक्सर सिंचाई, बाढ़ नियंत्रण, पेयजल आपूर्ति, नौवहन, मनोरंजन, पर्यटन, मत्स्य पालन आदि हेतु सहायक लाभ मुहैया करवाती है ।
  • सुदूर क्षेत्रों में अवस्थित होने के कारण यह भीतर के पिछड़े क्षेत्रों के विकास में परिणत होती हैं (शिक्षा, चिकित्सा, सड़के, संचार, दूर संचार आदि)।

[संपादित करें] भारत में जलविद्युत की अनुमानित क्षमता

भारत में विद्यमान आर्थिक रूप से दोहन योग्य तथा अर्थक्षम जल संभाव्यता 66 प्रतिशत भार कारक पर 84,000 मेगावाट आंकलित की गई है (1,48,701 मेगावाट स्थापित क्षमता) । इसके अतिरिक्त, छोटे, लघु तथा सूक्ष्म जल विद्युत योजनाओं से स्थापित क्षमता के 6780 मेगावाट का आंकलन किया गया है। 94,000 मेगावाट की संचित स्थापित क्षमता के साथ पम्प की गई भण्डारण योजनाओं हेतु 56 स्थलों की भी पहचान की गई है । तथापि, अभी तक इस संभाव्यता के केवल 19.9 प्रतशित का ही दोहन किया जा सका है।

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