जलगैस

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जलगैस (Water gas) एक कृत्रिम गैस (synthesis gas) है। इसमें कार्बन मोनोआक्साइड और हाइड्रोजन मिश्रित होती है। कोयला गैस के साथ मिलाकर जलगैस ईंधन में काम आती है। इससे बड़ी मात्रा में हाइड्रोजन तैयार होती है और पेट्रोलियम तथा मेथिल ऐलकोहल का संश्लेषण भी होता है। यह बहुत उपयोगी है किन्तु इसके प्रयोग में विशेष सावधानी बरतनी पड़ती है क्योंकि जलगैस कार्बन मोनोक्साइड के कारण प्रबल विषाक्त होती है। कोई गंध न हेने के कारण विष की भयंकरता बढ़ जाती है। इसकी ज्वाला बड़ी गरम होती है। ताप 1,600 डिग्री सें. से भी ऊपर उठ जाता है।

निर्माण[संपादित करें]

जलगैस का निर्माण उत्पादक गैस की भाँति ही होता है। तप्त कोयले पर पहले वायु और पीछे भाप को बारी बारी से पारित करने से यह बनती है। वायु के प्रवाह से कोयले का ताप ऊँचा उठता है तथा 1,500 डिग्री से 1,550 डिग्री सें. तक पहुँच जाता है। अब वायु का प्रवेश बंद कर भाप को पारित करते हैं। इससे ताप तत्काल गिर जाता है, पर फिर ऊपर उठता है। इससे जलगैस बनती है, जिससे प्रधानतया 90-95 प्रतिशत (आयतन में) हाइड्रोजन और कार्बन मोनोक्साइड रहते हैं। थोड़ा नाइट्रोजन और कार्बन डाइआक्साइड भी इसमें रहते हैं।

C + H2O → CO + H2

यह अभिक्रिया उष्माशोषी (endothermic) है; इसीलिये क्रिया को चलाये रखने के लिये कोक को बारी-बारी से गरम करते रहना प। दता है जिसके लिये बीच-बीच में कोक पर वायु प्रवाहित की जाती है।

जलगैस का जनित्र उत्पादक गैस के जनित्र जैसा ही होता है। साधारणतया कोक, पर ग्रेट ब्रिटेन में ऐंथ्रेसाइट और कहीं-कहीं बिटुमिनी कोयले का भी, उपयोग होता है। कोक के टुकड़ों का 2 से 2.5 इंच का होना अच्छा होता है। कोक में गंधक कम रहना चाहिए। एक टन कोक से 50,000 - 55000 घन फुट जलगैस प्राप्त होती है, जिसका कलरीमान 290-300 ब्रिटिश-ऊष्मक मात्रक होता है। प्रति 1,000 घन फुट गैस में लगभग 35 पाउंड भाप लगती है।

जलगैस का विश्लेषण[संपादित करें]

सामान्य जलगैस का विश्लेषण इस प्रकार है :

घटक गैसें ---- प्रतिशत आयतन

कार्बन मोनोक्साइड 40

हाइड्रोजन 51

कार्बन डाइ-आक्साइड 5

नाइट्रोजन 3.5

मेथेन 0.5

इन्हें भी देखें[संपादित करें]