जगदीश एन. भगवती

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Jagdish Bhagwati
Neoclassical economics
Born 26 जुलाई 1934 (1934-07-26) (आयु 80)
Nationality India
Field International economics, globalization
Opposed Joseph E. Stiglitz, Dani Rodrik
Influences Robert Solow
Influenced Paul Krugman

जगदीश नटवरलाल भगवती (जन्म 26 जुलाई, 1934) एक भारतीय अर्थशास्त्री हैं और कोलम्बिया विश्वविद्यालय में अर्थशास्त्र और कानून के प्रोफ़ेसर हैं.[1] उन्हें अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में अनुसंधान के लिए जाना जाता है. वे मुक्त व्यापार के समर्थक के रूप में भी विख्यात हैं. वे न्यूयॉर्क में विदेश सम्बन्ध परिषद् में एक आवासी सदस्य (रेज़िडेंट फेलो) भी हैं.

प्रारंभिक वर्ष और निजी जीवन[संपादित करें]

भगवती का जन्म मुंबई में 1934 में एक गुजराती परिवार में हुआ. उन्होंने सिडेनहेम कॉलेज, [[मुम्बई|मुंबई]] से स्नातक की उपाधि प्राप्त की. इसके बाद वे "सीनियर दर्जे" के साथ अर्थशास्त्र में दो साल का बीए(BA) का कोर्स करने के लिए कैम्ब्रिज चले गए (जैसा कि उनके सहयोगी और नोबल पुरस्कार विजेता अमर्त्य सेन ने ट्रिनिटी कॉलेज में किया), जहां वे सेंट जोन्स कॉलेज, कैम्ब्रिज के एक सदस्य बन गए और उन्होंने 1956 में डिग्री प्राप्त की.

सेंट जॉन्स कॉलेज में भगवती को अन्य भारतीय अर्थशास्त्रियों ने भी प्रभावित किया, जिनमें सर पार्थ दास गुप्ता और भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह भी शामिल थे.

उन्होंने 1967 में मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी से पीएच. डी.(Ph.D.) की डिग्री प्राप्त की. भगवती ने पद्मा देसाई से विवाह किया. वे भी कोलम्बिया में अर्थशास्त्री हैं और रुसी विशेषज्ञ हैं. उनकी एक बेटी है. वे भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश पी. एन. भगवती और एक प्रख्यात न्यूरोसर्जन एस. एन. भगवती के भाई हैं. भगवती और देसाई का 1970 का संयुक्त ओईसीडी(OECD) अध्ययन, इन्डियाः प्लानिंग फॉर इन्डस्ट्रिअलाईज़ेशन (भारत: औद्योगीकरण के लिए नियोजन) उनके समय का उल्लेखनीय योगदान है.

भगवती एक लोकतंत्रवादी हैं.[2]

कैरियर[संपादित करें]

भगवती ने 2001 में विश्व व्यापार संगठन के बाहरी सलाहकार के रूप में काम किया, 2000 में संयुक्त राष्ट्र में एक विशेष नीति सलाहकार के रूप में काम किया, और 1991 से 1993 तक व्यापार और शुल्क पर सामान्य करार के महानिदेशक के अर्थशास्त्र नीति सलाहकार के रूप में काम किया. 1968 से 1980 तक, भगवती ने मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टैक्नोलॉजी में अर्थशास्त्र के प्रोफेसर के रूप में काम किया. [1] भगवती वर्तमान में ह्यूमन राइट्स वॉच (एशिया) के अकादमिक सलाहकार बोर्ड में और द सेंटर फॉर सिविल सोसाइटी के बोर्ड ऑफ़ स्कॉलर्स में काम कर रहे हैं. वह विदेश संबंध परिषद में एक वरिष्ठ सदस्य हैं.

2000 में, भगवती ने संयुक्त राज्य अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट के साथ, अमेरिकन एंटरप्राइज इंस्टीट्यूट के द्वारा संयोजित, एक सौहार्दपूर्ण ब्रीफिंग पर हस्ताक्षर किए थे, जो इस बात पर ज़ोर दे रहा था कि पूर्व नियमों के विपरीत, पर्यावरण संरक्षण एजेंसी को पर्यावरणीय मानकों की स्थापना करते वक्त विनियमनों की लागत को ध्यान में रखना चाहिए.

जनवरी 2004 में, भगवती ने एक पुस्तक इन डिफेन्स ऑफ़ ग्लोबलाइजेशन(In Defense of Globalization) प्रकाशित की, जिसमें वे तर्क देते हैं "इस प्रक्रिया (ग्लोबलाइजेशन या वैश्वीकरण का) के पास एक मानव-चेहरा जरूर है, परन्तु हमें इस चेहरे को अधिक स्वीकार्य बनाने की आवश्यकता है."

मई 2004 में, भगवती उन विशेषज्ञों में से एक थे जिन्होंने कोपेनहेगन सहमति(Copenhagen Consensus) परियोजना में हिस्सा लिया.

2006 में, भगवती उन प्रभावी व्यक्तियों के समूह के एक सदस्य थे, जिन्होंने यूएनसीटीएडी(UNCTAD) के कार्य की समीक्षा की. 2010 के प्रारंभ में, भगवती प्रवासी अधिकारों की इंस्टीट्यूट, सिअंजुर-इंडोनेशिया के सलाहकार बोर्ड में शामिल हो गए. <http://imr.or.id>

पुरस्कार[संपादित करें]

  • 2006 में, उन्हें जापान के ऑर्डर ऑफ़ द राइसिंग सन, गोल्ड एंड सिल्वर स्टार से सम्मानित किया गया.
  • उन्हें 2004 में भारतीय वाणिज्य मंडल के द्वारा लाइफटाइम अचीवमेंट पुरस्कार प्रदान किया गया.
  • 2000 में उन्हें पद्म विभूषण पुरस्कार से सम्मानित किया गया.
  • उन्हें 1998 में अंतर्राष्ट्रीय राजनीतिक अर्थव्यवस्था में सीडमेन डिस्टिंगविश्ड अवार्ड से सम्मानित किया गया.
  • 1974 में, उन्हें भारतीय अर्थमितीय सोसाइटी के महालनोबिस मेमोरियल पदक से सम्मानित किया गया.
  • अन्य पुरस्कारों में बर्नहार्ड हार्म्स पुरस्कार (जर्मनी), द केनन एंटरप्राइज़ अवार्ड (संयुक्त राज्य अमेरिका), द फ्रीडम प्राइज़ (स्विट्ज़रलैंड), और जॉन आर. कॉमन्स अवार्ड (संयुक्त राज्य अमेरिका) शामिल हैं.
  • उन्होंने ससेक्स विश्वविद्यालय और इरास्मस विश्वविद्यालय और अन्य कई विश्वविद्यालयों से मानद डिग्रीयां भी प्राप्त की है.[2][3]

भगवती के सत्तरवें जन्म दिन पर पॉल सैमुएलसन ने फ्लोरिडा के गैनेस्विल्ले में फेस्टसक्रिफ्ट सम्मेलन में जनवरी 2005 को कहा:

  • "मैं एक विद्वान की विद्वत्ता को उनके प्रकाशनों के संख्या के आधार पर नहीं माप सकता. जैसे एक आयत का क्षेत्रफल उसकी लम्बाई और चौड़ाई के गुणनफल के बराबर होता है, ठीक उसी तरह से एक व्यक्ति के जीवन की उपलब्धियों की गुणवत्ता उसकी बुद्धि और उसके हर गुण पर निर्भर होती है........

जगदीश भगवती हेडन से बहुत कुछ मिलते हैं: जिन्होंने 100 से अधिक संगीत की धुनों की रचना की है, जिसमें से हर धुन दूसरी धुन से अलग है....... मानव जाति, चाहे वह उन्नत अर्थव्यवस्था से सम्बंधित हो, या गरीबी से उठकर आगे बढ़ रही हो, उसकी स्थिति सुधारने के लिए भगवती ने निरंतर संघर्ष किया है. उन्होंने सबसे अमीर अमेरिका, और एशिया और अफ्रिका के सबसे गरीब क्षेत्रों, दोनों की उत्पादकता में सुधार करने के लिए वैश्वीकरण में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है.[3]

पुस्तकें[संपादित करें]

लेख[संपादित करें]

  • Bhagwati, Jagdish (November 1993). "The Case for Free Trade". Scientific American 269 (5): 18–23. 
  • Bhagwati, Jagdish (Fall 2009). "Feeble Critiques: Capitalism's Petty Detractors". World Affairs.  [4]

यह भी देखें[संपादित करें]

संदर्भ[संपादित करें]

बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]