चिन्मय मिशन

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चिन्मय मिशन का प्रतीक चिह्न
चित्र:RedChinmayaOm.png
चिन्मय मिशन का ओम्

चिन्मय मिशन सन् १९५३ में स्थापित एक आध्यात्मिक, शैक्षिक तथा धार्मिक संस्था है। इसका परिचालन सेन्ट्रल चिन्मय मिशन ट्रस्ट द्वारा होता है। इसकी स्थापना स्वामी चिन्मयानंद के शिष्यों द्वारा स्वामी जी द्वारा किये जा रहे कार्यों को संगठित स्वरूप प्रदान करने के लिये की गयी थी। इस समय भारत एवं विश्व के अन्य भागों में इसके ३०० से अधिक केंद्र चल रहे हैं।

गतिविधियाँ[संपादित करें]

वेदान्त प्रशिक्षण[संपादित करें]

हिन्दू धर्म का मुख्य दर्शन वेदान्त है। जैसे भौतिकी, रसायनशास्त्र, जीवविज्ञान आदि बाह्यजगत् के भौतिक विज्ञान है वैसे ही वेदान्त आन्तरिक जगत् का विज्ञान है। यह जीवन का विज्ञान है। मानव निर्माण में सहायक वेदान्त का ज्ञान चिन्मय मिशन ज्ञानयज्ञ, आध्यात्मिक शिविर, मिशन केन्द्रों पर नियमित कक्षायें, सवाध्याय मण्डल, पत्राचार पाठ्यक्रम, ई मेल वेदान्त, वेदान्त पाठ्यक्रम के द्वारा देता है।

बाल विहार[संपादित करें]

स्वामी चिन्मयानन्द जी ने एक बार कहा था " बच्चे ज्ञान से भरने के लिए खाली पात्र नहीं, वे तो प्रज्वलित करने के लिए दीपक है"। बाल विहार में पाँच से पन्द्रह साल के बच्चे सप्ताह में एक बार मिलते हैं। प्रशिक्षित सेवक उनकी बैठक मिशन सेंटर या अपने घर में लगाते हैं। वहाँ बच्चों को प्रेमपूर्ण वातावरण में भजन गाकर, शास्त्रों का पाठ कराकर, पुराणों की कहानियाँ सुनाकर तथा अन्य रुचिकर साधनों से सदाचार और संस्कृति की शिक्षा दी जाती है। भारत तथा अन्य देशों में सैकड़ों बाल विहार चिन्मय मिशन केन्द्रों पर चल रहे हैं।

चिन्मय युवा केन्द्र[संपादित करें]

चिन्मय मिशन के युवा संवर्ग का नाम चिन्मय युवा केन्द्र है। इसमे 16 से 28 वर्ष के बच्चे भाग लेते हैं। इसका उद्देश्य है, " सक्रिय आध्यात्मिक ज्ञान द्वारा युवा शक्ति को सन्मार्ग में लगाना"। इसके लिए युवकों की साप्ताहिक कक्षायें लगती हैं जहाँ उन्हें शास्त्र अध्ययन के द्वारा अपनी निहित शक्ति का ज्ञान कराया जाता है। चिन्मय युवा केन्द्र को संक्षेप में "चिक" कहते है।

सेन्ट्रल चिन्मय वानप्रस्थ संस्थान[संपादित करें]

संक्षेप में इसे "सिसिभिएस" कहते है। यह चिन्मय मिशन के वरिष्ठ नागरिकों का संवर्ग है। इसके अन्तर्गत 60 वर्ष से अधिक आयु के स्त्री - पुरुष संगठित हुए हैं। "सिसिभिएस" वरिष्ठ नागरिकों को आध्यात्मिक लक्ष्य प्राप्त करने की प्रेरणा देता है और उसे प्राप्त करने का मार्ग भी दिखाता है। वह उन्हें समाज पर निर्भर न रहने की प्रेरणा देता है।

देवी मंडल[संपादित करें]

यह संवर्ग केवल महिलाओं के लिए है। वे सप्ताह में एक बार किसी स्थान पर मिलकर शास्त्रों का अध्ययन करती हैं, भजन गाती हैं तथा अन्य सांस्कृतिक कार्यक्रम करती हैं। देवी मण्ड़ल महिलाओं को ऐसा अनुकूल अवसर भी प्रदान करता है जहाँ वे अपनी समस्यायें स्पष्ट रूप से व्यक्त कर उनके समाधान पर विचार करती हैं।

भजन मंडल[संपादित करें]

यह संवर्ग केवल भक्ति को प्रधानता देता है। इसके सदस्य सप्ताह में एक बार मिलकर वैदिक पाठ और भजन करते हैं। इसमें सभी वर्ग के स्त्री पुरुष भाग ले सकते हैं।

विद्यालय और महाविद्यालय[संपादित करें]

चिन्मय मिशन के विद्यालय या महाविद्यालय कुछ भिन्न प्रकार का हैं। इसमें अन्य विषयों के साथ चिन्मय विजन प्रोग्राम भी जोड़ा गया है। यह प्रोग्राम चिन्मय मिशन ने तैयार किया है। यह इतना अधिक उपयोगी सिद्ध हुआ है कि मिशन के विद्यालयों के अतिरिक्त भी 500 बाहरी विद्यालयों में इसे स्वीकार कर लागू किया गया है।

पितामह सदन (वृद्धाश्रम)[संपादित करें]

भारत में चिन्मय मिशन के आठ पितामह सदन है। वे कानपुर, इलाहाबाद, रीवां, तमरायपक्कम, कोयम्बटूर, एलायपल्ले, कोठापटनम् और कोल्हापुर में स्थित है।

इन पितामह सदनों में साधारण खर्चे पर सुविधापूर्ण आवास, शाकाहारी पौष्टिक भोजन, पुस्तकें, टेलीविजन, वीडियों प्लेयर, वीडियों टेप और ध्यान की सुविधायें हैं। यहाँ विशेष ध्यान आध्यात्मिक वातावरण बनाये रखने का होता है। उसके लिए पूजा - पाठ प्रवचन तथा शिवरों का आयोजन किया जाता है।

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]