चित्रा तारा
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आसमान में चित्रा तारा ढूँढने का तरीक़ा - स्वाती तारे (आर्कट्युरस) से सीधी लक़ीर खेंचे
चित्रा या स्पाइका, जिसका बायर नाम "अल्फ़ा वर्जिनिस" (α Virginis या α Vir) है, कन्या तारामंडल का सब से रोशन तारा है। यह पृथ्वी से दिखने वाले सब से रोशन तारों में से पंद्रहवाँ सब से रोशन तारा है। यह पृथ्वी से लगभग 260 प्रकाश वर्ष की दूरी पर हैं। चित्रा वास्तव में एक द्वितारा है जो पृथ्वी से एक तारे जैसा प्रतीत होता है। इसका मुख्य तारा एक नीला दानव तारा है और छोटा तारा एक मुख्य अनुक्रम तारा है।
अनुक्रम |
अन्य भाषाओँ में [संपादित करें]
चित्रा को अंग्रेज़ी में "स्पाइका" (Spica) कहते है।
विवरण [संपादित करें]
चित्रा के दो तारे एक-दुसरे की परिक्रमा हर 4 दिनों में पूरी कर लेते हैं। इन दोनों का ब्यौरा इस तरह है -
- मुख्य तारा - यह एक B1 III-IV श्रेणी का तारा है, जिसकी चमक से ज्ञात होता है के यह एक उपदानव और दानव तारे के बीच का तारा है। इसका व्यास (डायमीटर) सूरज के व्यास का 7.4 गुना है और इसका द्रव्यमान (मास) सौर द्रव्यमान का 10.25 गुना है। इसकी चमक (निरपेक्ष कान्तिमान) सूरज की चमक से 12,100 गुना है और अपने साथी तारे की 8 गुना है। यह एक बेटा सॅफ़ॅई परिवर्ती तारा है, यानि इसकी चमक थोड़ी कम-ज़्यादा होती रहती है।[1] इस तारे का द्रव्यमान इतना है के यह अपना जीवन एक भयंकर महानोवा (सुपरनोवा) धमाके के साथ ध्वस्त होकर पूरा करेगा।
- अमुख्य तारा - इसका व्यास (डायमीटर) सूरज के व्यास का 3.64 गुना है और इसका द्रव्यमान (मास) सौर द्रव्यमान का 6.97 गुना है। इसकी चमक (निरपेक्ष कान्तिमान) सूरज की चमक से 1,500 गुना है।
इन्हें भी देखें [संपादित करें]
सन्दर्भ [संपादित करें]
- ↑ Riddle, R. L.; Bagnuolo, W. G.; Gies, D. R. (December 2001). "Spectroscopy of the temporal variations of α Vir". Bulletin of the American Astronomical Society 33: 1312.