चारा घोटाला

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पशुओं को खिलाये जाने वाले चारे का चित्र जिसके नाम से सरकारी खजाने का पैसा निकाल कर तथाकथित नेता खा गये

चारा घोटाला स्वतन्त्र भारत के बिहार प्रान्त का सबसे बड़ा भ्रष्टाचार घोटाला था जिसमें पशुओं को खिलाये जाने वाले चारे के नाम पर 950 करोड़ रुपये सरकारी खजाने से फर्जीवाड़ा करके निकाल लिये गये।[1]सरकारी खजाने की इस चोरी में अन्य कई लोगों के अलावा बिहार के तत्कालीन मुख्यमन्त्री लालू प्रसाद यादव व पूर्व मुख्यमन्त्री जगन्नाथ मिश्र पर भी आरोप लगा।[2][3] इस घोटाले के कारण लालू यादव को मुख्यमन्त्री के पद से त्याग पत्र देना पड़ा. लेकिन राजनीति के माहिर खिलाड़ी लालू ने अपनी जगह अपनी बीबी राबड़ी देवी को कुर्सी सौंप कर स्वयं ही सबसे बड़ा सबूत पेश कर दिया कि भैंस उनके आगे क्या चीज है वह चारा खाकर सिर्फ़ दूध ही तो देती परन्तु वह दूध की जगह बिहार की जनता को राबड़ी देकर जा रहे हैं।

लोकसभा में प्रमुख विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी द्वारा इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाया गया और सीबीआई जाँच की माँग की गयी। सत्तारुढ़ पार्टी भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस व उसकी सहयोगी जनता दल जैसी दो-दो दिग्गज पार्टियों के नेताओं और नौकरशाही की मिली भगत से की गयी सरकारी खजाने की इस चोरी की गूँज न सिर्फ़ भारत में बल्कि सात समुन्दर पार अमेरिका और ब्रिटेन में भी सुनायी दी जिससे भारत की राजनीति बदनाम हुई।[1][4] हालांकि यह घोटाला 1996 में हुआ था लेकिन जैसे-जैसे जाँच हुई इसकी पर्तें खुलती गयीं और लालू यादव व जगन्नाथ मिश्र जैसे कई सफेदपोश नेता इसमें शामिल नजर आये। मामला लगभग दो दशक तक चला।[5] मीडिया ने भी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभायी जिसके चलते सीबीआई और न्यायपालिका अपनी-अपनी कार्रवाई में कोई कोताही नहीं कर पायी। इससे यह भी साफ हो गया कि इस देश को नेता नहीं बल्कि माफिया चला रहे हैं जिन्होंने इसकी अर्थव्यवस्था को चौपट कर दिया है।[6]

लालू प्रसाद यादव और जदयू नेता जगदीश शर्मा को घोटाला मामले में दोषी करार दिये जाने के बाद लोक सभा से अयोग्य ठहराया गया।[7] चुनाव आयोग के नये नियमों के अनुसार लालू प्रसाद अब 11 साल तक लोक सभा चुनाव नहीं लड़ पायेंगे। उच्चतम न्यायालय ने चारा घोटाला में दोषी सांसदों को संसद की सदस्यता से अयोग्य ठहराये जाने से बचाने वाले प्रावधान को भी निरस्त कर दिया है। लोक सभा के महासचिव एस० बालशेखर ने यादव और शर्मा को सदन की सदस्यता के अयोग्य ठहराये जाने की अधिसूचना जारी कर दी। लोक सभा द्वारा जारी इस अधिसूचना के बाद संसद की सदस्यता गँवाने वाले लालू प्रसाद यादव भारतीय इतिहास में लोक सभा के पहले सांसद हैं और जनता दल यूनाइटेड के एक अन्य नेता जगदीश शर्मा दूसरे, जिन्हें 10 साल के लिये अयोग्य ठहराया गया।[8]

संक्षिप्त परिचय[संपादित करें]

इसे पशुपालन घोटाला ही कहा जाना चाहिए क्योंकि मामला सिर्फ़ चारे का नहीं है। असल में यह सारा घपला बिहार सरकार के ख़ज़ाने से ग़लत ढँग से पैसे निकालने का है। कई वर्षों में करोड़ों की रक़म पशुपालन विभाग के अधिकारियों और ठेकेदारों ने राजनीतिक मिली-भगत के साथ निकाली है।

घपला रोशनी में धीरे-धीरे आया और जाँच के बाद पता चला कि ये सिलसिला वर्षों से चल रहा था। शुरुआत छोटे-मोटे मामलों से हुई लेकिन बात बढ़ते-बढ़ते तत्कालीन मुख्यमन्त्री लालू प्रसाद यादव व नीतीश कुमार तक जा पहुँची।

इस घोटाले के आरोपी एस०बी० सिन्हा के बयान के अनुसार चारा घोटाले का पैसा बिहार के मुख्यमन्त्री नीतीश कुमार को भी मिला था। ए०के० झा ने सीबीआई के विशेष न्यायाधीश आर०आर० त्रिपाठी की अदालत में बताया कि घोटाले के आरोपी एस०बी० सिन्हा से बयान लिया गया था। इसी बयान में इसकी पुष्टि हुई है। एस०बी० सिन्हा ने बताया था कि 1995 के लोकसभा चुनाव में चारा घोटाले के आरोपी विजय कुमार मल्लिक द्वारा एक करोड़ रुपये नीतीश कुमार को भिजवाया गया। यह पैसा उन्हें दिल्ली के एक होटल में दिया गया। नीतीश ने पैसे लेकर धन्यवाद भी कहा। कुछ दिनों बाद फिर घोटाले के आरोपी एस०बी० सिन्हा ने नौकर महेन्द्र प्रसाद के हाथ 10 लाख रुपये पटना में विधायक सुधा श्रीवास्तव के घर पर नीतीश कुमार के लिये भेजे। घोटाले के आरोपी आर०के० दास ने भी कोर्ट में दिये बयान में बताया था कि उसने पाँच लाख रुपये नीतीश कुमार को दिये हैं। नीतीश कुमार 1995 में समता पार्टी के नेता थे। वह एस०बी० सिन्हा को कहते थे कि पैसा नहीं देने पर मामला उजागर कर दिया जायेगा। तत्कालीन विधायक शिवानन्द तिवारी, राधाकान्त झा, रामदास एवं गुलशन अजमानी को भी पैसा देने की बात सामने आयी।

मामला एक-दो करोड़ रुपए से शुरू होकर 950 करोड़ रुपए तक जा पहुँचा। परन्तु कोई पक्के तौर पर नहीं कह सकता कि घपला कितनी रक़म का है? क्योंकि यह वर्षों से होता रहा है और बिहार में हिसाब रखने में भी भारी गड़बड़ियाँ हुईं।

मामले के जाल में फँसे लालू यादव को इस सिलसिले में जेल जाना पड़ा, उनके ख़िलाफ़ सीबीआई और आयकर की जाँच हुई, छापे पड़े और अब भी वे कई मुक़दमों का सामना कर रहे हैं। आय से अधिक सम्पत्ति के एक मामले में सीबीआई ने राबड़ी देवी को भी अभियुक्त बनाया है।

घपले की पोल[संपादित करें]

बिहार पुलिस ने 1994 में राज्य के गुमला, रांची, पटना, डोरंडा और लोहरदगा जैसे कई कोषागारों से फर्ज़ी बिलों के ज़रिये करोड़ों रुपये की कथित अवैध निकासी के मामले दर्ज किये। रातों-रात सरकारी कोषागार और पशुपालन विभाग के कई सौ कर्मचारी गिरफ़्तार कर लिये गये, कई ठेकेदारों और सप्लायरों को हिरासत में लिया गया और पूरे राज्य में दर्जन भर आपराधिक मुक़दमे दर्ज किये।

राबड़ी देवी भी लपेटे में[संपादित करें]

लेकिन बात यहीं ख़त्म नहीं हुई, राज्य के विपक्षी दलों ने माँग उठाई कि घोटाले के आकार और राजनीतिक मिली-भगत को देखते हुए इसकी जाँच सीबीआई से करायी जाये। सीबीआई ने मामले की जाँच की कमान संयुक्त निदेशक यू० एन० विश्वास को सौंपी और यहीं से जाँच का रुख़ बदल गया।

शातिर कारगुज़ारी[संपादित करें]

सीबीआई ने अपनी शुरुआती जाँच के बाद कहा कि मामला उतना सीधा-सादा नहीं है जितना बिहार सरकार बता रही है। सीबीआई का कहना है कि चारा घोटाले में शामिल सभी बड़े अभियुक्तों के सम्बन्ध राष्ट्रीय जनता दल व दूसरी पार्टियों के शीर्ष नेताओं से रहे हैं और उसके पास इस बात के पर्याप्त सबूत हैं कि काली कमाई का हिस्सा नेताओं की झोली में भी गया है।

सीबीआई के अनुसार, राज्य के ख़ज़ाने से पैसा कुछ इसी तरह निकाला गया। पशुपालन विभाग के अधिकारियों ने चारे, पशुओं की दवा आदि की सप्लाई के मद में करोड़ों रुपये के फ़र्जी बिल कोषागारों में वर्षों तक नियमित रूप से भुनाये।

विपक्ष ने चुनावी मुद्दा बनाया[संपादित करें]

जाँच अधिकारियों का कहना है कि बिहार के मुख्य लेखा परीक्षक ने इसकी जानकारी राज्य सरकार को समय-समय पर भेजी थी लेकिन बिहार सरकार ने इसकी ओर कोई ध्यान नहीं दिया। राज्य सरकार की वित्तीय अनियमितताओं का हाल ये है कि कई-कई वर्षों तक विधानसभा से बजट पारित नहीं हुआ और राज्य का सारा काम लेखा अनुदान के सहारे चलता रहा।

सीबीआई का कहना है कि उसके पास इस बात के दस्तावेज़ी सबूत हैं कि तत्कालीन मुख्यमन्त्री को न सिर्फ़ इस मामले की पूरी जानकारी थी बल्कि उन्होंने कई मौक़ों पर राज्य के वित्त मन्त्रालय के प्रभारी के रूप में इन निकासियों की अनुमति भी दी थी।

जाँच के दौरान सीबीआई ने ये दावा भी किया कि लालू प्रसाद यादव और उनकी पत्नी राबड़ी देवी अपनी घोषित आय से अधिक सम्पत्ति रखने के दोषी हैं।

व्यापक षड्यन्त्र[संपादित करें]

सीबीआई का कहना था कि ये सामान्य आर्थिक भ्रष्टाचार का नहीं बल्कि व्यापक षड्यन्त्र का मामला है जिसमें राज्य के कर्मचारी, नेता और व्यापारी वर्ग समान रूप से भागीदार है। मामला सिर्फ़ राष्ट्रीय जनता दल तक सीमित नहीं रहा. इस सिलसिले में बिहार के एक और पूर्व मुख्यमन्त्री जगन्नाथ मिश्र को गिरफ़्तार किया गया। राज्य के कई और मन्त्री भी गिरफ़्तार हुए। सीबीआई के कमान सँभालते ही बड़े पैमाने पर गिरफ़्तारियाँ हुईं और छापे मारे गये। लालू प्रसाद यादव के ख़िलाफ़ सीबीआई ने आरोप पत्र दाख़िल कर दिया जिसके बाद उन्हें अपने पद से इस्तीफ़ा देना पड़ा। बाद में सुप्रीम कोर्ट से ज़मानत मिलने तक वे कई महीनों तक जेल में रहे। मामले के तेज़ी से निबटारे में बहुत सारी बाधाएँ आयीं। पहले तो इसी पर लम्बी क़ानूनी बहस चलती रही कि बिहार से अलग होकर बने झारखण्ड राज्य के मामलों की सुनवाई पटना हाईकोर्ट में होगी या रांची हाईकोर्ट में।

सीबीआई ने ज़्यादातर मामलों में आरोप पत्र दाख़िल करके मुकदमा शुरू किया। इस मुकदमें का फैसला आने में पूरे सत्रह साल लगे।

संसद की सदस्यता भी गई[संपादित करें]

लालू प्रसाद यादव और जदयू नेता जगदीश शर्मा को घोटाला मामले में दोषी करार दिये जाने के बाद लोक सभा से अयोग्य ठहराया गया।[9]चुनाव आयोग के नये नियमों के अनुसार लालू प्रसाद अब 11 साल (5 साल जेल और रिहाई के बाद के 6 साल) तक लोक सभा चुनाव नहीं लड़ पायेंगे। उच्चतम न्यायालय ने चारा घोटाला में दोषी सांसदों को संसद की सदस्यता से अयोग्य ठहराये जाने से बचाने वाले प्रावधान को भी निरस्त कर दिया है। लोक सभा के महासचिव एस० बालशेखर ने यादव और शर्मा को सदन की सदस्यता के अयोग्य ठहराये जाने की अधिसूचना जारी कर दी। लोक सभा द्वारा जारी इस अधिसूचना के बाद संसद की सदस्यता गँवाने वाले लालू प्रसाद यादव भारतीय इतिहास में लोक सभा के पहले सांसद हैं और जनता दल यूनाइटेड के एक अन्य नेता जगदीश शर्मा दूसरे, जिन्हें 10 साल के लिये अयोग्य ठहराया गया।[10]

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. 'Fodder Scam' Could Bring Down a Shaky Indian Government, The New York Times, 1997-07-02. Accessed 2008-10-29. "... the scandal, said to involve $285 million, occurred in one of the country's poorest regions, the eastern state of Bihar. The money, which is reported to have been stolen over nearly 20 years, came from agricultural support programs aimed mainly at helping the 350 million Indians who live in extreme poverty ..."
  2. "Fodder scam: Charges framed against Lalu", Outlook India, 17 May 2005, http://www.outlookindia.com/pti_news.asp?id=298550, अभिगमन तिथि: 2008-11-04, "Snippet: ... The CBI has filed chargesheets in sixty cases, of which 53 are being tried in the courts at Ranchi and seven in Patna ..." 
  3. "Jail for Bihar politician", BBC, 7 June 2000, http://news.bbc.co.uk/2/hi/south_asia/781453.stm, अभिगमन तिथि: 2008-11-05, "Snippet: ... Former chief minister of the northern state of Bihar, Jagannath Mishra, has been remanded in judicial custody in a multi-million dollar fodder scam ..." 
  4. Lok Sabha, "Lok Sabha Debates, ser.11 Aug 26–30 1997 v.17 no.18-23", Lok Sabha Secretariat, Lok Sabha (House of the People), Parliament of India, 1999. Snippet: ... The leakages are such that no benefit is accruing to the intended beneficiaries. There is a lot of corruption, not only under this Government's rule, but it has been there for quite a long time. But of late, because of the financial problem, corruption has increased appallingly. There is also the Letter of Credit scandal which is a kind of a younger sister of the chara-ghotala of Bihar. This scandal also relates to the Animal Husbandry Department, but the CBI is dragging its feet ...
  5. Stifling dissent: PM’s lost kavach, The Tribune, 2002-01-22. Accessed 2008-10-31. "... Laloo has never been the kingpin but was one of the main beneficiaries of the fake purchase and distribution of the non-existent fodder for about two decades ..."
  6. क्या है चारा घोटाला? What is the fodder scam?, BBC, 2001-12-14. Accessed 2008-10-29. "... सीबीआई के अनुसार, राज्य के ख़ज़ाने से पैसा कुछ इस तरह निकाला गया- पशुपालन विभाग के अधिकारियों ने चारे, पशुओं की दवा आदि की सप्लाई के मद में करोड़ों रूपए के फ़र्जी बिल कोषागारों से वर्षों तक नियमित रूप से भुनाए. (According to the CBI, animal husbandry officials pilfered crores of rupees from the state treasury by filing bogus expense reports for fodder, medicines and other animal supplies) ... सीबीआई का कहना रहा है कि ये सामान्य आर्थिक भ्रष्टाचार का नहीं बल्कि व्यापक षड्यंत्र का मामला है जिसमें राज्य के कर्मचारी, नेता और व्यापारी वर्ग समान रूप से भागीदार है. मामला सिर्फ़ राष्ट्रीय जनता दल तक सीमित नहीं रहा. इस सिलसिले में बिहार के एक और पूर्व मुख्यमंत्री डॉक्टर जगन्नाथ मिश्र को गिरफ़्तार किया गया. राज्य के कई और मंत्री भी गिरफ़्तार किए गए. ... (This is not a normal case of economic corruption, says the CBI, but rather a pervasive conspiracy to steal in which state bureaucrats, elected leaders and businesspeople were equal accomplices. Culpability is not limited to the Rashtriya Janata Dal party. A prior chief minister of Bihar, Dr. Jagannath Mishra, has also been arrested as have other state minsters.) ..."
  7. >"चारा घोटाला : लालू प्रसाद यादव, जेडीयू सांसद लोकसभा से अयोग्‍य ठहराए गए" (हिन्दी में). ज़ी न्यूज़, नई दिल्ली. http://zeenews.india.com/hindi/news/india/fodder-scam-lalu-prasad-yadav-jd-u-mp-formally-disqualified-from-lok-sabha/193290. अभिगमन तिथि: 23 अक्तूबर 2013. 
  8. "चारा घोटाले में जेल में बंद लालू प्रसाद यादव की लोकसभा सदस्यता गई" (हिन्दी में). एनडीटीवी इंडिया, नई दिल्ली. http://khabar.ndtv.com/news/india/lalu-yadav-convicted-in-fodder-scam-disqualified-from-lok-sabha-370126. अभिगमन तिथि: 22 अक्तूबर 2013. 
  9. >"चारा घोटाला : लालू प्रसाद यादव, जेडीयू सांसद लोकसभा से अयोग्‍य ठहराए गए" (हिन्दी में). ज़ी न्यूज़, नई दिल्ली. http://zeenews.india.com/hindi/news/india/fodder-scam-lalu-prasad-yadav-jd-u-mp-formally-disqualified-from-lok-sabha/193290. अभिगमन तिथि: 23 अक्तूबर 2013. 
  10. "चारा घोटाले में जेल में बंद लालू प्रसाद यादव की लोकसभा सदस्यता गई" (हिन्दी में). एनडीटीवी इंडिया, नई दिल्ली. http://khabar.ndtv.com/news/india/lalu-yadav-convicted-in-fodder-scam-disqualified-from-lok-sabha-370126. अभिगमन तिथि: 22 अक्तूबर 2013. 

बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]